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पता है कुटिल चीन की फितरत, पूरी रात ‘जागती’ रही वायुसेना

गलवान घाटी से चीन के सैनिकों के पीछे हटने के बाद भारत और ड्रैगन के बीच तनाव में कुछ नरमी तो देखने को मिल रही है लेकिन भारत इसबार पूरी तरह से सतर्क है। चीन अपनी बातों पर कभी भी कायम नहीं रहा है। गलवान घाटी में भारतीय सैनिकों पर धोखे से हमला से लेकर 1962 में पीठ में छुरा भोंकने तक उसकी धोखे की पुरानी आदत है। पीएम नरेंद्र मोदी कई मौके पर चीन को बिना नाम लिए चेता भी चुके हैं कि यह 1962 वाला भारत नहीं है। भारत ने लद्दाख घाटी में चीन को करारा जवाब देने के लिए सैनिकों की संख्या बढ़ा दी है। सैन्य साजो सामान से लेकर लड़ाकू विमान तक सीमा पर चीन को दहला रहे हैं।

झड़प वाली जगह से पीछे हटे चीनी सैनिक
भारत और चीन के बीच पिछले 3 महीने से जारी तनाव के सोमवार को चीन के सैनिक पेट्रोल पॉइंट 14 से 1.5-2 किलोमीटर पीछे हट गए हैं। इसके अलावा 15 जून को गलवान घाटी में हुए संघर्ष वाली जगह से भी ड्रैगन पीछे हटा है।

फिर धोखा न दे चीन, भारत की पूरी तैयारी
ड्रैगन के धोखे के इतिहास को देखते हुए इसबार भारत कोई चूक नहीं करना चाहता है। इसकी बानगी उत्तराखंड बॉर्डर पर दिखी। यहां चौकस भारतीय वायुसेना ने चीन और नेपाल सीमा के पास चॉपर से तीन बार उड़ान भरकर जायजा लिया। उत्तरकाशी के पास चिन्यालीसौड़ हवाई पट्टी का वायुसेना परीक्षण कर रही है। सोमवार को वायुसेना के हेलिकॉप्टर ने सीमा तक उड़ान भरी और हवाई पट्टी पर तीन बार टेक ऑफ और लैंडिंग की।

सीमा पर मिग 29 की दहाड़
सीमा पर वायुसेना कितनी चौकस है इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मिग 29 लड़ाकू विमान लगातर सरहद कि निगहबानी में जुटे हुए हैं और वह भी रात में। चीन की कुटिल चालों को ध्यान में रखते हुए थल से नभ तक उसपर कड़ी नजर रखी जा रही है।

अपाचे हेलिकाप्टर कर रहा है निगहबानी
लड़ाकू विमान से लेकर हेलिकॉप्टर तक रात में गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं। युद्धक हेलिकॉप्टर ने पूरी तैयारी के साथ फारवर्ड एयरबेस से भारत-चीन सीमा के ऊपर उड़ान भरी चीन की एक-एक हरकत पर बाज की तरह नजर रखी।

1962 में गलवान में चीन ने दिया था धोखा
1962 में भी गलवान एरिया खबरों में था, उस वक्त भी चीनी सैनिक गलवान एरिया में आ गए थे और अब भी गलवान खबरों में है। 1962 में 15 जुलाई को सभी समाचार पत्रों में गलवान को लेकर ही प्रमुख खबर थी। उस दिन की एक हेडलाइन थी- Chinese troops withdraw from Galwan post। लेकिन इस खबर के छपने के कुछ महीने बाद ही भारत-चीन के बीच 1962 का युद्ध शुरू हो गया।

वायुसेना की तैयारी, चीन को चेतावनी
भारतीय वायुसेना ने जिस तरह से रात में LAC पर निगरानी की है वह चीन को एक चेतावनी है कि अगर इसबार उसने कोई हिमाकत की तो उसे करारा जवाब मिलेगा। बता दें कि लद्दाख में भारत ने बड़ी संख्या में जवानों को तैनात कर रखा है। इसके अलावा चीन से लगती सीमा पर ITBP से लेकर सेना के जवान तक चौकस हैं।

रात में मिशन, जानें जवान ने क्या कहा
रात में ऑपरेशन चौंकाने वाला होता है। भारत-चीन सीमा पर तैनात ग्रुप कैप्टन ए राठी ने बताया कि रात में ऑपरेशन से किसी को भी चौंकाया जा सकता है। भारतीय वायुसेना किसी भी वातावरण में अपने आधुनिक प्लेटफार्म और जुझारू जवानों की मदद से किसी भी प्रकार की कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार है।

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