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FATF की ग्रे लिस्ट से 4 साल बाद बाहर निकला पाकिस्तान, क्या धुल जाएंगे आतंकवाद के दाग?

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इस्लामाबाद

पाकिस्तान चार साल बाद फाइनेंशिएयल एक्शन टॉस्क फोर्स की ग्रे लिस्ट से बाहर हुआ है। एफएटीएफ ने पेरिस में आयोजित दो दिवसीय समीक्षा बैठक के बाद इस फैसले का ऐलान किया है। पाकिस्तान ने इसे अपनी जीत के तौर पर प्रदर्शित किया और कहा है कि वह आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति जारी रखेगा। हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि आतंकवाद पाकिस्तान की स्टेट पॉलिसी का हिस्सा है। ऐसे में इतनी आसानी से इस पॉलिसी को बदलना आसान नहीं होगा। पिछली बार की बैठक में एफएटीएफ ने कहा था कि वह पाकिस्तान का दौरा कर वास्तविक स्थिति का जायजा लेने के बाद ही कोई फैसला करेगा। जिसके बाद सितंबर में एफएटीएफ की एक टीम पाकिस्तान पहुंची थी। इस दौरे के बाद पाकिस्तानी विदेश कार्यालय ने दावा किया था कि एफएटीएफ ने इस दौरे को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं। FATF ने म्यांमार को ब्लैकलिस्ट में डालने का काम कर दिया है.

FATF के इस फैसले पर पाकिस्तान ने भी खुशी जाहिर की है. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की तरफ से जोर देकर कहा गया है कि पाकिस्तान द्वारा किए गए तमाम प्रयासों पर मुहर लगा दी गई है. उनकी तरफ से सेना को भी बधाई दी गई है, कहा गया है कि उनकी मेहनत भी रंग लाई है.

2018 में ग्रे लिस्ट में शामिल हुआ था पाक
पाकिस्तान को 2018 में आतंकवाद को धन मुहैया करवाने के आरोप में ग्रे लिस्ट में शामिल किया था। एफएटीएफ ने मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण से निपटने में कानूनी, वित्तीय, नियामक, जांच, अभियोजन, न्यायिक और गैर-सरकारी क्षेत्र की कमियों के चलते पाकिस्तान को निगरानी सूची में डाला था। इसके बाद एफएटीएफ ने पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट से बाहर निकलने के लिए व्यापर सुधार कार्यक्रम की एक लिस्ट सौंपी थी। पाकिस्ता का दावा है कि उसने लिस्ट में दिए गए सभी शर्तों को पूरा कर लिया है। पिछली बैठक के बाद पाकिस्तान ने जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) प्रमुख मसूद अजहर, लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के संस्थापक हाफिज सईद और जकीउर रहमान लखवी समेत संयुक्त राष्ट्र में नामित आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई करने का दावा किया है। पाकिस्तान के दावे के अनुसार, ये सभी आतंकवादी अब जेल में कैद हैं।

पाकिस्तान पर क्या होगा असर
विशेषज्ञों का दावा है कि पाकिस्तान के ग्रे लिस्ट से बाहर निकलने पर पहले से ही मुश्किलों से जूझ रही अर्थव्यवस्था पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। हालांकि, इससे पाकिस्तान से जुड़े वैश्विक लेनदेन की जांच कम करने में मदद मिल सकती है। पाकिस्तान से होने वाला हर बड़ा लेनदेन दुनियाभर की खुफिया एजेंसियों के निगाह पर रहता है। अब ऐसे लेनदेन की जांच में थोड़ी कमी आ सकती है। पाकिस्तान के दो बैंक एचबीएल और नेशनल बैंक ऑफ पाकिस्तान कंप्लायंस फेल्योर्स और एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग नियमों के उल्लंघन में पहले ही करोड़ों रुपये का जुर्माना भर चुक हैं। ऐसे में इन बैंकों को भी बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट से बाहर निकलने से पाकिस्तान में विदेशी निवेश के रास्ते भी खुलेंगे।

क्या है FATF?
जानकारी के लिए बता दें कि FATF (Financial Action Task Force) एक ऐसा अंतरराष्ट्रीय संस्था है. यह अंतरराष्ट्रीय वित्तीय अपराध को रोकने की कोशिश करता है, जो कि आतंकवाद को बढ़ाने के लिए किए जाते हैं. पाकिस्तान पर आरोप लगे थे कि वहां मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवादियों को आर्थिक मदद पहुंचाने का काम हो रहा है. इस आरोप के बाद पाकिस्तान को 2018 में ग्रे लिस्ट में डाल दिया गया था. लेकिन अब कुछ रिपोर्ट्स के आधार पर FATF ने पाकिस्तान को राहत देने का काम कर दिया है. भारत की तरफ से इसका विरोध जरूर किया गया, लेकिन FATF ने उसे नजरअंदाज कर दिया.

ग्रे लिस्ट में होने से क्या होता है?
यहां ये समझना भी जरूरी है कि FATF जिस देश को ग्रे लिस्ट में डालता है, उसकी निगरानी बढ़ जाती है. पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डालने से उसके लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैंक, एशियाई विकास बैंक और यूरोपीय संघ से वित्तीय सहायता प्राप्त करना मुश्किल हो गया था. लेकिन अब इन्हीं सब पहलुओं पर पाकिस्तान को राहत मिलने वाली है. वैसे भी उसकी जिस तरह की आर्थिक स्थिति चल रही है, उसे देखते हुए ये फैसला जमीन पर काफी कुछ बदल सकता है.

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