Tuesday , July 14 2020
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अब भेल में ट्रांसफर प्रमोशन का फंडा

भोपाल

दुनिया में कोरोना वायरस क्या आया मानों इसका सबसे ज्यादा असर भेल जैसी महारत्न कंपनी में ही दिखाई दे रहा है। करीब दो माह के लाक डाउन में अधिकारी कर्मचारियों को मिलने वाले लाभ खर्चो में कटौती के नाम पर कम होना शुरू हो गये है। अब 25 जून के पहले इनके प्रमोशन और ट्रांसफर का दौर हर साल पहले से ही शुरू हो जाता है लेकिन इस बार इसकी हलचल तक दिखाई नहीं दे रही। अब प्रशासनिक स्तर पर यह चर्चा है कि इस बार यदि ट्रांसफर व प्रमोशन होते भी है तो कंपनी द्वारा मिलने वाले लाभ मिलना कुछ मुश्किल ही दिखाई दे रहा है आगे प्रबंधन की मर्जी। यही नहीं जैसे वर्करों का पद नाम परिवर्तन कर उन्हें इंजीनियर बना दिया था इसी तरह बिना लाभ के पद नाम परिवर्तन किया जा सकता है। आखिर कंपनी के मुखिया करें भी तो क्या करें। पिछले वित्तीय वर्ष के कई आर्डर जहां उलझे पड़े है वहां इस वित्तीय वर्ष में आर्डर भी भगवान भरोसे है। ऐसे में ट्रांसफर और प्रमोशन में मिलने वाले लाभ में गाज गिर सकती है।

कारखाने में नेताओं के बल्ले-बल्ले

भले ही कोरोना संकट के चलते कारखाने में काम का दौर शुरू हो गया हो। ईमानदार कर्मचारी अपना काम ईमानदारी से कर रहे हों लेकिन प्रतिनिधि यूनियन के कुछ नेता अपनी नेतागिरी की आढ़ में अफसरों को डरा धमका कर कारखाने में ड्यूटी पर तो आते है लेकिन पंच कर घर में आराम फरमाते है। ऐसा लगता है कि कारखाने का प्रशासन डर के मारे इन पर कार्यवाही करने से कतरा रहा है। मजेदार बात तो यह है कि इनमें से कुछ नेता तो कंटेंटमेंट एरिया से आते है। दरअसल जो नेता पंच कर ड्यूटी से गायब हो जाते है वह एजीएम एचआर के पास कर्मचारियों की समस्या या किसी भी अन्य मुद्दे को लेकर दबाव बनाकर अपना उल्लू सीधा कर रहे है। भगवान बचाए ऐसे नेताओं से जो न केवल ट्रांसफर, प्रमोशन और एडमिशन के नाम पर भी प्रबंधन से काम कराकर लाभ-शुभ कमा रहे है। आश्चर्य तो इस बात का किया जा रहा है कि भेल के मुखिया को आये काफी समय हो चुका है फिर भी वह इन नेताओं पर लगाम नहीं लगा पा रहे। ड्यूटी तो सबके लिये बराबर होती है।

जीएम हेड राजीव के भोपाल आने की चर्चाएं

खबर है कि भेल दिल्ली कारपोरेट नोएडा स्थित ट्रांसमिशन ग्रुप यानि टीबीजी जल्द ही भोपाल स्थानांतरित हो रहा है और इस ग्रुप के मुखिया जीएम हेड राजीव सिंह है। ऐसे में जब टीबीजी ग्रुप भोपाल युनिट आएगा तो मुखिया भी साथ में आयेंगे। यहां चर्चा इस बात की है कि भोपाल कॉडर के जीएम हेड श्री सिंह इसी युनिट से पहले विशाखापट्टनम और फिर नोएडा टीबीजी ग्रुप भेजे गए है। वह ईडी पद की कतार में खड़े है। अब उनके भोपाल आने की अटकलें तेज हो गई है तो दूसरी ओर 25 जून के पहले ट्रांसफर का दौर भी शुरू हो जायेगा। इधर भेल के एचआर विभाग में चार घंटे और फायनेंस विभाग में आठ घंटे काम कराने का मामला भी चर्चाओं में है इससे फायनेंस के अधिकारी कर्मचारी काफी परेशान बताये जा रहे है। प्रबंधन की दोहरी नीति किसी को रास नहीं आ रही है।

मामला जवाहर बाग की मिट्टी का

भेल टाउनशिप में जवाहर बाग के आम काफी मशहूर है। इस आम का स्वाद चखने लोग दूर दूर से आते है फिलहाल इसके लिये टेंडर प्रक्रिया जल्द ही शुरू की जायेगी। अब इसका टेंडर किसी के भी हाथ लगे लेकिन जवाहर बाग के इंचार्ज का दखल जरूर दिखाई दे रहा है। चर्चा है कि बेलगाम हो चुके इन साहब ने काफी लंबे चौड़े क्षेत्र फल में फैले बाग से अपने लाभ-शुभ के चलते मिट्टी खुदाई का काम बिना किसी टेंडर के ही शुरू कर दिया है। कहने को तो यह मिट्टी भेल टाउनशिप में जहां-जहां पौधारोपण होना है डलनी थी लेकिन एक एजेंसी ट्रकों में भर भर कर टनों से मिट्टी टाउनशिप से बाहर ले जा रही है। मजेदार बात तो यह है कि सिविल के मुखिया भी इस बाग में बैठकर इंचार्ज से गपशप करते हुये देखने में आ रहे है लेकिन मिट्टी खुदाई का काम उन्हें दिखाई नहीं दे रहा है शायद एक सोलर पैनल के मामले ने उन्हें भी ठंडा कर दिया है।

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