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नेपाल से तल्खी के बीच स्वामी की मोदी को सलाह

नई दिल्ली

बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुब्रमण्यम स्वामी शायद नेपाल की तरफ से खड़ा किए गए बखेड़े से निपटने के भारत के तौर-तरीकों से खुश नहीं हैं। उन्होंने विदेश मंत्रालय के राजनयिकों को नेपाल के लिए मधुर भाषा के इस्तेमाल की सलाह दी है। हालांकि, उन्होंने राजनयिकों को सीधे संबोधित करने से बचते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि वो विदेश मंत्रालय को यह सुझाव दें।

नेपाली हमारे छोटे भाई: स्वामी
उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘पीएम को चाहिए कि वो विदेश मंत्रालय के राजनयिकों को अपने नेपाली समकक्षों के साथ मधुर भाषा का इस्तेमाल करने को कहें।’ स्वामी ने नेपालियों को रक्तबंधु (ब्लड ब्रदर) बताते हुए कहा कि हमें उनके लिए बड़ा दिल रखना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘नेपाली हमारे छोटे भाई हैं। अगर नेपाली खुद को अलग-थलग महसूस करें तो हमें अपना दिल बड़ा कर उनकी तकलीफ समझकर उनकी भावनाओं का सम्मान करना चाहिए।’

स्वामी ने क्यों कहा ऐसा?
सवाल उठता है कि आखिर डॉ. स्वामी को यह सुझाव देने की दरकार क्यों महसूस हुई? यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि अब तक भारत की तरफ से नेपाल के लिए कड़े शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया गया। इसके उलट नेपाल के प्रधानमंत्री केपी ओली ने यहां तक कह दिया कि कोरोना वायरस का ज्यादा खतरा भारत से है। इतना ही नहीं, नेपाल की सरकार ने नया नक्शा जारी करते हुए भारतीय इलाकों को अपनी सीमा में बता दिया।

नेपाल की हरकत
नेपाल की इन हरकतों पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने नाराजगी जरूर जाहिर की। मीडिया के सवालों के जवाब देते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि नेपाल द्वारा जारी किया गया नया नक्शा किसी ऐतिहासिक तथ्य पर आधारित नहीं बल्कि मनगढ़ंत है। यह मामला दोनों पक्षों को बातचीत के जरिए ही सुलझाना है। इस तरह की हरकत भारत की तरफ से स्वीकार नहीं होगी। उन्होंने कहा, ‘नेपाल को भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना चाहिए। नेपाल के नेतृत्व को ऐसा माहौल बनाना चाहिए जिससे बैठकर बात हो सके।’

चीन के उकसावे पर बौखलाए नेपाली पीएम
ध्यान रहे कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जब लिपुलेख से कैलाश मानसरोवर जाने वाले रास्ते का उद्घाटन किया, तभी नेपाल ने इसका विरोध किया। नेपाल तथ्यहीन बातों से इस हिस्से को अपना बताने लगा। बाद में उसने अपने देश का नया नक्शा जारी कर दिया जिसमें भारत के 395 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र नेपाल में दिखाया गया है। हालांकि, केपी ओली सरकार नए नक्शे को अब तक नेपाली संसद में पेश नहीं कर पाई है। स्वाभाविक है नेपाल ने यह सब चीन के उकसावे पर किया, लेकिन अब वह भारत से बातचीत करना चाह रहा है।

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