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इकॉनमी को बूस्ट देने सरकार लाएगी दूसरा राहत पैकेज?

नई दिल्ली

कोरोना महामारी के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था को काफी नुकसान पहुंचा है। तमाम एजेंसियों के मुताबिक GDP में 3-6 फीसदी की गिरावट निश्चित है। अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए पिछले दिनों सरकार ने 20 लाख करोड़ के आत्मनिर्भर राहत पैकेज की घोषणा की थी जो जीडीपी का करीब 10 फीसदी है। इस बीच IMF के एक अधिकारी ने कहा है कि भारत में कोविड-19 महामारी के कारण मौजूदा कठिन आर्थिक परिस्थिति को देखते हुए हुए खासकर वंचित परिवारों और SME (लघु एवं मझोले उद्यमों) को निकट भविष्य में और राजकोषीय मदद देने की गुंजाइश दिखाई देती है। बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकार राहत पैकेज की घोषणा करेगी?

SME को और मदद की गुंजाइश
IMF के राजकोषीय मामलों के विभाग के निदेशक विटोर गैसपर ने कहा कि मौजूदा सपोर्टिव मेजर (खासकर गरीब लोगों को खाद्यान्न उपलब्ध कराने की व्यवस्था) का सफल तरीके से क्रियान्वयन काफी महत्वपूर्ण है।उन्होंने कहा, ‘भारत में कोविड-19 महामारी के कारण अर्थव्यवस्था पर पड़े प्रतिकूल प्रभाव को देखते हुए हुए खासकर वंचित परिवारों और SME को निकट भविष्य में और राजकोषीय मदद देने की गुंजाइश है।’

अर्थव्यवस्था में संकुचन 4.5 फीसदी तक संभव
गैसपर ने कहा कि भारत पर कोविड-19 का आर्थिक प्रभाव काफी बड़ा और व्यापक है। उच्च आवृत्ति वाले संकेतक बताते हैं कि आर्थिक गतिविधियों में तीव्र गिरावट आयी है। यह औद्योगिक उत्पादन, व्यापार धारणा (परचेजिंग मैनेजर इंडेक्स), वाहनों की बिक्री और व्यपार से प्रतिबिंबित होता है। जून में जारी विश्व आर्थिक परिदृश्य रिपोर्ट के अनुसार 2020-21 में आर्थिक वृद्धि घटकर शून्य से नीचे – 4.5 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है।अप्रैल के विश्व आर्थिक परिदृश्य रिपोर्ट के मुकाबले जून की रिपोर्ट में वृद्धि में अधिक गिरावट का अनुमान का कारण भारत में लगातार कोविड-19 के बढ़ते मामले हैं।

राजकोषीय घाटा जीडीपी का 12 फीसदी तक पहुंच सकता है
उन्होंने कहा कि भारत सरकार का राजकोषीय घाटा 2020-21 में जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) का 12.1 प्रतिशत पहुंच जाने का अनुमान है। इसका मुख्य कारण कारण कर राजस्व में कमी के साथ बाजार मूल्य पर आधारित जीडीपी वृद्धि में गिरावट का प्रभाव है। साथ ही अन्य वृहत आर्थिक तत्वों को अधिक अनिश्चितता बने रहने की आशंका है। गैसपर ने कहा, ‘इन सब चीजों और आर्थिक गतिविधियों में गिरावट को देखते हुए चालू वित्त वर्ष में भारत का सार्वजनिक कर्ज जीडीपी अनुपात के रूप में करीब 84 प्रतिशत तक पहुंच जाने का अनुमान है।’

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