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चीन बॉर्डर टेंशन पर PM का विरोध कर फंसी कांग्रेस

नई दिल्ली

भारत-चीन सीमा विवाद को लेकर जितनी टेंशन सीमा है पर उससे कहीं ज्यादा टेंशन का माहौल देश के अंदर बनाने की कोशिश की जा रही है। जहां एक तरफ देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दावा कर रहे हैं, चीन ने भारत की एक इंच जमीन पर भी कब्जा नहीं किया है। देश की सेना चीन की हर हरकत का जवाब देने में सक्षम है। सीमा पर सेनाओं ने अपनी तैयारी पूरी कर रखी है। तो वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी चीन के मसले पर लगातार मोदी सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं। राहुल गांधी बार-बार पीएम मोदी से देश की सुरक्षा को लेकर सवाल दागे जा रहे हैं। वहीं कांग्रेस के कुछ नेता दावा कर रहे हैं चीन ने भारत की 20 से 30 किलोमीटर जमीन पर कब्जा कर लिया है। हालांकि, इसका कोई प्रमाण नहीं है।

राहुल गांधी और कांग्रेस से कुछ प्रवक्ताओं ने जिस उम्मीद के साथ चीन के मुद्दे पर सरकार को घेरने की रणनीति बनाई थी। वह रणनीति पूरी तरफ विफल दिख रही है। क्योंंकि इसमें कांग्रेस को न तो सरकार के विपक्षियों को साथ मिल रहा है और न ही कांग्रेस के सहयोगी ही साथ देने के लिए तैयार हैं। सोमवार को बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा है चीन के मुद्दे पर देश की प्रमुख पार्टियों को एक-दूसरे के साथ खींचतान नहीं करनी चाहिए। इस आपसी लड़ाई में सबसे ज्यादा देश की जनता का नुकसान हो रहा है। उन्होंने साफ कहा कि इस मुद्दे पर उनकी पार्टी केंद्र सरकार के साथ खड़ी है।

सोनिया गांधी की भी कोशिश रही बेअसर
चीन के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरने के लिएकांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी पूरी कोशिश की, मगर उन्हें भी किसी विपक्ष या सहयोगी दल का साथ नहीं मिला। सोनिया ने चीन के मुद्दे पर पीएम मोदी पर हमला करते हुए कहा था कि सीमा पर संकट के समय सरकार अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकती तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बताना चाहिए कि क्या वह इस विषय पर देश को विश्वास में लेंगे? इसके अलावा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी इस बारे में सच बोलें और चीन से अपनी जमीन वापस लेने के लिए कार्रवाई करें तो पूरा देश उनके साथ खड़ा होगा।

इन पार्टियों ने दिखाई कांग्रेस को पीठ
-कांग्रेस के सहयोगी दल एनसीपी प्रमुख शरद पवार भी चीन मामले पर मोदी सरकार के साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि’हम नहीं भूल सकते कि 1962 में क्या हुआ था, चीन ने हमारी 45 हजार स्क्वेयर किमी जमीन पर कब्जा कर लिया था। यह जमीन अब भी चीन के पास है, लेकिन वर्तमान में मुझे नहीं पता कि चीन ने जमीन ली है या नहीं, मगर इस पर बात करते वक्त हमें इतिहास याद रखना चाहिए, राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर राजनीति नहीं करनी चाहिए।

-समाजवादी पार्टी के प्रमुख व यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव भी चीन मामले पर मोदी सरकार के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। सपा अध्यक्ष ने ट्वीट कर कहा था कि चीन के हिंसक व्यवहार को देखते हुए भारत सरकार को सामरिक के साथ-साथ आर्थिक जवाब भी देना चाहिए। चीनी कंपनियों को दिए गए ठेके तत्काल प्रभाव से निलंबित होने चाहिए। सरकार के इस प्रयास में समाजवादी पार्टी सरकार के साथ है।

– मोदी सरकार की प्रबल विरोधी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी चीन मामले पर सरकार के साथ खड़ी दिख रही हैं। सर्वदलीय बैठक में ममता बनर्जी ने कहा था कि टीएमसी संकट की इस घड़ी में देश के साथ खड़ी है। ममता ने कहा था, हमें साथ काम करना होगा, भारत जीत जाएगा, चीन हार जाएगा। उन्होंने साफ कहा था हम चीन मुद्दे पर सरकार के साथ हैं।

इन राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने दिया केंद्र सरकार का साथ
चीन के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरने की लाख कोशिशों के बावजूद कांग्रेस एक भी राजनैतिक दल को अपने साथ नहीं ला सकी। कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने सीधे मोदी सरकार को समर्थन दिया। आंध्र प्रदेश के सीएम जगन मोहन रेड्डी, तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव, मेघालय के मुख्यमंत्री के संगमा और सिक्किम के मुखयमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने बयान जारी कर केंद्र और पीएम मोदी का समर्थन किया।

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