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टी. राजा सिंह मामले में पुलिस से हुई ये चूक, इतनी जल्दी जमानत पर बवाल तेज

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नई दिल्ली,

बीजेपी से सस्पेंड विधायक टी. राजा सिंह को गिरफ्तारी के कुछ ही घंटों बाद जमानत पर रिहा कर दिया गया. राजा सिंह पर धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप है. उन्होंने एक वीडियो जारी किया था, जिसमें वो कथित तौर पर पैगंबर मोहम्मद पर टिप्पणी कर रहे थे. वीडियो सामने आने के बाद हैदराबाद के कई पुलिस थानों के बाहर उनकी गिरफ्तारी को लेकर प्रदर्शन हो रहे थे. पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार तो किया, लेकिन अदालत से उन्हें जमानत मिल गई.

पैगंबर मोहम्मद पर कथित टिप्पणी को लेकर उनके खिलाफ कई शिकायतें की गई थीं. इतना ही नहीं, दबीरपुरा, भवानी नगर, रेनबाजार, मीरचौक पुलिस थानों के बाहर भारी संख्या में लोग शिकायत करने पहुंचे थे. गुस्साए लोगों का कहना था कि उन्हें एक समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत किया है.

लोगों के गुस्से और विरोध प्रदर्शनों के चलते हैदराबाद पुलिस ने मंगलवार सुबह टी. राजा सिंह को गिरफ्तार कर लिया था. हालांकि, गिरफ्तारी के कुछ ही घंटों बाद उन्हें अदालत से जमानत भी मिल गई. राजा सिंह के वकील ने अदालत में दलील दी थी कि उन्हें गिरफ्तार करते समय पुलिस ने सीआरपीसी की धारा 41(A) का पालन नहीं किया था. अदालत ने उनकी इस दलील को मानते हुए राजा सिंह को जमानत दे दी थी.

राजा सिंह के वकील ने अदालत के बाहर मीडिया को बताया कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन है कि अगर किसी व्यक्ति को ऐसे अपराध में गिरफ्तार किया जाता है, जिसमें 7 साल से कम सजा का प्रावधान है, तो उसे गिरफ्तारी से पहले नोटिस जारी करना जरूरी है, लेकिन पुलिस ने इसका पालन नहीं किया. वेस्ट जोन के डीसीपी जोएल डेविस ने न्यूज एजेंसी को बताया कि मंगलहाट पुलिस थाने में राजा सिंह के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई थी, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया था.

क्या है धारा 41?
जब कोई अपराध होता है तो उसके मामले आईपीसी (इंडियन पीनल कोड) के तहत दर्ज होते हैं, लेकिन इसके आगे की प्रक्रिया को सीआरपीसी यानी कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसिजर के तहत आगे बढ़ाया जाता है. सीआरपीसी की धारा 41 में गिरफ्तारी की प्रक्रिया का जिक्र है.

धारा 41 में उन स्थितियों का जिक्र किया गया है, जिसमें पुलिस किसी व्यक्ति को बिना वारंट के गिरफ्तार कर सकती है. इसके मुताबिक, अगर किसी व्यक्ति ने पुलिस की मौजूदगी में कोई संज्ञेय अपराध किया हो तो उसे बिना वारंट के गिरफ्तार किया जा सकता है.

इसके अलावा, अगर पुलिस को इसकी सूचना है या शक है कि व्यक्ति सबूतों से छेड़छाड़ कर सकता है या उसने दंडनीय अपराध किया है (भले ही उसमें 7 साल से कम सजा हो) तो भी बिना वारंट के गिरफ्तारी हो सकती है. हालांकि, गिरफ्तारी करते समय पुलिस को कारण बताना जरूरी है.

इतना ही नहीं, अगर पुलिस को पक्की जानकारी है कि अपराधी ने ऐसा अपराध किया है, जिसमें 7 साल से ज्यादा की सजा या मौत की सजा हो सकती है या उसे सरकार ने अपराधी घोषित किया है या फिर वो भागने की कोशिश करता है, तो ऐसे लोगों को भी बिना वारंट के गिरफ्तार कर सकती है.

लेकिन राजा सिंह को जमानत कैसे मिली?
सीआरपीसी की धारा 41(A) कहती है कि अगर किसी व्यक्ति के खिलाफ शिकायत दर्ज होती है या सूचना दी जाती है तो भी पुलिस उसको बिना वारंट या नोटिस के गिरफ्तार नहीं कर सकती, जब तक उसने धारा 41 में दिए गए मामलों से इतर कोई अपराध किया हो.

धारा 41(A) के तहत, किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने से पहले पुलिस को उस व्यक्ति को नोटिस देना जरूरी है. इसके बाद उस व्यक्ति का ये कर्तव्य है कि वो पुलिस के सामने हाजिर हो. अगर नोटिस के बावजूद व्यक्ति पुलिस के सामने हाजिर नहीं होता है तो अदालत के आदेश पर व्यक्ति को गिरफ्तार किया जा सकता है.

राजा सिंह के मामले में यही हुआ. उनके वकील का दावा है कि उन्हें गिरफ्तार करने से पहले धारा 41(A) के तहत पुलिस ने नोटिस नहीं दिया था. अदालत ने उनकी इस दलील को मानते हुए जमानत पर रिहा कर दिया.

2010 में जोड़ी गई थी धारा 41(A)
सुप्रीम कोर्ट ने मनमानी गिरफ्तारी रोकने के लिए 7 साल से कम सजा वाले अपराधों में सीधी गिरफ्तारी नहीं करने का आदेश दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर किसी अपराध में 7 साल से कम सजा का प्रावधान है तो उस व्यक्ति को गिरफ्तार करने से पहले नोटिस देना जरूरी है. इसके बाद 2010 में सीआरपीसी की धारा 41 में संशोधन कर नई धारा 41(A) जोड़ी गई थी.

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