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भारतीय नंबरों से कॉल… पूर्व सैनिकों से जानकारी जुटाने में लगी पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी

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नई दिल्ली

पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ने भारतीय सेना की जानकारी जुटाने के लिए अब नया खेल शुरू किया है। सूत्रों के मुताबिक सेवारत सैनिकों के साथ अब पूर्व सैनिकों को टारगेट किया जा रहा है और उनसे उनकी आर्मी यूनिट से जुड़ी जानकारी लेने की कोशिश की जा रही है। भारतीय एजेंसियों ने पिछले एक साल में सामने आए केस की स्टडी की, जिससे ये सामने आया कि पाकिस्तानी एजेंसी अब भारतीय मोबाइल फोन नंबरों का इस्तेमाल कर और नौकरी का झांसा देकर जानकारी हासिल करने की कोशिश कर रही है।

हर टारगेट के लिए अलग-अलग थीम
सूत्रों के मुताबिक पिछले एक साल में जासूसी के जितने मामले सामने आए हैं, वह अब तक के सबसे ज्यादा हैं। टारगेट को पहले सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए स्पॉट किया जाता है, देखा जाता है कि वह किस तरह पोस्ट कर रहे हैं, उनकी पसंद नापंसद क्या है। फिर उसी तरह का अकाउंट बनाकर उनसे दोस्ती की जाती है। हर टारगेट को अलग अलग थीम से फंसाया जाता है। सोशल मीडिया में वे जो पर्सनल जानकारी शेयर करते हैं उससे उनके बारे में ज्यादा जानकर आईएसआई एजेंट उन्हें फंसाने की कोशिश करते हैं। एक बार फंस गए तो फिर उनसे मनचाहा काम करवाया जाता है।

अब भारतीय मोबाइल नंबर से फोन
सूत्रों के मुताबिक आईएसआई एजेंट पहले जानकारी हासिल करने के लिए ऐसे नंबर से कॉल करते थे जो देखकर समझ आ जाता था कि ये भारत के बाहर का नंबर है। अब इंडियन मोबाइल नंबर से कॉल किया जा रहा है। वे खुद को कोई सीनियर अधिकारी बता रहे हैं। खासकर सेना से रिटायर्ड जवानों को टारगेट किया जा रहा है। उन्हें नौकरी देने के बहाने पाकिस्तानी एजेंट उनका बायोडेटा, सर्विस प्रोफाइल, उनकी आर्मी यूनिट, यूनिट की लोकेशन की जानकारी मांगते हैं। टारगेट से उनकी यूनिट में मौजूदा सेवारत लोगों की जानकारी भी ली जाती है। वह अनजाने में यह जानकारी दे देते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि ये नौकरी के लिए जरूरी है।

सोशल मीडिया के जरिये टारगेट
सूत्रों का कहना है कि 90 पर्सेंट से ज्यादा मामलों में सोशल मीडिया के जरिए या फोन करके टारगेट किया जा रहा है। कुछ को हनी ट्रैप में फंसाया जाता है तो कुछ को नौकरी का झांसा देकर जानकारी ली जाती है। भारतीय सेना ने पिछले कुछ महीनों से सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर कड़ी पाबंदी लगाई है। लेकिन पूर्व सैनिक सोशल मीडिया में एक्टिव हैं और अब पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी उनका इस्तेमाल कर जानकारी हासिल करने की कोशिश कर रही है।

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