लंदन
बीते 6 साल में ब्रिटेन को पांचवां प्रधानमंत्री मिला है। लिज ट्रस के मात्र 44 दिन के कार्यकाल के बाद ऋषि सुनक प्रधानमंत्री बने हैं। वहीं बीते दो महीनों के अंदर ही वह डाउनिंग स्ट्रीट पहुंचने वाले तीसरे प्रधानमंत्री हैं। हालांकि ब्रिटेन में सत्ता को लेकर इतनी अस्थिरता शायद पहले कभी नहीं थी। इससे पहले 1834 में ऐसा हुआ था कि एक साल के अंदर दो प्रधानमंत्री बने थे। साल 2007 में गोर्डन ब्राउन के प्रधानमंत्री बनने से पहले लगभग तीन दशकों में ब्रिटेन में केवल तीन ही प्रधानमंत्री हुए। इस हिसाब से अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रधानमंत्रियों ने कितनी लंबी सियासी पारी खेली होगी।
ब्राउन लेबर पार्टी से थे। इसके बाद 2010 में डेविड कैमरन कंजरवेटिव पार्टी से प्रधानमंत्री बने। वह 6 साल तक इस पद पर रहे। उनकी विदाई के साथ ही ब्रिटेन में इस कुर्सी के लिए म्यूजिकल चेयर्स का खेल शुरू हो गया। 19वीं शताब्दी में ब्रिटेन दुनिया के सबसे धनी देशों में से एक था और अर्थव्यवस्था पर जबरदस्त पकड़ थी। दुनिया के ज्यादातर देशों में ब्रिटेन का औपनिवेशिक शासन था। हालांकि दूसरे विश्वयुद्ध के बाद यूरोप के देशों को लगने लगा कि आत्मरक्षा के लिए उनका आपस में जुड़ना बहुत जरूरी है। इसके बाद यूरोपीय यूनियन बनाया गया। इसके पीछे विचार था कि इन देशों के बीच में बिना किसी रोकटोक के व्यापार चलेगा।
इसके काफी दिनों के बाद मार्गरेट थैचर के कार्यकाल में यूके ने फ्रांस और जर्मनी के साथ 1973 में साझेदारी कर ली। इसके बाद 1975 में इस संगठन को लेकर जनमत संग्रह कराया गया। देखा गया कि फ्रांस और जर्मनी इस समजौते की वजह से तेजी से विकास कर रहे हैं लेकिन यूके वहीं का वहीं है। 1990 में जब जॉन मेजर प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने यूके-ईयू के बीच संबंध मजबूत करने शुरू किए। हालांकि उनकी कंजरवेटिव पार्टी में इस बात को लेकर मतभेद था। इसके बाद टोनी ब्लेयर और ब्राउन के कार्यकाल में भी यूके और ईयू के बीच संबंध मजबूत हुए।
2008 में यूके और ईयू को लेकर फिर से बहस छिड़ गई। ऐसा लगने लगा कि इस संबंध की वजह से ही यूके की अर्थव्यवस्था बढ़ नहीं पा रही है। इसी दौरान अरब और अफ्रीकी देशों से बड़ी संख्या में लोग यूके और यूरोप के अन्य हिस्सों में आकर बसने लगे। यूके में इस समय अस्थिरता का दौर शुरू हो गया। 2016 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने ब्रेग्जिट को लेकर जनमत संग्रह करवाया। वह ईयू के साथ बने रहना चाहते थे लेकिन जनमत संग्रह का परिणाम उल्टा आया। इसके बाद कैमरन ने इस्तीफा दे दिया।
इसके बाद ब्रेग्जिट (यूके का ईयू से अलग होना) की जिम्मेदारी थेरेसा मे पर आ गई। 2020 में यूके ईयू से अलग हो गया। ब्रेग्जिट की वजह से बाजार ढहने लगा। मुद्रा अस्थिर हो गई। इसके बाद बोरिस जॉनसन प्रधानमंत्री बने। अभी यूके ब्रेग्जिट के तूफान को संभाल नहीं पा रहा था कि कोविड आ गया। अर्थव्यवस्था को और तगड़ा झटका लगा। सरकार को पेंशन और अस्पतालों के बिल चुकाने के लिए भी कर्ज लेना पड़ रहा था। कई मोर्चों पर जब बोरिस जॉनसन विफल हो गए और पार्टी में उनका विरोध शुरू हो गया तो उन्होंने भी इस्तीफा दे दिया।
इस बीच यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध छिड़ चुका था। ब्रिटेन में खाद्यान्न का संकट भी गहरा गया। लिज ट्रस ने बड़े स्तर पर टैक्स कट का ऐलान कर दिया जिससे 44 दिन के अंदर ही बुरे असर नजर आने लगे। उनके इस्तीफे के बाद ऋषि सुनक ने प्रधानमंत्री पद संभाला है। अब देखना है कि उनका कार्यकाल कितना लंबा होगा और वह कैसे ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लगाएंगे।
