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साल 1993, दुबई में गुप्त मीटिंग, कराची में मिला माल, जब मुंबई को दहलाने रायगढ़ पहुंचा था ‘बिस्मिल्लाह’

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नई दिल्ली

1993 का मुंबई सीरियल ब्लास्ट से पूरा देश दहल उठा था। भारत की आर्थिक राजधानी और मायानगरी जैसे उपनामों से मशहूर मुंबई में 12 मार्च 1993 को सिर्फ दो घंटे के भीतर 12 बम धमाके हुए थे। इन धमाकों में 250 निर्देष लोग बेमौत मारे गए थे। स्वाभाविक है कि इसके लिए लंबे समय से साजिश रची गई और षडयंत्रकारियों की सारी रणनीति फिट बैठ गई। सफलता मिली तो सभी साजिशकर्ता अपने-अपने गुप्त ठिकानों पर दुबक गए। लेकिन वो कहते हैं ना- कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं। आप जहां जाएंगे, आज ना कल दबोच ही लिए जाएंगे। मुंबई सीरियल ब्लास्ट का एक साजिशकर्ता अब्दुल सत्तार बाटलीवाला भी दबोचा गया, लेकिन 23 साल बाद। गुजरात की आंतकरोधी स्क्वाड (ATS) को तीन साल पहले वर्ष 2019 में बाटलीवाला के ठिकाने की भनक लगी थी। सुराग हाथ लगा कि बाटलीवाला मुंबई के पॉश इलाकों में शुमार बांद्रा वेस्ट कॉलोनी में रह रहा है।

एटीएस ने बाटलीवाला को दबोचकर खोले षडयंत्र के तार
जितना बड़ा गुनाह, गुनाहगार उतना ही शातिर। आखिर सारा खेल दिमाग का है। मुंबई को दहलाने के बाद बाटलीवाला का सारा दिमाग लग गया अपनी पहचान छिपाए रखने पर ताकि जांच एजेंसियों तक उसका नाम भी नहीं पहुंच पाए। फिर उस पर संदेह का संभावना ही नहीं रहेगी। इसी तिकड़म में अब्दुल सत्तार बाटलीवाला बांद्रा वेस्ट कॉलोनी में उस जगह पर अपनी रिहाइश बनाई जहां अगल-बगल में बॉलिवुड और क्रिकेट स्टार रह रहे थे। हालांकि, रईशों की दुनिया में बना आशियाना भी उसे एटीएस की नजरों से छिपा नहीं पाया। गुजरात पुलिस के आतंकरोधी दस्ते ने बाटलीवाला को तब धर दबोचा जब वह खार इलाके से गुजर रहा था। वह अपनी गाड़ी में था, तभी एटीएसी के डीएसपी बीए चावड़ा की अगुवाई वाली टीम ने उसे पकड़ लिया।

गोसबारा कांड से जुड़ा था बाटलीवाला
बहरहाल, आप यह सोच रहे होंगे कि मामला मुंबई ब्लास्ट का है तो फिर गुजरात एटीएस का इससे क्या लेना-देना? इसका जवाब अब मिल जाएगा।दरअसल, एटीएस अधिकारियों ने तब दावा किया था कि बाटलीवाला का गोसबारा में हथियार और आरडीएक्स पहुंचाने में बड़ा हाथ था। इसी आरडीएक्स के इस्तेमाल से 1993 में मुंबई को एक बाद एक, लगातार 12 धमाकों से दहलाया गया था। गोसबारा, गुजरात के पोरबंदर की तरफ समुद्र तट पर बसा है। एटीएस के मुताबिक, बाटलीवाला 1985 से ही सोने-चांदी का तस्करी करता था। महाराष्ट्रे के नांदेड़ का रहने वाला बाटलीवाला पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के षडयंत्र का हिस्सा बन गया।

आईएसआई ने रची थी भारत को दहलाने की साजिश
आईएसआई भारतीय मुसलमानों को अयोध्या में बाबरी विध्वंस का बदला लेने को भड़का रहा था। मुंबई सीरियल ब्लास्ट से कुछ महीने पहले आईएसआई की मदद से सारी प्लानिंग की गई। बाटलीवाला तब तक दाऊद इब्राहिम गैंग के स्मलिंग सिंडिकेट का हिस्सा हो चुका था जिसमें मुस्तफा मजनू, मोहम्मद दोसा और टाइगर मेमन जैसे खूंखार अपराधियों का बोलबाला था। ध्यान रहे कि दाऊद इब्राहिम ने ही मुंबई सीरियल ब्लास्ट का मास्टरमाइंड है और अभी पाकिस्तान में छिपा है।

दुबई में सीक्रेट मीटिंग
एटीएस सूत्रों ने दावा किया था कि दुबई में सीक्रेट मीटिंग हुई थी। उसके बाद अल सदाबहार और बिस्मिल्लाह नाम के मछली पकड़ने वाले दो जहाज एके-47, एक-56, पिस्टल, ग्रिनेड समेत तरह-तरह के हथियार और गोला-बारूद के साथ पाकिस्तान के कराची बंदरगाह से गहरे समुद्र की तरफ बढ़ रहे थे। ये दोनों जहाज मोहम्मद दोसा के थे। कुछ दिनों बाद अल सदाबहार गुजरात के गोसबारा तट पर पहुंचा जबकि बिस्मिल्लाह महाराष्ट्र की तरफ बढ़ गया और रायगढ़ जिले के शेखाड़ी तट पर ठहर गया। रायगढ़ आज फिर से खबरों में है। वहां समुद्र से एक लावारिस बोट पकड़ा गया जिसमें तीन एक-47 और गोलियों से भरी कई पेटियां पाई गईं।

कराची से भारत पहुंचे विस्फोटकों से लदे जहाज
बहरहाल,बिस्मिल्लाह में भरे साजो-सामान मुंबई आ गए और 1993 के सीरियल ब्लास्ट को अंजाम दिया गया। उधर, अल सदाबहार से लाए गए हथियार और गोला-बारूद ट्रकों और कारों के जरिए मुंबई के वलसाड स्थित उमगग्राम लाया गया। फिर वहां से उसे पंजाब, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश भेजा गया। 1995 में मध्य प्रदेश के झरनिया में शोहराबुद्दीन शेख के फार्म से जो एके-56 राइफल्स मिले थे। सूत्रों का दावा है कि वो अल सदाबहार वाली खेप के ही थे।

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