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सिक्यॉरिटी के लिए खतरा कैसे हैं 61 साल की महबूबा मुफ्ती : चिदंबरम

श्रीनगर

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने महबूबा मुफ्ती की नजरबंदी बढ़ाए जाने की आलोचना की है। चिदंबरम ने पूछा है कि आखिर 61 साल की महबूबा मुफ्ती पब्लिक सिक्यॉरिटी के लिए खतरा कैसे हैं? आपको बता दें कि 5 अगस्त 2019 से ही महबूबा मुफ्ती नजरबंद हैं और अब उनकी नजरबंदी तीन और महीने के लिए बढ़ा दी गई है।

ट्विटर पर पी चिदंबरम ने लिखा, ‘मैं अनुच्छेद 370 को निरस्त करने को चुनौती देने वाले केस में सुप्रीम कोर्ट में पेश होने वाले वकीलों में एक मैं भी हूं। अगर मैं अनुच्छेद 370 के खिलाफ बोलूं- जैसा कि मुझे करना चाहिए, क्या यह सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा है? हमें सामूहिक रूप से अपनी आवाज़ बुलंद करनी चाहिए और ‘महबूबा मुफ़्ती को रिहा करें’ की मांग करनी चाहिए।’

चिदंबरम बोले- यह पीएसए का दुरुपयोग है
अगले ट्वीट में चिदंबरम लिखते हैं, ‘पीएसए के तहत महबूबा मुफ्ती की नजरबंदी का विस्तार कानून का दुरुपयोग है और नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों पर हमला है। 61 वर्षीय पूर्व मुख्यमंत्री, चौबीसों घंटे सुरक्षा गार्ड से संरक्षित व्यक्ति, सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा कैसे हैं?’ आपको बताते चलें कि 5 अगस्त 2019 से ही महबूबा मुफ्ती नजरबंद हैं।

दरअसल, पब्लिक सेफ्टी ऐक्ट के तहत शुक्रवार को महबूबा मुफ्ती की नजरबंदी को तीन महीने के लिए बढ़ाने का फैसला लिया गया है। 5 अगस्त 2019 को नजरबंद किए गए लगभग सभी नेताओं को अब रिहा किया जा चुका है लेकिन महबूबा मुफ्ती अभी भी नजरबंद हैं। पूर्व सीएम फारूक अब्दुल्ला को 15 मार्च और उमर अब्दुल्ला को 25 मार्च को रिहा किया गया था।

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