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लॉकडाउन में 8 बार आ चुका दिल्ली में भूकंप, क्या है वजह

नई दिल्‍ली

राष्‍ट्रीय राजधानी एक बार फिर भूकंप के झटकों से हिल गई। दिल्ली-एनसीआर समेत देश के कई इलाकों में भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। बताया जाता है कि दिल्ली-एनसीआर में भूंकप का यह झटका रिक्टर पैमाने पर 4.6 डिग्री मापा गया। जब से लॉकडाउन शुरू हुआ है, तब से अब तक ये दिल्ली में आया सातवां भूकंप है। सवाल ये भी है कि आखिर दिल्ली में इन दिनों बार-बार भूकंप क्यों आ रहा है?

इस भूकंप का केंद्र दिल्ली से 65 किलोमीटर दूर हरियाणा के रोहतक में पाया गया। वहां पर भूकंप का केंद्र जमीन के नीचे करीब 3.3 किलोमीटर दूर था। यह मध्यम तीव्रता का भूकंप था, इसलिए कमजोर इमारतों को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। अगर ये 5 से अधिक होता तो नुकसान काफी होता। हालांकि लॉकडाउन के अब तक के सभी भूकंपों में ये सबसे तेज था, जिसकी वजह से लोग डर कर घरों से बाहर निकल कर आ गए।

कल भी लगा था मामूली झटका
आज का झटका तेज था, तो लोगों को इसका पता चला, लेकिन कल यानी 28 मई को भी दिल्ली में भूकंप आया था। इसकी तीव्रता 2.5 थी, इसलिए लोगों को इसका कुछ पता नहीं चला।

15 मई को भी आया था भूकंप
इससे पहले दिल्ली में 15 मई को भूकंप आया था। रिक्‍टर स्‍केल पर इसकी तीव्रता 2.2 थी। यह भूकंप 11 बजकर 28 मिनट पर आया था। बहुत से लोगों को एहसास भी नहीं हुआ कि भूकंप का कोई झटका लगा है। मगर दिल्‍ली में पिछले दिनों भूकंप आने के मामले बढ़े हैं।

10 मई को भी हिली थी दिल्ली
दिल्ली में 10 मई को वजीरपुर में 3.5 तीव्रता का भूकंप आया था। भूकंप का केंद्र सतह से पांच किलोमीटर की गहराई में स्थित था। इसमें किसी तरह के जानमाल के नुकसान की सूचना नहीं मिली।

3 मई को भी आया था हल्का भूकंप
भूकंप का एक बेहद हल्का झटका 3 मई को भी महसूस किया गया था।

भूकंप से 13 अप्रैल को डर गए थे लोग
13 अप्रैल को भी दिल्ली में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। 13 अप्रैल को फिर भूकंप आया था। इस दिन रिक्टर स्केल पर तीव्रता 2.7 दर्ज की गई थी। लॉकडाउन की वजह से लोग घरों में ही हैं, ऐसे में भूकंप के झटके आने पर पैनिक फैल गया था।

एक दिन पहले ही 12 अप्रैल को भी कांपी थी दिल्ली
उससे पहले 12 अप्रैल को दिल्ली-NCR में शाम 5:50 के करीब भूकंप के झटके महसूस किए गए थे।

क्‍यों कांप रही दिल्‍ली की धरती?
NCS के हेड (ऑपरेशंस) जे एल गौतम ने टीओआई को बताया था कि पहले वाले दोनों भूकंप (12-13 अप्रैल) फॉल्‍ट-लाइन प्रेशर की वजह से आए, ऐसा नहीं लगता। उन्‍होंने कहा, “इन लोकल और कम तीव्रता वाले भूकंपों के लिए, फॉल्‍ट लाइन की जरूरत नहीं है। धरातल के नीचे छोटे-मोटे एडजस्‍टमेंट्स होते रहते हैं और इससे कभी-कभी झटके महसूस होते हैं। बड़े भूकंप फॉल्‍ट लाइन के किनारे आते हैं।”

रिस्‍क जोन में है दिल्‍ली
भूकंप के मामले में दिल्‍ली बेहद संवेदनशील है। भूवैज्ञानिकों ने दिल्ली और इसके आसपास के इलाके को जोन-4 में रखा है। यहां 7.9 तीव्रता तक का भूकंप आ सकता है। दिल्ली में भूकंप की आशंका वाले इलाकों में यमुना तट के करीबी इलाके, पूर्वी दिल्ली, शाहदरा, मयूर विहार, लक्ष्मी नगर और गुड़गांव, रेवाड़ी तथा नोएडा के नजदीकी इलाके शामिल हैं।

क्‍या है भारतीय उपमहाद्वीप में भूकंप का कारण
भारतीय उपमहाद्वीप में विनाशकारी भूकंप आते रहे हैं। 2001 में गुजरात के कच्छ क्षेत्र में आए भूकंप में हजारों की संख्या में लोग मारे गए थे। भारत तकरीबन 47 मिलीमीटर प्रति वर्ष की गति से एशिया से टकरा रहा है। टेक्टॉनिक प्लेटों में टक्कर के कारण ही भारतीय उपमहाद्वीप में अक्सर भूकंप आते रहते हैं। हालांकि भूजल में कमी से टेक्टॉनिक प्लेटों की गति में धीमी हुई है।

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