नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट में हिजाब बैन मामले पर सुनवाई चल रही है। जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस सुधांशु धूलिया की बेंच गुरुवार को भी दोनों पक्षों की दलीलें सुन रही है। कई याचिकाओं में कर्नाटक हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई है। SC इन सभी को क्लब करके सुनवाई कर रहा है। कर्नाटक सरकार ने सरकारी स्कूल-कॉलेजों में हिजाब पहनने पर रोक लगा दी थी। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में बैन को बरकरार रखा। सुप्रीम कोर्ट इस सवाल पर भी विचार कर रहा है कि क्या हिजाब इस्लाम का अभिन्न अंग है या नहीं। हिजाब मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से जुड़ी सभी अपडेट्स के लिए बने रहें नवभारत टाइम्स ऑनलाइन के साथ।
धर्मग्रंथों का हवाला देने से पहले वकील की चेतावनी
निजाम पाशा ने कहा कि इससे पहले कि मैं धर्मग्रंथ पढूं, मैं बता देना चाहता हूं बाबरी मस्जिद पर फैसले में 5 जजों की बेंच ने धर्मग्रंथों को पढ़ने में सावधानी बरतने को कहा था। पाशा इसके बाद अदालत के फैसले का एक हिस्सा पढ़ते हैं।
एक याचिकाकर्ता की ओर से वकील निजाम पाशा ने शिरूर मठ से जुड़े फैसले का हवाला दिया। इसके बाद दरगाह कमिटी के मामले में 5 जजों की बेंच के फैसले का संदर्भ रखा। जस्टिस धूलिया ने पूछा कि आप आखिर कौन सी दलील तैयार कर रहे हैं? पाशा ने जवाब दिया कि ‘यह सवाल किया कि क्या सभी धार्मिक प्रथाओं की सुरक्षा होती है या केवल जरूरी धार्मिक प्रथाओं की।’
कामत की दलीलें खत्म, अब निजाम पाशा की बारी
हिजाब केस में मुख्य याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ वकील देवदत्त कामत ने अपनी दलीलें खत्म कीं। जस्टिस गुप्ता और धूलिया आपस में बात कर रहे हैं। जस्टिस गुप्ता ने अगले वकील का नाम पूछा। वकील ने जवाब दिया, ‘निजाम पाशा’। पाशा ने कहा कि कामत हिंदू लॉ के स्टूडेंट हैं, मैं इस्लामिक लॉ का।
दलीलों के आखिरी चरण में वरिष्ठ वकील देवदत्त कामत ने कहा कि अब वह प्रशासनिक कानून पर तर्क देंगे, इस आधार पर भी जीओ सही नहीं है। कामत ने कहा, ‘मेरा सवाल है कि क्या जीओ में दिमाग नहीं लगाया गया और क्या हाई कोर्ट ने जीओ के लिए वजहें दी होंगी?’
‘हाई कोर्ट ने आत्मा को धर्म से अलग कर दिया…’
सुप्रीम कोर्ट में मुख्य याचिकाकर्ता की ओर से देवदत्त कामत ने कहा कि हाई कोर्ट ने आत्मा को धर्म से अलग करके खतरनाक क्षेत्र में प्रवेश किया है। संविधान सभा की बहसों का हवाला देते हुए कामत ने कहा कि घनश्याम उपाध्याय इकलौते सदस्य थे जिन्होंने आत्मा की बात की।
मुख्य याचिकाकर्ता की ओर से देवदत्त कामत ने कहा, हिजाब पहनने से किसके मूल अधिकार का हनन हो रहा है? इसपर जस्टिस गुप्ता ने कहा कि सवाल दूसरे के मूल अधिकारों के हनन का है ही नहीं, सवाल यह है कि क्या आपको वह मूल अधिकार है या नहीं।
सुप्रीम कोर्ट ने देवदत्त कामत को चेताया
पब्लिक ऑर्डर पर बहस कर रहे देवदत्त कामत को सुप्रीम कोर्ट ने चेताया। जस्टिस गुप्ता ने कहा कि पब्लिक ऑर्डर पर वक्त बर्बाद मत करिए। कामत ने कहा कि लेकिन जीओ में पब्लिक ऑर्डर का जिक्र है, मैं हवा में बात नहीं कर रहा हूं। जस्टिस धूलिया ने कहा कि आप जीओ पढ़िए और बताइए कि कोर्ट ने क्या फैसला दिया।
कामत ने किया ‘हेकलर्स वीटो’ का जिक्र
मुख्य याचिकाकर्ता की ओर से देवदत्त कामत ने ‘हेकलर्स वीटो’ के खिलाफ फैसलों का जिक्र किया। कामत 2019 में पश्चिम बंगाल में एक फिल्म के शैडो बैन के खिलाफ फैसले का भी संदर्भ दे रहे हैं।
देवदत्त कामत ने कहा कि ‘आपको आनंद मरगिस केस के बारे में पता होगा जहां तांडव नृत्य पर रोक लगा दी गई थी।’ जस्टिस गुप्ता ने कहा कि ‘आपके सड़क पर हिजाब पहनने से भले ही किसी को दिक्कत न हो, मगर आप स्कूल में हिजाब पहनते हैं तो सवाल उठता है कि स्कूला कैसा पब्लिक ऑर्डर मेंटेन करना चाहता है।’ इसपर कामत ने कहा कि स्कूल पब्लिक ऑर्डर का वह आधार नहीं ले सकते।
‘हर धार्मिक प्रथा जरूरी नहीं, पर राज्य रोक नहीं लगा सकता’
मुख्य याचिकाकर्ता के वकील देवदत्त कामत ने कहा कि स्कूलों में हिजाब पर रोक लगाते समय राज्य ने उसे जस्टिफाई नहीं किया है, ऐसे में यह आर्टिकल 25 के पहले हिस्से के अनुरूप नहीं है। जस्टिस धूलिया ने कहा कि यह तर्क तब लागू है जब आप इसे धार्मिक रिवाज कहें, कल आपने कहा था कि ऐसा नहीं है। कामत ने कहा कि यह आर्टिकल 19 और आर्टिकल 25 के तहत आता है। उन्होंने कहा कि हर धार्मिक प्रथा जरूरी नहीं हो सकती, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि राज्य उसपर रोक लगाता रहे।
ऑस्ट्रिया के फैसले का हवाला दे रहे कामत
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मुख्य याचिकाकर्ता की ओर से देवदत्त कामत दलीलें पेश कर रहे हैं। उन्होंने ऑस्ट्रिया के एक फैसले का हवाला दिया। फैसले के हवाले से कामत ने कहा, ‘मुस्लिम लड़कियों के हेडस्कार्फ पहनने पर बैन से छात्राओं के समावेश पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इससे मुस्लिम लड़कियों के लिए शिक्षा और दूभर हो जाएगी।’
हिजाब बैन: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू
जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस सुधांशु धूलिया की बेंच आज भी हिजाब मामले पर सुनवाई जारी रखे है। वरिष्ठ वकील देवदत्त कामत मुख्य याचिकाकर्ता का पक्ष रख रहे हैं। कामत ने दक्षिण अफ्रीका के संविधान में किए गए प्रावधान के बारे में बताया। कामत ने ऑस्ट्रिया में हेडस्कार्फ बैन करने के बारे में भी बताया जिसे असंवैधानिक करार दिया गया था।
बुधवार को सुनवाई के दौरान, जस्टिस गुप्ता ने मौखिक टिप्पणी में मुस्लिम छात्रा के वकील देवदत्त कामत से कहा था कि ‘आप इसे अतार्किक अंत तक नहीं ले जा सकते। कपड़े पहनने का अधिकार मौलिक है तो कपड़े उतारने का अधिकार भी मौलिक बन जाता है?’ इसपर कामत ने कहा कि ‘स्कूलों में कोई कपड़े नहीं उतार रहा है।’
