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प्रमोशन-ट्रांसफर काराने वाले दलाल नेताओं पर प्रबंधन की नजर

भोपाल

भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड भेल में जून का माह ट्रंासफर-प्रमोशन का है। 25 जून तक लगभग प्रमोशन लिस्ट फायनल होकर बाहर आ जायेगी ऐसे में कु छ दलाल नेता प्रमोशन पाने वाले कर्मचारी-सुपरवाइजर और एक्जूक्युटिव की तलाश कर लाभ शुभ का माध्यम से यह सब कराने की कोशिश में प्रबंधन पर दबाव बनाने में लग गये हैं। चर्चा है कि प्रमोशन और तबादले के लिए अधिकारियों पर कैसे दबाव बने इसके लिए प्रमोशन पॉलिसी में खामियां निकालने मेें लग गये हैं साथ ही उनकी पोल को भी अपनी जेब में रखकर घूम रहे हैं। वैसे तो यह काम हर साल बदस्तूर चलता आ रहा है लेकिन इस बार कोरोना वायरस ने प्रमोशन पाने वालों को सही लाभ मिल जाये इसके लिए प्रबंधन की पैनी नजर एैसे नेताओं पर है यूं भी यह कहा जाने लगा है कि भेल के मुखिया तो ईमानदार हैं ही साथ ही वर्तमान में जीएम एचआर का काम देख रहे एक महाप्रबंधक भी उनसे कम ईमानदार नहीं हैं। ऐसे में कुछ दलाल नेताओं की दाल गलती है या नहीं यह तो प्रमोशन और तबादला लिस्ट जारी होने के बाद ही पता चल पायेगा।

एक इंजीनियर पावर से बनेगा डिप्टी मैनेजर

भेल टाउनशिप में सिविल के काम मनमाने ढंग से कराकर ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने वाले इंजीनियरों की कमी नहीं हैं उस पर सिविल के बड़े साहब का सर पर हाथ है तो कहना ही क्या यानी इंजीनियर के तो बल्ले-बल्ले। ऐसा ही एक मामला भेल टाउनशिप में चर्चाओं में है। पिपलानी सिविल में मनमाना काम कर ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के मामलें में पूर्व नगर प्रशासक ने जिस इंजीनियर को नगर प्रशासन विभाग भेज दिया था उसके प्रमोशन के लिए एक अपर महाप्रबंधक और एक ठेकेदार पूरे पावर के साथ बड़े अफसरों और कुछ ट्रेड यूनियन नेताओं के दरवाजे खटखटा रहे हैं। ऐसा भी नहीं कि इन अफसरों को यह नहीं मालुम नहीं कि जो इंजीनियर अब डिप्टी मैनेजर के पद पर प्रमोशन चाह रहा है वह कितना दूध का धुला है और ऐसा भी नहीं कि भेल के प्रभारी मानव संसाधन इस इंजीनियर के बारे में कुछ न जानते हों, क्योंकि वह भी टाउनशिप के नगर प्रशासक रह चुके हैं। रही बात प्रमोशन की कतार में खड़े इंजीनियर की उनकी शिकायतें शुरू से कम नहीं हुई हैं। अब पूरी ताकत के साथ एक यूनियन सीवीसी और चेयरमेन को उनके कारनामों का पुलिंदा भेजने की तैयारी में लग गये हैं।

नौकरी छोडऩे के बाद भी नेता जी में दम

आप भरोसा करें या न करें देश में भेल जैसी महारत्न कंपनी एक ऐसी कंपनी है जिसमें कर्मचारी हो या ठेका मजदूर नेतागिरी की आड़ में काम न कर डयुटी समय में बाहर घूमते नजर आयेंगे। प्रबंधन की मजबूरी जो भी रही हो लेकिन वह इन नेताओं पर हाथ डालने से कतराता है नतीजा यह है कि एक नेता की आड़ में कोई भी छुटभैये नेता मजे ले रहे हैं। भेल को कितना नुकसान उठाना पड़ रहा है इसकी परवाह कोरोना काल में प्रबध्ंान को नहीं है। पिपलानी, बरखेड़ा, गोविंदपुरा और हबीबगंज सिविल आफिसों में यह नेता प्रबंधन पर दबाव बनाकर तबादला करवाकर सालों से जमें हुए हैं। डरपोक सिविल अफसर तो इन पर डयुटी से गायब रहने पर कोई कार्यवाही करते ही नहीं हैं ऐसे कई मामले प्रबध्ंान की जानकारी में हैं। मजेदार बात तो यह है कि एक नेता ऐसे भी हैं जो सिविल आफिस से नौकरी को अलविदा को कह दिया लेकिन भेल का आवास आज तक नहीं छोड़ा। एक अनुमान के अनुसार उन पर एक लाख से ज्यादा किराया तक बाकी है उस पर ईएसआई की सुविधा भी बरकरार है। फिर भी प्रबंधन उससे न तो आवास खाली करवा पाया और न ही ईएसआई की सुविधा पर बे्रक लग पाया है। एक भाजपा नेता का वरद हस्त होने से प्रबंधन भी पंगु हो गया है।

65 पार और बीमार फिर भी बने हैं साहब

यूं तो प्रबध्ंान की जितनी तारीफ की जाये कम है। कोरोना संक्रमण के चलते यह कहा जा रहा है कि 65 पार कर चुके किसी को भी नौकरी पर रखना ठीक नहीं है और उस पर भी यदि वह बीमार है यानी हार्ट पेशेंट है साथ ही हर दो माह में अपना चेकअप कराने भोपाल से जा रहा है तो ऐसे में उससे दूरी बनाना जरूरी है। मजेदार बात तो यह है कि इन सब बातों के अलावा भेल लेडिज क्लब में काम कर रहे एक रिटायर्ड सुपरवाइजर को नियुक्ति दे डाली। इनकी मनमानी के चर्चे और मजदूरों को परेशान करने की बातें आम हो गई है। आये दिन शिकायतों का पुलिंदा लेकर हेल्ंिपग हेंड के कर्मचारी अपने आला अफसरों के दरवाजे पहुंच रहे हैं लेकिन यह पावरफुल साहब के ऊपर किसका पावर है कि न तो क्लब की अध्यक्षा, उपाध्यक्ष और अन्य सदस्य इन पर हाथ डालने की बजाय माफ करने पर तुले हुए है। कारगुजारी यह भी है इन साहब परेशानियों की हद पार कर दी है। आगे क्या होगा इसका भगवान ही मालिक है।

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