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लद्दाख पर राजनाथ ने US को दिया दो टूक संदेश

नई दिल्ली

भारत ने एक और तरकीब से बता दिया है कि चीन के साथ जारी गतिरोध को दूर करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से आई मध्यस्थता की पेशकश स्वीकार नहीं है। इस बार भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने अमेरिकी समकक्ष से बातचीत की और इस आशय का संदेश दे दिया। ट्रंप ने लगातार दूसरे दिन भी भारत-चीन के बीच मध्यस्थता की पेशकश दोहराई थी।

भारतीय-अमेरिकी रक्षा मंत्रियों के बीच बातचीत
राजनाथ ने अमेरिकी रक्षा मंत्री मार्क टी. एस्पर पर टेलिफोन से बातचीत की और उन्हें बताया कि लद्दाख में 5 मई से कायम गतिरोध दूर करने के लिए चीन के साथ बातचीत के मौजूदा तंत्रों का इस्तेमाल किया जा रहा है। सूत्रों ने बताया कि सिंह ने एस्पर को अवगत कराया कि स्थिति को सुलझाने के लिए मौजूदा द्विपक्षीय तंत्रों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

अमेरिकी रक्षा मंत्री की पहल पर हुई बात
रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि दोनों पक्षों ने साझा सुरक्षा हित के क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर चर्चा की। इसमें यह भी कहा गया कि अमेरिकी पक्ष के आग्रह पर टेलीफोन पर वार्ता हुई। इसमें कहा गया, ‘उन्होंने विभिन्न द्विपक्षीय रक्षा सहयोग समझौतों पर प्रगति की समीक्षा की और हमारी रक्षा भागीदारी को और बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।’

ट्रंप की मध्यस्थता की पेशकश नामंजूर
बहरहाल, दोनों रक्षा मंत्रियों की बातचीत में भारत की तरफ से वॉशिंगटन को स्पष्ट संकेत दे दिया गया कि मध्यस्थता की उसकी पेशकश मंजूर नहीं है। ट्रंप ने पहले बुधवार को कहा था कि वो भारत-चीन के बीच मध्यस्थता को इच्छुक हैं और सक्षम भी। ट्रंप ने गुरुवार को भी मध्यस्थता करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात की है तथा मोदी ‘बड़ी तनातनी’ पर ‘अच्छे मूड’ में नहीं हैं। इसके कुछ घंटे बाद सरकार के शीर्ष सूत्रों ने पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ चल रही सैन्य तनातनी के मुद्दे पर मोदी से बात करने के ट्रंप के दावे को खारिज किया।

ध्यान रहे कि भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी गुरुवार को कहा था कि सीमा विवाद को शांतिपूर्वक सुलझाने के लिए सीधे चीन से बातचीत हो रही है। चीन ने भी ट्रंप की पेशकश को खारिज किया और कहा कि दोनों देश वार्ता के जरिए अपने मतभेदों को उचित रूप से सुलझाने में सक्षम हैं और किसी तीसरे पक्ष की मदद की आवश्यकता नहीं है।

तीन सप्ताह से जारी है गतिरोध
पूर्वी लद्दाख में पैंगोग त्सो, गलवान घाटी, देमचोक और दौलत बेग ओल्डी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच तीन सप्ताह से गतिरोध जारी है जिसे 2017 में हुए डोकलाम गतिरोध के बाद सबसे बड़ी तनातनी माना जा रहा है। तनाव तब उत्पन्न हुआ जब चीन ने पैंगोंग त्सो झील के आसपास फिंगर क्षेत्र में भारत द्वारा बनाई जा रही एक महत्वपूर्ण सड़क का कड़ा विरोध किया। इसके साथ ही उसने गलवान घाटी में दारबुक-शयोक-दौलत बेग ओल्डी सड़क का भी विरोध किया। पूर्वी लद्दाख में स्थिति तब बिगड़ गई जब पांच मई की शाम पैंगोंग त्सो में दोनों देशों के लगभग 250 सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई। इसके बाद उत्तरी सिक्किम में भी नौ मई को इसी तरह की घटना हुई।

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