Tuesday , August 4 2020
Home / राष्ट्रीय / जब लोग टूट जाते हैं वो चट्टान बन गई: स्‍मृति ईरानी

जब लोग टूट जाते हैं वो चट्टान बन गई: स्‍मृति ईरानी

नई दिल्‍ली

केंद्रीय मंत्री स्‍मृति ईरानी ने लेफ्टिनेंट गौरी प्रसाद महादिक की सक्‍सेस स्‍टोरी साझा की है। गौरी शहीद मेजर प्रसाद गणेश की पत्‍नी है। मेजर गणेश 2017 में भारत-चीन बॉर्डर के पास उग्रवादियों के हमले में शहीद हुए थे। अपने पति की मौत के बाद महादिक ने कंपनी सेक्रेटरी की नौकरी छोड़ आर्मी जॉइन करने का फैसला किया। सर्विस सेलेक्‍शन बोर्ड (SSB) के एग्‍जाम में बैठीं। पहली कोशिश में कामयाब नहीं हुईं मगर अगले में सीधा टॉप कर गईं। ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी से ट्रेनिंग पूरी करने के बाद गौरी ने बतौर लेफ्टिनेंट मार्च 2020 में भारतीय सेना जॉइन की। 33 साल की गौरी अपने पति की याद में सेना में भर्ती हुई हैं। उनकी हिम्‍मत और देशभक्ति के जज्‍बे को केंद्रीय मंत्री स्‍मृति ईरानी ने नमन किया है।

‘भारतीय नारी की ताकत का सबूत’
केंद्रीय मंत्री लिखती हैं, “जहां ज्‍यादातर लोग टूट जाते हैं, इन्‍होंने सर्वाइव किया। मुझे बेहद गर्व होता है कि वह भारतीय नारी की ताकत को बतलाने हमारे बीच में हैं। अगर आप कभी इन्‍हें देखें तो इन्‍हें और इनके जैसी महिलाओं से कहें- हम आपकी सेवा और बलिदान के आभारी हैं।” ईरानी ने इसके साथ गौरी का एक पुराना वीडियो भी शेयर किया है जिसमें वह आर्मी जॉइन करने की वजह और मेजर गणेश के बारे में बात करती हैं।

‘पति की यूनिफॉर्म और स्‍टार्स पहनना टारगेट था’
शहीदों की विधवाओं के लिए आयोजित होने वाली विशेष SSB परीक्षा में टॉप रैंक हासिल करने वाली गौरी ने तब कहा था, ‘पति की शहादत के 10 दिनों के बाद मैं सोच रही थी कि अब क्या करूं। फिर मैंने प्रसाद के लिए कुछ करने को सोचा और सेना जॉइन करने को ही अपना लक्ष्य बना लिया।’ गौरी ने कहा था, ‘मैंने यह तय कर लिया था कि पति की ही यूनिफॉर्म और स्टार्स को पहनूंगी। यह अब हम दोनों का यूनिफॉर्म होगा। अब चेन्नै की ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकैडमी में ट्रेनिंग के बाद मैं अगले साल आर्मी में बतौर लेफ्टिनेंट जॉइन करुंगी। इसी जगह पर मेरे पति ने भी ट्रेनिंग ली थी और अब मैं भी उन्हीं की तरह से कड़ी ट्रेनिंग से गुजरने के लिए तैयार हूं।’

2017 में शहीद हुए पति, OTA में खास संयोग
मेजर प्रसाद महादिक और गौरी की शादी को दो साल हुए थे, जब वह शहीद हो गए। मेजर महादिक (31) भारतीय सेना की 7 बिहार रेजिमेंट में अधिकारी थे। भारत-चीन बॉर्डर के पास तवांग में उनकी पोस्टिंग थी, जहां 30 दिसंबर 2017 को उग्रवादियों की फायरिंग में वह शहीद हो गए थे। सुबह 6 बजे उनके बैरक पर गोलीबारी शुरू हो गई थी। गौरी के मुताबिक, ‘भोपाल और इलाहाबाद में एग्जाम के वक्त मुझे चेस्ट नंबर 28 दिया गया था, मेरे पति का भी यही नंबर था। इसके अलावा मेडिकल टेस्ट में मुझे 45 चेस्ट नंबर दिया गया था, जो कि मेरे पति के जन्म की तारीख 9 (4 5) है। वह मेरे लिए लकी हैं और हर पल मेरे साथ हैं।’

Did you like this? Share it:

About editor

Check Also

महानगरों में धीमी हुई कोरोना की रफ्तार, लेकिन प्रकोप बरकरार

चेन्नई, भारत में कोविड-19 का पहला केस सामने आए हुए छह महीने बीत चुके हैं. …

97 visitors online now
32 guests, 65 bots, 0 members
Max visitors today: 134 at 05:31 pm
This month: 242 at 08-01-2020 10:14 am
This year: 687 at 03-21-2020 02:57 pm
All time: 687 at 03-21-2020 02:57 pm