Monday , August 3 2020
Home / अंतराष्ट्रीय / डीप स्पेस में मिलीं 4 रहस्यमय आकृतियां, भारत से है कनेक्शन

डीप स्पेस में मिलीं 4 रहस्यमय आकृतियां, भारत से है कनेक्शन

सिडनी

ऐस्ट्रोनॉमर्स की एक टीम ने डीप स्पेस में रेडियो वेव्स के बनीं चार रहस्यमयी गोल आकृतियों को डिटेक्ट किया है। इन्हें ऑस्ट्रेलियन स्क्वेयर किलोमीटर ऐरे पाथफाइंडर (ASKAP) ने EMU की मदद से डिटेक्ट किया है। इनमें से एक आकृति भारत के टेलिस्कोप डेटा से मिली है। ऐस्ट्रोनॉमर्स का कहना है कि ऐसा कुछ उन्होंने पहले कभी नहीं देखा है। ब्रह्मांड का मैप (Evolutionary Map of Universe, EMU) उन छिपे हुए कोनों की खोज करने के लिए बना है जहां कोई टेलिस्कोप नहीं पहुंच सका है। EMU से ऐसी रेडियो वेवलेंथ की स्टडी की जाएगी जिनसे पता चलेगा कि गैलेक्सी और ब्रह्मांड जैसा आज दिख रहा है, वैसा कैसे बना।

एक ऑब्जेक्ट भारत के डेटा में मिला
CSIRO ऐस्ट्रोनॉमी ऐंड स्पेस साइंस और वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी के लिए ऐस्ट्रोफिजिक्स में अप्लाइड डेटा साइंस के प्रफेसर रे नॉरिस ने अपने साथियों के साथ मिलकर EMU की स्टडी के दौरान इन ऑब्जेक्ट्स को स्टडी किया है। EMU में जुलाई-नवंबर 2019 के दौरान ASKAP का इस्तेमाल किया गया था। इन खोजे गए ऑब्जेक्ट्स में से तीन रेडियो टेलिस्कोप की मदद से देखे गए। इसके 36 डिश ऐन्टेना की मदद से रात के आसमान में ऐस्ट्रोनॉमर्स को ज्यादा बड़ा ऐंगल देखने को मिलता है। चौथा ऑब्जेक्ट भारत के Giant Metre Wave Radio Telescope के डेटा में मिला।

पहली बार दिखा ऐसा नजारा
इससे पहले ऐसा कुछ भी नहीं देखा गया है। रिंग के आकार के ये रेडियो ऑब्जेक्ट (ऑड रेडियो सर्कल, ORC) किनारे की ओर चमकीले थे। इनमें से दो के गैलेक्सी में होने के संकेत मिले हैं। माना जा रहा है कि गैलेक्सी की वजह से ही ये ऑब्जेक्ट पैदा हुए होंगे। प्रफेसर नॉरिस का कहना है कि रेडियोऐस्ट्रोनॉमी में यह अपने तरह के पहले ऑब्जेक्ट मिले हैं। वैज्ञानिक लंबे वक्त से इसकी खोज करते आए हैं कि ये ऑब्जेक्ट क्या होते हैं।

25 लाख की जगह 7 करोड़ स्रोत दिखेंगे
माना जा रहा है कि EMU की मदद से 7 करोड़ रेडियो स्रोतों को डिटेक्ट किया जा सकेगा जबकि पहले सिर्फ 25 लाख स्रोत डिटेक्ट किए जा सकते थे। ज्यादातर स्रोत लाखों प्रकाशवर्ष दूर स्थित गैलेक्सी से आते हैं। अंदाजा लगाया जा रहा है कि EMU की मदद से कम से कम आधी गैलेक्सी ऐसी होंगी जहां सितारे बनते होंगे जिससे वैज्ञानिकों को ब्रह्मांड कैसे बना, इसकी अलग-अलग स्टेज समझने में मदद मिलेगी। ऐस्ट्रोनॉमर्स इस बदलाव के साथ उनके बदलते बिहेवियर को स्टडी करेंगे। EMU की अंतरराष्ट्रीय टीम में 21 देशों के 300 ऐस्ट्रोनॉमर्स हैं।

Did you like this? Share it:

About editor

Check Also

कोराना: ‘रामबाण’ इलाज मुश्किल, भारत के लिए सामने है बड़ी लड़ाई

जेनेवा विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सोमवार को कहा है कि भले ही COVID-19 से बचने …

156 visitors online now
38 guests, 118 bots, 0 members
Max visitors today: 240 at 12:48 pm
This month: 242 at 08-01-2020 10:14 am
This year: 687 at 03-21-2020 02:57 pm
All time: 687 at 03-21-2020 02:57 pm