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प्राइवेट ट्रेन में कंपनी तय करेंगी किराया, इस तरह होगी प्रॉफिट शेयरिंग

नई दिल्ली

साल 2023 तक 109 रूटों पर प्राइवेट ट्रेन चलाने की दिशा में रेलवे तेजी से कदम बढ़ा रहा है। एयरलाइन्स की तरह प्राइवेट ट्रेन में भी मर्जी की सीट, बैगेज और ऑन-बोर्ड सर्विस के लिए आपको एक्स्ट्रा पे करना होगा। इससे होने वाली कमाई ग्रॉस रेवेन्यू के तहत काउंट होगी और रेलवे के साथ ग्रॉस रेवेन्यू का बंटवारा होगा। नैशनल ट्रांसपोर्टर की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है।

रेवेन्यू शेयरिंग की जानकारी देनी होगी
प्राइवेट ट्रेन को लेकर रेलवे ने हाल ही में प्राइवेट कंपनियों से प्रपोजल (रिक्वेस्ट फॉर क्वॉलिफिकेशन यानी RFQ) मांगा था। नैशनल ट्रांसपोर्टर की रिपोर्ट के मुताबिक, प्राइवेट कंपनियों को फाइनैंशल कपैसिटी के हिसाब से अपने RFQ में रेवेन्यू शेयरिंग की जानकारी देनी होगी।

प्राइवेट कंपनियां तय करेंगी किराया
रेलवे ने यह प्राइवेट कंपनियों पर छोड़ा है कि वह ट्रेन का किराया तय करें। इसके अलावा रेवेन्यू जेनरेट करने के लिए वे अलग-अलग तरह के विकल्पों के बारे में विचार करने और फैसला करने में स्वतंत्र होंगे।
रिलायंस का एक और कीर्तिमान

ग्रॉस रेवेन्यू की परिभाषा तय की गई है
प्राइवेट ट्रेन चलाने को लेकर ग्रॉस रेवेन्यू की परिभाषा तय की गई है। परिभाषा के मुताबिक, पैसेंजर से वसूले जाने वाला कोई चार्ज, जिसमें टिकट पर प्रिंटेड अमाउंट, प्रेफर्स सीट के लिए चार्ज, बैगेज/लगेज के लिए चार्ज, कार्गो/पार्सल के लिए चार्ज शामिल होगा। इसके अलावा ऑन-बोर्ड सर्विस जैसे कैटरिंग, बेड चार्ज, कंटेट ऑन डिमांड चार्ज, वाई-फाई चार्ज, एडवर्टाइजिंग और ब्रैंडिंग से होने वाली कमाई भी ग्रॉस रेवेन्यू के दायरे में आएगा।

केवल 5 फीसदी होंगी प्राइवेट ट्रेनें
पिछले दिनों रेलवे बोर्ड के चेयरमैन वीके यादव ने कहा था कि सरकार ने केवल 5 फीसदी ट्रेनों के निजीकरण का फैसला किया है। यह पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत होगा। बाकी 95 फीसदी ट्रेनें रेलवे की तरफ से ही चलाई जाएंगी। भारतीय रेल अभी करीब 2,800 मेल या एक्सप्रेस रेलगाड़ियों का परिचालन करती है।

मेंटेनेंस का खर्च कम होगा
रेलवे बोर्ड के चेयरमैन ने कहा कि यात्री रेलगाड़ी परिचालन में निजी कंपनियों के उतरने से रेलगाड़ियों को तेज गति से चलाने और रेल डिब्बों की टेक्नॉलजी में नया बदलाव आएगा। उन्होंने कहा कि टेक्नॉलजी के बेहतर होने से रेलगाड़ी के जिन कोचों को अभी हर 4,000 किलोमीटर यात्रा के बाद मेंटेनेंस की जरूरत होती है तब यह सीमा करीब 40,000 किलोमीटर हो जाएगी। इससे उनका महीने में एक या दो बार ही रखरखाव करना होगा।

फाइनैंशल बिड 2021 अप्रैल तक संभव
सभी प्राइवेट ट्रेन 12 क्लस्टर में चलाई जाएंगी। ये क्लस्टर- बेंगलुरू, चंडीगढ़, जयपुर, दिल्ली, मुंबई, पटना, प्रयागराज, सिकंदराबाद, हावड़ा और चेन्नै होंगे। यादव ने कहा कि प्राइवेट ट्रेन के लिए फाइनैंशल बिड 2021 के अप्रैल तक पूरा हो जाना चाहिए। रिक्वेस्ट फॉर क्वॉलिफिकेशनन को सितंबर 2020 तक फाइनल कर लिया जाएगा।

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