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कोरोना वायरस के इलाज के दौरान काले पड़े एक डॉक्टर की मौत

पेइचिंग

कोरोना वायरस जब चीन में फैलने लगा था, वुहान के सेंट्रल हॉस्पिटल के डॉक्टर ली वेन्लियांग ने इसके बारे में प्रशासन को बताने की कोशिश की थी लेकिन उन पर ही कई आरोप जड़ दिए गए। न सिर्फ कुछ महीनों बाद ली की मौत हो गई बल्कि उनके साथ काम करने वाले 4 और लोगों की भी। इनमें से एक डॉ. हू विफेंग थे जो अप्रैल के महीने में उस वक्त चर्चा में आए थे जब कोरोना इन्फेक्शन के बाद इलाज के दौरान उनका रंग काला पड़ने लगा था। लंबे इलाज के बाद विफेंग की भी मंगलवार को मौत हो गई। यह साफ नहीं है कि उनकी मौत कैसे हुई लेकिन लोगों में इस बात को लेकर नाराजगी है कि अगर वेन्लियांग की बात सुन ली जाती तो कई जानें बचाई जा सकती हैं।

ऐंटीबायॉटिक से काला पड़ा था रंग
डॉ. हू विफेंग वुहान के सेंट्रल अस्पताल में ही काम करते थे। उन्हें भी जनवरी में इन्फेक्शन हुआ था। इलाज के दौरान उनका और उनके साथ एक और डॉक्टर यी फॉन का रंग काला पड़ गया था। डॉक्टरों ने पहले बताया था कि लिवर के डैमज होने के बाद हार्मोन असंतुलन के कारण इन दोनों के त्वचा का रंग काला पड़ गया। हालांकि, बाद में चीन-जापान फ्रेंडशिप अस्पताल के डिपार्टमेंट ऑफ क्रिटिकल केयर मेडिसिन के डेप्युटी डायरेक्टर प्रफेसर डुआन जुन ने बताया था कि मेडिकल टीम ने दोनों डॉक्टरों को ऐंटीबायॉटिक Polymyxin B दी थी जिसकी वजह से उनका रंग काला पड़ा।

हैमरेज के बाद मौत
उन्होंने दावा किया था कि जल्द ही रंग सामान्य हो जाएगा। डॉक्टर यी को करीब 39 दिनों तक लाइफ सपोर्ट मशीन पर रखा गया जिसके बाद उन्हें बचाया जा सका। वहीं, डॉक्टर विफेंग को भी लंबे इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई लेकिन बताया गया है कि उसके बाद भी उन्हें हैमरेज हुए। आखिरकार कई महीनों तक जिंदगी और मौत के बीच झूलने के बाद हू की मौत हो गई।

…तो बच जातीं जानें
इसके बाद से देश में नाराजगी है। लोगों का कहना है कि कोरोना वायरस के ऐसे कई लक्षण हैं जिनके बारे में किसी को नहीं पता और इलाज के साइड-इफेक्ट्स से भी लोगों की जान जा रही है। अगर शुरुआत में ली वेन्लियांग की बात को गंभीरता से लिया गया होता तो डॉ. हू जैसे लोगों को बचाया जा सकता जो दूसरों की जान बचाते-बचाते अपनी जान गंवा बैठे।

ली वेन्लियांग की फरवरी में मौत
दिसंबर 2019 के आखिर में जब वुहान के अस्पताल में वायरस का पहला मामला सामने आया था, तो व्हिसलब्लोअर वेनलियांग ने ही अपने सहकर्मियों और अन्य लोगों को चीनी सोशल मीडिया ऐप वीचैट जरिये बताया था कि देश में सार्स जैसे वायरस का पता चला है। वेलियांग की कोरोना के चपेट में आने से फरवरी मेंं मौत हो गई थी। वेनलियांग की मौत के बाद चीन सरकार पर लोगों ने अपना गुस्सा जाहिर किया था। लोगों को गुस्सा इस बात से भी है कि अगर चीन ने समय रहते डॉक्टर की बात मानी होती तो यह वायरस आज लोगोंं की जिंदगियां तबाह नहीं कर रहा होता।

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