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कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया, रिहैब फाउंडेशन… PFI ही नहीं, इन संगठनों पर भी लगा बैन

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नई दिल्‍ली

भारत में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) और उससे जुड़े संगठनों को प्रतिबंधित किया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 27 सितंबर 2022 को इसकी अधिसूचना जारी की। PFI और उसके सहयोगियों या मोर्चों को तत्काल प्रभाव से 5 साल के लिए ‘गैरकानूनी संघ’ घोषित किया गया है। UAPA की धारा 3(1) के तहत मिली शक्तियों का इस्‍तेमाल करते हुए केंद्र ने PFI ही नहीं, कई अन्‍य संगठनों पर भी बैन लगाया है। इनमें ऑल इंडिया इमाम काउंसिल (AIIC), नैशनल कन्‍फेडरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेन (NCHRO), रिहैब फाउंडेशन इंडिया (RIF), नैशनल विमंस फ्रंट, जूनियर फ्रंट जैसी संस्‍थाएं शामिल हैं। ताजा फैसले में प्रतिबंधित किए गए संगठनों की सूची आप नीचे देख सकते हैं।

MHA की ओर से बैन किए गए संगठनों की सूची
पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI)
रिहैब इंडिया फाउंडेशन (RIF)
कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (CFI)
ऑल इंडिया इमाम काउंसिल (AICC)
नैानल कन्‍फेडरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन (NCHRO)
नैशनल विमंस फ्रंट
जूनियर फ्रंट
एम्‍पावर इंडिया फाउंडेशन
रिहैब फाउंडेशन, केरल

पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) क्या है?
PFI खुद को अल्पसंख्यकों, दलितों और हाशिए पर मौजूद दूसरे समुदायों के अधिकारों के लिए लड़ने वाला संगठन बताता है। साल 2007 में दक्षिण भारत के तीन मुस्लिम संगठनों के विलय से पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया का जन्म हुआ। ये संगठन थे-केरल का नैशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट, कर्नाटक फोरम फॉर डिग्निटी और तमिलनाडु का मनिता नीति पसारी। विलय का फैसला 2006 में केरल के कोझिकोड में एक मीटिंग के दौरान लिया गया था। स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) पर प्रतिबंध के बाद PFI उभरकर सामने आया। इसके कितने मेंबर हैं इसकी जानकारी नहीं है। पहले कोझिकोड में हेडक्वॉर्टर था, जिसे बाद में दिल्ली शिफ्ट कर दिया गया। ओएमए सलाम इसके अध्यक्ष हैं।

PFI पर कब-कब लगे आरोप?
उत्तर प्रदेश में जांच एजेंसियों ने आरोप लगाया था कि संगठन ने हाथरस में जातीय हिंसा फैलाने की साजिश रची। साल 2020 में नागरिकता कानून के विरोध में हुई हिंसा में इस संगठन का नाम आया था। बेंगलुरू में हुई सांप्रदायिक हिंसा में भी PFI के सहयोगी संगठनों का नाम आया। कर्नाटक में हिजाब आंदोलन में भी PFI का हाथ बताया गया था। धर्म छुपाकर शादी करने के मामले में PFI पर आरोप लगे थे। कुछ साल पहले एनआईए ने भी PFI के खिलाफ रिपोर्ट दी थी। इसमें कहा गया था कि कम समय में जिस तेजी से संगठन का विस्तार हुआ, वह चिंता की बात है। रिपोर्ट के बाद गृह मंत्रालय ने संगठन पर निगरानी बढ़ा दी थी।

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