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आर्थिक सुस्ती का भयावह आंकड़ा, और बुरा दौर आना बाकी

नई दिल्ली

देश की अर्थव्यवस्था पिछले सात-आठ तिमाही से सुस्ती झेल रही थी और कोरोना ने इस समस्या को और गंभीर करने का काम किया। वित्त वर्ष 2020 की चौथी तिमाही यानी जनवरी-मार्च की GDP ग्रोथ की रिपोर्ट आई है। चौथी तिमाही में ग्रोथ रेट घटकर 3.1 फीसदी पर आ गया। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह 5.7 फीसदी रहा था, जबकि तीसरी तिमाही का ग्रोथ रेट 4.7 फीसदी रहा था।

आने वाली तिमाही में आंकड़ें और बिगड़ेंगे
इस रिपोर्ट से एक बात तो साफ है कि आने वाली तिमाही में अर्थव्यवस्था के लिए बुरी खबर बाकी है। जनवरी-मार्च तिमाही में कोरोना का आंशिक असर था। लॉकडाउन भी 25 मार्च को लागू किया गया था। जबकि वित्त वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही यानी अप्रैल-जून में दो महीने का कंप्लीट लॉकडाउन रहा है। ऐसे में यह अंदाजा लगा पाना मुश्किल है कि GDP का आंकड़ा किस तरह का आएगा।

2008-09 के बाद सबसे कमजोर आंकड़ा
चौथी तिमाही की जो रिपोर्ट आई है उसको लेकर कहा जा रहा है कि 2008-09 के वैश्विक वित्तीय संकट के बाद अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर का सबसे कमजोर आंकड़ा है। ऐसे में विकास दर में गिरावट का सबसे बुरा दौर अभी आना है। इसकी वजह कोरोना वायरस की वजह से लागू लॉकडाउन है। राष्ट्रव्यापी बंद का अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ा है, इसका पता अगली तिमाही यानी चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के आंकड़े आने के बाद चलेगा।

कोर सेक्टर आउटपुट में 38.10 फीसदी की गिरावट
अगर कुछ आंकड़ों पर नजर डालें तो इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। अप्रैल महीने में आठ कोर सेक्टर आउटपुट में 38.10 फीसदी की भारी गिरावट आई है। मार्च में इन आठ सेक्टर में केवल 9 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी। इन आठ सेक्टर का इंडस्ट्रियल प्रॉडक्शन इंडेक्स (IIP) में 40 फीसदी से ज्यादा का योगदान है। बता दें कि पिछले दो महीने से लगातार इसमें गिरावट आ रही है। फरवरी में यह 7.1 फीसदी था।

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 1.4 फीसदी की गिरावट
सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (Ministry of Statistics and Program Implementation) ने शुक्रवार को कहा कि बीते वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में विनिर्माण क्षेत्र (Manufacturing sector) में 1.4 फीसदी की गिरावट आई है, जबकि एक साल पहले समान तिमाही में इसमें 2.1 फीसदी की वृद्धि हुई थी। हालांकि, कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर बढ़कर 5.9 फीसदी पर पहुंच गई, जो एक साल पहले की समान तिमाही में 1.6 फीसदी थी।

2019-20 की पहली तीन तिमाही की विकास दर घटाई गई
आंकड़ों के अनुसार, पूरे वित्त वर्ष 2019-20 में जीडीपी की वृद्धि दर गिरकर 4.2 फीसदी रह गई है। इससे पिछले वित्त वर्ष में यह 6.1 फीसदी रही थी। यह वार्षिक वृद्धि दर का 11 साल का सबसे निचला स्तर है। बीते वित्त वर्ष की पहली तीन तिमाहियों के वृद्धि दर के आंकड़ों को घटाया गया है। बीते वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) के वृद्धि दर के आंकड़े को घटाकर 4.7 की जगह 4.1 फीसदी किया गया है। इसी तरह बीते वित्त वर्ष की पहली और दूसरी तिमाही के आंकड़ों को भी क्रमश 5.6 से कम कर 5.2 फीसदी और 5.1 की जगह 4.4 फीसदी किया गया है।

जीडीपी में 5 फीसदी गिरावट का अनुमान
अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों एसऐंडपी ग्लोबल और फिच रेटिंग्स के अलावा कुछ अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अप्रैल से शुरू हुए चालू वित्त वर्ष में चार दशक की सबसे बड़ी गिरावट देखने को मिलेगी। वित्त वर्ष के दौरान जीडीपी में रेकॉर्ड पांच फीसदी की गिरावट आएगी। कोविड-19 संकट शुरू होने से पहले ही भारतीय अर्थव्यवस्था में सुस्ती थी।

कंजप्शन और इन्वेस्टमेंट में भारी गिरावट
गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC Crisis) के संकट तथा उपभोक्ता मांग घटने तथा निजी निवेश नीचे आने से अर्थव्यवस्था की स्थिति पहले से ही अच्छी नहीं थी। लॉकडाउन की वजह से सेवा क्षेत्र ओर विनिर्माण क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हुए हैं, जिससे रोजगार और आर्थिक वृद्धि के प्रभावित होने की आशंका है। जीडीपी में सेवा क्षेत्र का हिस्सा 55 फीसदी का है। शुक्रवार को ही आए एक अन्य आंकड़े के अनुसार अप्रैल में विनिर्माण क्षेत्र का उत्पादन 38.1 फीसदी घटा है। इसमें कोयला, कच्चा तेल और बिजली सहित आठ बुनियादी उद्योग आते हैं।

राजकोषीय घाटा 4.59 फीसदी पर पहुंचा
अर्थव्यवस्था में सुस्ती से राजकोषीय घाटा भी बढ़ा है। बीते वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद के 4.59 फीसदी पर पहुंच गया है, जबकि इसका बजटीय लक्ष्य 3.8 फीसदी का था। जीडीपी के आंकड़ों पर डेलॉयट इंडिया की अर्थशास्त्री रुमकी मजूमदार ने कहा कि बीते वित्त वर्ष की चौथी तिमाही के जीडीपी आंकड़े एक दशक से अधिक पुराने वैश्विक वित्तीय संकट के बाद से सबसे खराब हैं।उन्होंने कहा, ‘2020 की शुरुआत से आर्थिक गतिविधियों में कुछ सुधार दिखने लगा था। पहले दो माह के औद्योगिक उत्पादन के आंकड़ों से पता चलता है कि औद्योगिक गतिविधियां सुधरने लगी हैं।’ उन्होंने कहा, ‘दूसरे शब्दों में कहा जाए, तो जनवरी-मार्च की तिमाही में जो सुस्ती रही है, उसमें प्रमुख योगदान मार्च के दूसरे पखवाड़े का है जब देश में कोविड-19 तेजी से फैलने लगा था।’

महामारी समाप्त होने के बाद आएगी तेजी
उन्होंने कहा कि इससे लगता है कि यदि कोविड-19 नहीं होता तो भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूती से आगे बढ़ती।’ मजूमदार ने कहा कि कोई यह अनुमान नहीं लगा सकता कि दो सप्ताह की इस अड़चन का क्या प्रभाव पड़ा। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में स्थिति और खराब रहेगी। यह महामारी समाप्त होने के बाद देश की स्थिति में तेजी से सुधार होगा। अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत है और कच्चे तेल की कीमतों में कमी से भी मदद मिलेगी।

एक साल तक आर्थिक गतिविधि पर रहेगा असर
एसऐंडपी ने गुरुवार को कहा कि देश में अगले एक साल तक आर्थिक गतिविधियां प्रभावित रहेंगी। कोविड-19 से प्रभावित अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए सरकार ने 20.9 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज की घोषणा की है। मार्च से रिजर्व बैंक महत्वपूर्ण नीतिगत दरों में 1.15 फीसदी की कटौती कर चुका है। लॉकडाउन की वजह से सेवा क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित हुआ है।

चीन की अर्थव्यवस्था में 6.8 फीसदी की गिरावट
व्यापार, होटल और परिवहन सेवाओं में चौथी तिमाही में 2.6 फीसदी की वृद्धि हुई। वहीं वित्तीय सेवाओं की वृद्धि दर 2.4 फीसदी रही है। जनवरी-मार्च की तिमाही में सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) की वृद्धि दर तीन फीसदी रही है। भारतीय रिजर्व बैंक ने 2019-20 में आर्थिक वृद्धि दर पांच फीसदी रहने का अनुमान लगाया था। कोरोना वायरस महामारी की वजह से जनवरी-मार्च, 2020 के दौरान चीन की अर्थव्यवस्था में 6.8 फीसदी की गिरावट आई है।

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