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भारत को रूस से दूर जाने के लिए चाहिए लंबा वक्त… मोदी सरकार की नीतियों के आगे अमेरिका ने मानी हार

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वॉशिंगटन

भारत-रूस की दोस्ती को तोड़ने में असफल रहे अमेरिका ने आखिरकार अपनी हार मान ली है। अब अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि है कि भारत को रूस से दूरी बनाने के लिए लंबे समय की आवश्यकता होगी। अमेरिका शुरू से ही भारत पर रूस से संबंधों को कम करने का दबाव बनाता रहा है। खासकर यूक्रेन युद्ध के बाद अमेरिका ने भारत पर रूस का विरोध करने के लिए भारी दबाव डाला। लेकिन, भारत ने दशकों पुरानी दोस्ती का हवाला देते हुए अमेरिका के अनुरोध को खारिज कर दिया। इतना ही नहीं, जब अमेरिका सरीखे देशों ने रूस के खिलाफ प्रतिबंधों की बौछार की, तब भारत ने अपने पुराने दोस्त से सस्ते दाम में तेल खरीद उसकी आर्थिक मदद भी की है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र समेत सभी अंतरराष्ट्रीय फोरम में रूस की आलोचना करने से दूरी भी बनाकर रखी है।

भारत को रूस के खिलाफ जाने के लिए लंबा वक्त चाहिए: अमेरिका
अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता नेड प्राइस ने कहा कि अमेरिका दुनिया को किसी की हार और किसी की जीत के संदर्भ में नहीं देखता है। अमेरिका यह समझता है कि भारत जैसे देशों को रूस के प्रति अपनी नीतियों को फिर से उल्टा करने के लिए लंबे समय की आवश्यकता होगी। हम मानते हैं कि … दुनिया का हर देश अपने हितों और अपने मूल्यों के अपने आकलन के आधार पर अपने स्वयं के संप्रभु निर्णय लेने जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका यह भी यह स्पष्ट करना चाहता है कि हमारे साझा हित और हमारे साझा मूल्य अक्सर कैसे हमें जोड़ती है और इस साझेदारी से दुनियाभर के देश कैसे लाभ को प्राप्त कर सकते हैं।

रूस के खिलाफ विदेश नीति बदलना हल्का स्विच नहीं
प्राइस से सवाल पूछा गया कि भारत ने रूस पर अमेरिकी रुख का समर्थन करने से इनकार कर दिया था। क्या भारत के इनकार की व्याख्या वाशिंगटन के नीति निर्माताओं की विफलता के तौर पर की जा सकती है। इसके जवाब में नेड प्राइस ने कहा कि हमने दुनिया भर के देशों को यूक्रेन में रूस की आक्रामकता के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने वोट सहित स्पष्ट रूप से बोलते देखा है। लेकिन हम यह भी मानते हैं…कि यह एक हल्का स्विच नहीं है। यह कुछ ऐसा है जो विशेष रूप से उन देशों के लिए है जिनके रूस के साथ ऐतिहासिक संबंध हैं। जैसा कि भारत के मामले में है, दोनों के संबंध दशकों पुराना है, यह रूस से दूर विदेश नीति को रिडायरेक्ट करने के लिए एक दीर्घकालिक समय लेने जा रहा है।

अमेरिका में भारत विरोधी लॉबिंग तेज हुई
अमेरिका में भारत विरोधी लॉबी रूस के साथ मोदी सरकार के संबंधों को लेकर उग्र है। भारत ने यूक्रेन पर हमले के बाद रूस से भारी मात्रा में कच्चा तेल खरीदा है। इतना ही नहीं, भारत अब वोस्तोक 2020 अभ्यास में अपनी सैन्य टुकड़ी को भी रूस भेजने वाला है। इसी समय में भारत ने रूस से एस-400 की डिलीवरी भी प्राप्त की है। एके-203 रायफल के कुछ बैच को भी आधिकारिक रूप से भारतीय सेना में शामिल किया गया है। इन मुद्दों को भारत विरोधी लॉबी अमेरिका के खिलाफ प्रस्तुत करने पर तुली है।

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