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भारत ने ‘दोस्‍त’ की खातिर पुतिन को दिया झटका, समुद्र में रूस-चीन के शक्ति प्रदर्शन से किया किनारा

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टोक्‍यो/मास्‍को/नई दिल्‍ली

यूक्रेन और ताइवान तनाव के बीच रूस और चीन कई अन्‍य देशों के साथ मिलकर जापान सागर में 1 से 7 सितंबर के बीच वोस्‍टोक 2022 नाम से नौसैनिक अभ्‍यास करने जा रहे हैं। इस व्‍यापक युद्धाभ्‍यास के लिए रूस ने भारत को भी आमंत्रित किया था लेकिन नई दिल्‍ली ने उससे किनारा कर लिया है। दरअसल, यह नौसैनिक अभ्‍यास जापान के पास होने जा रहा है जिसका इन दिनों रूस और चीन दोनों के साथ ही तनाव चल रहा है। बताया जा रहा है कि भारत ने अपने करीबी दोस्‍त जापान के साथ रिश्‍ते की संवेदनशीलता को देखते हुए इस नौसैनिक अभ्‍यास से किनारा किया है।

रूस और चीन की नौसेना के युद्धपोत सी ऑफ ओखोट्स्‍क और जापान सागर में वोस्‍टोक 2022 नाम से जोरदार युद्धाभ्‍यास शुरू करने जा रहे हैं। माना जा रहा है कि यह इस अभ्‍यास के जरिए रूस और चीन दोनों ही अमेरिका और जापान के साथ तनाव के बीच शक्ति प्रदर्शन करने जा रहे हैं। भारत ने इसी को देखते हुए खुद को युद्धाभ्‍यास से अलग किया है। इस अभ्‍यास का जापान ने व‍िरोध किया था। इससे पहले भारत ने यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद वोस्‍टोक 2022 बहुदेशीय सैन्‍य अभ्‍यास के लिए रूस के आमंत्रण को स्‍वीकार किया था।

रूस ने जापान के व‍िरोध किया खारिज, चीन संग करेगा शक्ति प्रदर्शन
हालांकि भारत की भागीदारी केवल रणनीतिक कमांड और स्‍टाफ ड्रिल तक सीमित रहेगी जिसमें रूस, चीन, सीरिया, ताजिकिस्‍तान, अजरबैजान, बेलारूस, कजाखस्‍तान, किर्गिस्‍तान और लाओस हिस्‍सा लेंगे। इस बीच जापान ने रूस के इस नौसैनिक अभ्‍यास का कड़ा व‍िरोध किया है जो उसकी उत्‍तरी सीमा के पास स्थित था। इस कुरिल द्वीप कहा जाता है जिस पर जापान और रूस दोनों ही दावा करते हैं। दक्षिणी कुरिल द्वीप समूह जापान के होक्‍कैदिओ और रूस के कामचाटका द्वीप समूह के बीच स्थित है। जापान ने रूस के साथ अपने व‍िरोध को दर्ज करा दिया है।

जापानी विरोध को दरकिनार करते हुए रूस अपने नौसैनिक अभ्‍यास को जारी रखने जा रहा है। रूस के रक्षा मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि रूस और चीन के युद्धपोत जापान सागर में एक साथ मिलकर अपनी ताकत का प्रदर्शन करेंगे और समुद्री इलाके की सुरक्षा करेंगे। भारत ने रूस के साथ संतुलन बनाते हुए सेना के युद्धाभ्‍यास में हिस्‍सा लेने का फैसला किया है, वहीं इसके नौसैनिक अभ्‍यास से साफ दूरी बना ली है। जापान भारत का घनिष्‍ठ सहयोगी है और क्‍वॉड का सदस्‍य देश है। जापान भारत में जमकर निवेश कर रहा है। भारत ने अमेरिका और पश्चिमी देशों के दबाव के बाद भी यूक्रेन युद्ध को लेकर रूस की आलोचना नहीं की थी। वहीं चीन और जापान के बीच ताइवान को लेकर तनाव काफी बढ़ा हुआ है। चीन की सीमा के पास जापान क्रूज मिसाइलों की तैनाती करने जा रहा है।

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