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पेट्रोल-डीजल का पैसा गरीबों के खाते में जमा होता है: प्रधान

नई दिल्ली

पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढोतरी को जायज बताया है। उन्होंने कहा कि कोरोना संकट के दौरान पेट्रोल और डीजल से मिले टैक्स का पैसा स्वास्थ, रोजगार और लोगों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान किए जाने में खर्च हो रहा है। यह भाजपा की सरकार है, जो लोगों की मेहनत की कमाई को नगद लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के जरिए गरीबों के कल्याण में खर्च करती है, न कि कांग्रेस की तरह दामाद और राजीव गांधी फाउंडेशन के बैंक खातों में जमा कराया जाता है।

उल्लेखनीय है कि इस महीने 7 जून से तेल की कीमतों वृद्धि का सिलसिला शुरू हुआ, जिसके बाद 23 दिनों में 22 बार डीजल के दाम में वृद्धि हुई जबकि पेट्रोल की कीमत में 21 बार वृद्धि हुई है। देश की राजधानी दिल्ली में इस महीने अब तक डीजल के दाम में 11.14 रुपये लीटर इजाफा हुआ है जबकि पेट्रोल की कीमत 9.17 रुपये लीटर बढ़ गई है। कांग्रेस ने पेट्रोल और डीजल के दामों में बढ़ोतरी का कांग्रेस कड़ा विरोध कर रही है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी इस मुद्दे पर सरकार को आड़े हाथ लिया था।

कांग्रेस शासित राज्यों ने बढ़ाया वैट
सोनिया गांधी पर पलटवार करते हुए प्रधान ने कहा, ‘सोनिया गांधी कह रही हैं की केंद्र सरकार तिजोरी भर रही नवहै। लेकिन वह भूल गईं की कांग्रेस शासित राज्य राजस्थान, पंजाब, महाराष्ट्र, झारखण्ड और पडुचेरी ने भी पिछले तीन महीने में प्रजा के ऊपर बोझ डालते हुए तेल पर भारी भरकम वैट लगाया है। ऐसे में सोनिया गांधी को इस मुद्दे पर राजनीति करने के बजाय कांग्रेस शासित राज्यों से जमीनी हकीकत पता करनी चाहिए। उन्हें यह पता होना चाहिए कि केंद्र सरकार और राज्य सरकार ने पेट्रोल-डीजल से जो राजस्व जुटाया है, वह कोविड-19 से पैदा हुई वर्तमान और भावी चुनौतियों के समाधान में खर्च किया जा रहा है।’

गरीबों के खाते में जा रहा पैसा
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के जरिए 1 लाख 70 हज़ार करोड़ रुपये की योजना बनाई गई। गरीबों और किसानों के खाते में पैसा जमा कराया जा रहा। छह माह तक उन्हें राशन मुफ्त में दिया जा रहा है। जबकि तीन महिने तक गरीब परिवारों को फ्री में एलपीजी सिलेंडर दिए गए। क्या सोनिया गांधी और कांग्रेस को गरीब परिवारों के कल्याण में पैसा खर्च करना हज़म नहीं हो रहा है। ईपीएफ में पैसा देना क्या तिजोरी भरना है। मोदी जी की योजना में भरने में नहीं बल्कि बांटने पर आधारित है।

अपनी तिजोरी नहीं भर रही सरकार
उन्होंने कहा कि कांग्रेस आखिर कब समझेगी की बीस करोड़ लोगों को 65 हजार 454 करोड़ रुपया गरीबों के खाते में पहुंचाना तिजोरी भरना नहीं लोगों को सामाजिक व आर्थिक सुरक्षा देना है। सोनिया गांधी आज इसलिए ऐसा कह रही हैं क्योंकि उन्होंने पीढ़ियों से सत्ता का इस्तेमाल दामाद और राजीव गांधी फाउंडेशन के बैंक खातों में सरकारी योजनाओं की ‘डीबीटी’ करने में किया है। आपने पीढ़ियों से परिवार के स्वार्थ साधने के लिए जिस तरह देश की सेवा की है उसका नतीजा देश के सामने है। हमने बिना बिचौलियों के करोड़ों रुपया संकट के समय में गरीब परिवारों के अकाउंट में सीधा पहुंचाया है। लेकिन आपकी पार्टी और परिवार के संस्कार में गरीबों के कल्याण की राजनीति करना शामिल नहीं है।

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