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शर्मनाक! एंबुलेंस ड्राइवर ने कोरोना मरीज को पार्किंग में छोड़ा, तोड़ा दम

भोपाल

कोरोना मरीज के साथ भोपाल में अमानवीय व्यवहार हुआ है। एंबुलेंस ड्राइवर ने कोरोना मरीज को अस्पताल की पार्किंग में छोड़ कर चला गया। जब तक अस्पताल के कर्मचारी वहां पहुंचते, उससे पहले ही मरीज की सांसें टूट गईं। घटना का सीसीटीवी वीडियो सामने आया है, जिसे देख आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे। मृतक भी बिजली कंपनी में कर्मचारी है।

मृतक के बेटे ने कहा है कि पिता का शरीर करीब 1 घंटे तक अस्पताल के बाहर पार्किंग में पड़ा रहा है। खुले में उनका शव पड़ा हुआ था। जानवरों के साथ भी ऐसा नहीं होता है। वहीं, मामला सामने आने के बाद भोपाल कलेक्टर अविनाश लवानिया ने जांच के आदेश दिया है। भोपाल के सीएमएचओ डॉ प्रभाकर तिवारी मामले की जांच करेंगे।

जांच में 2 दिन क्यों लगे
दरअसल, 59 वर्षीय वाजिद अली बिजली कंपनी में कर्मचारी हैं। 23 जून को किडनी में दिक्कत की वजह से उन्हें इलाज के लिए भोपाल के पीपुल्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 2 दिन पहले उनका सैंपल लिया गया था, सोमवार को रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई। सवाल यह भी है कि कोरोना मरीजों की रिपोर्ट जब 24 घंटे में आ रहे हैं, तो वाजिद अली की रिपोर्ट आने में 2 दिन क्यों लगे। साथ ही ऐसी परिस्थिति में उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज क्यों किया गया।

परिजनों ने बताया कि सोमवार को दोपहर 2 बजे उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। उसके बाद हम लोगों ने इलाज के लिए चिरायु अस्पताल को चुना। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि व्यक्ति की मौत कब और कहां हुई। लेकिन सीसीटीवी वीडियो में साफ दिख रहा है कि अस्पताल की पार्किंग में एंबुलेंस ड्राइवर मरीज को उतार रहा है। उनका शव पीपुल्स अस्पताल के बाहर सोमवार 7 बजे मिला है। इस बीच उनके परिवार को कोई जानकारी नहीं थी।

हमें घर जाने को कहा गया
बेटे ने बताया कि कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद हमें घर जाने के लिए कहा गया और एक एंबुलेंस पिता को इलाज के लिए ले गई। 3 घंटे बाद मैंने उनके शव को फुटपाथ पर पाया। मौके पर मौजूद एक पत्रकार ने पीड़ित परिवार को सूचित किया। तब तक सड़क पर शव मिलने से इलाके में दहशत फैल गई। मृतक मरीज का बेटा रात 8 बजे अस्पताल पहुंचा और वह बुरी तरह से घबरा गया। उसके बाद प्रशासन ने शव को मोर्चरी में रखवा दिया। बेटे ने कहा कि मुझे पता भी नहीं कि वे लोग शव कहां ले गए।

हमें जानकारी नहीं
वहीं, चिरायु मेडिकल कॉलेज के निदेशक डॉ अजय गोयनका ने कहा कि हमें मरीज की स्थिति और वेंटिलेटर से लैस एंबुलेंस के बारे में सूचित नहीं किया गया था। एंबुलेंस चालक को जब एहसास हुआ कि यह गंभीर मरीज है, तो वह पीपुल्स अस्पताल वापस लौट गया। हमने 20 मिनट के बाद वेंटिलेटर से लैस एंबुलेंस भेजी। पीपुल्स अस्पताल के लोगों ने सीपीआर देने की कोशिश की।

पार्किंग एरिया में छोड़ गया
वहीं, पीपुल्स अस्पताल के अधिकारी यूके दीक्षित इसके लिए चिरायु अस्पताल को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। उन्होंने कहा है कि हमारे यहां कोविड-19 का इलाज नहीं होता है। चिरायु की एंबुलेंस बीच अस्पताल से लौट आई। हो सकता है कि मरीज की जान रास्ते में चली गई हो। हमने एफआईआर करने को कहा है। हमारे पास वीडियो रिकॉर्डिंग है। वहीं, जहांगीराबाद एसएचओ ने कहा है कि हमारे पास कोई सूचना नहीं है, इसलिए कार्रवाई करने का सवाल कहां है।

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