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भेल भोपाल कारखाने में कोरोना की आहट

भोपाल

भले ही प्रबंधन कारखाने में कोरोना के कुछ मामले होने की खबर की पुष्टि न करे लेकिन यह सच है कि अब कोरोना धीरे-धीरे कारखाने के कुछ जगहों पर आहट देने लगा है। इसके लिए सावधानी बरतना जरूरी माना जा रहा है। चर्चा है कि कुछ दिनों से टाउनशिप के पिपलानी और बरखेड़ा के कुछ आवासों में कोरोना पॉजिटीव आने के बाद अब कारखाने के गैस प्लांट, सीआईएम ब्लॉक, टीआरएम ब्लॉक , मोटर शॉप जैसे विभागों में कोरोना ने आहट देना शुरू कर दिया है। वहीं सीआईएसएफ के आवासीय क्षेत्र में एक कर्मी की एक परिजन कोरोना पॉजिटीव होने की खबर भी चर्चाओं में है। देर आये दुरूस्त आये की तर्ज पर प्रबंधन को ध्यान देना जरूरी हो गया है। यह संक्रमण फैला तो फिर फैला इधर कारखाने में उत्पादन भी जरूरी है।

दोस्त का प्रमोशन नहीं हुआ तो ठेकेदार भागा

भेल टाउनशिप के पिपलानी क्षेत्र का एक ठेकेदार महज इसलिए काम छोड़क र भाग गया कि उसके नगर प्रशासन विभाग में कार्यरत एक डिप्टी मैनेजर का प्रमोशन नहीं हुआ। यही नहीं एक सैनेट्री विभाग के साहब भी काम से मुंह मोडऩे लगे हैं। दरअसल ठेकेदार साहब तो पिपलानी क्षेत्र में सीवरेज का काम देखते रहे हैं और डिप्टी साहब से उनकी अच्छी खासी सेटिंग थी। जब कार्पोरेट ने डिप्टी मैनेजर से मैनेजर की प्रमोशन लिस्ट जारी की तो पिपलानी सिविल के डिप्टी साहब का नाम दूर-दूर तक नहीं था इनको चाहने वाले सभी को उम्मीद थी कि इनका प्रमोशन तो होगा ही क्योंकि इनकी एप्रोच अपने बड़े साहब के माध्यम से दिल्ली तक पहले से ही थी लेकिन यह एप्रोच भी काम नहीं आ सकी। अब इसका खामियाजा टाउनशिप में रहने वालों को भुगतना पड़ेगा। ठेकेदार तो भाग खड़ा हुआ अब नये ठेकेदार की तलाश जारी है। किस्मत अच्छी है कि बारिश न होने से सीवेज की कोई बड़ी समस्या खड़ी नहीं हो रही है।

प्रमोशन से नाराज शॉप फ्लोर के अधिकारी

इस बार कार्यपालक पद के प्रमोशन में मानव संसाधन विभाग के बल्ले-बल्ले रहे जबकि शॉप फ्लोर में काम करने वाले कार्यपालकों को कम ही प्रमोशन मिल पाये। इससे नाराज शॉप फ्लोर के कुछ अफसरों ने तो मानव संसाधन विभाग द्वारा जारी प्रमोशन सर्टीफिकेट लेने तक से इंकार कर दिया। यह नाराजी इतनी ज्यादा थी कि आखिरकार अपने सीनियरों से प्रमोशन सर्टीफिकेट बटवाने पड़े। चर्चा है कि प्रमोशन तो सही हुए लेकिन काम न करने वालों को कार्पोरेट ने नकार दिया। इनमें से शॉप फ्लोर के कुछ कार्यपालकों की सिफारिश भी कुछ ज्यादा ही दिखाई दे रही थी। क्या सही है क्या गलत यह तो दिल्ली कार्पोरेट ही ज्यादा जानता है लेकिन इस बार शॉप के महाप्रबंधकों की सिफारिश भी काम नहीं आई।

सीआईएम में सीवीसी गाईड लाईन का मजाक

एक और तो दिल्ली कार्पोरेट सालों से एक ही विभाग में काम कर रहे अफसरों को सीवीसी गाईड लाईन के मुताबिक विभागों में फेरबदल और इंटर यूनिट ट्रांसफर करने की बात कर रहा है तो दूसरी और भेल भोपाल कारखाने के सीआईएम विभाग में पदस्थ एक अपर महाप्रबंधक बरसों से जमें हैं। यह साहब एक क्वाइल मशीन के लिए यूएसए तक भेजे जा चुके हैं। इसी के चलते इनका ट्रांसफर भी रोका गया, वापस आने के बाद विभाग के लोगों को उम्मीद थी कि इनको दूसरे विभाग में भेजा जायेगा। मशीन भी चालू हो गई फिर भी साहब सीआईएम ही जमे हुए हैं। विभाग के कर्मियों को इनसे खासी नाराजगी देखी जा रही है। मजेदार बात तो यह है कि स्किल डेवलपमेंट से आये कर्मियों को भी अपनी मर्जी से काम पर ले रहे हैं जिसे चाहे ब्रेक दे देतेे है जिसे चाहे अंदर कर लेते हैं भगवान जाने क्या हो रहा है इस विभाग में। अब मुखिया की नजर पड़े तब जाकर सच सामने आयेगा। हां यह जरूर है कि सीआईएम के एजीएम ई-1 से लेकर इसी विभाग में नौकरी अदा फरमा रहे हैं।

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