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बॉर्डर पर तैयारी, पाकिस्तानी साठगांठ, समंदर में हरकत… गलवान के बाद अब क्या चाहता है चीन?

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नई दिल्ली

क्या गलवान की घटना चीन की सोची-समझी साजिश थी? क्या बॉर्डर के उस पार चीन किसी बड़े प्लान पर काम कर रहा है? अमेरिकी रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट सामने आने के बाद भारत में इस तरह की आशंकाएं पैदा हो रही हैं। चीन की मिलिट्री पावर पर पेंटागन की रिपोर्ट में स्पष्ट बताया गया है कि लद्दाख में विवादित बॉर्डर के पास चीन तेजी से इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित कर रहा है। इतना ही नहीं, वह पाकिस्तान जैसे मित्र देशों में सेना की मौजूदगी बढ़ाने पर भी काम कर रहा है। उसने अपने परमाणु हथियारों के जखीरे को भी बढ़ाना शुरू कर दिया है। अमेरिका का दावा है कि चीन के पास अभी करीब 400 एटमी हथियार हैं लेकिन जिस तरह से वह प्रोग्राम चला रहा है, उससे लगता है कि साल 2035 तक उसके पास करीब 1,500 आयुध भंडार हो जाएगा। रिपोर्ट भले ही हजारों किमी दूर से आई है लेकिन भारत इसे नजरअंदाज नहीं कर सकता है। करीब डेढ़ दर्जन बार कमांडर लेवल की बातचीत के बाद भी चीन का अड़ियल रवैया टेंशन दे रहा है।

मिसाइल, बॉम्बर और पनडुब्बी
अमेरिकी रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन ने एक बड़ा डिफेंस इंडस्ट्री कॉम्प्लेक्स तैयार किया है। वह अपने देश में बने फाइटर जेट के इंजनों पर भरोसा कर रहा है। वह सूक्ष्मता एवं सटीकता के साथ युद्ध के लिए अगली पीढ़ी की क्षमता विकसित कर रहा है। परमाणु हथियार के मोर्चे पर पेंटागन ने अमेरिकी संसद को सौंपी अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा है कि अगले दशक तक बीजिंग का उद्देश्य अपनी परमाणु ताकतों का आधुनिकीकरण कर उसमें विविधता लाना और विस्तार करना है। यह पहले से कहीं बड़े स्तर पर हो रहा है। अमेरिका ने बताया है कि कैसे चीन परमाणु हथियारों के लिहाज से लंबी दूरी की मिसाइलें, सामरिक बॉम्बर्स और पनडुब्बियों को बढ़ा रहा है। वैसे, परमाणु हथियारों में रूस के बाद अमेरिका का नंबर आता है। उसके पास 3,750 सक्रिय परमाणु हथियार हैं।

रिपोर्ट में LAC के बारे में क्या-क्या
1. अमेरिका की सालाना रिपोर्ट में भारत-चीन सीमा पर तनाव का विशेष रूप से जिक्र किया गया है। पेंटागन ने कहा है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीनी सैनिकों की तैनाती आगे जारी रह सकती है क्योंकि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी लगातार इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत कर रही है।

2. पेंटागन का मानना है कि अमेरिका और भारत के बढ़ते संबंधों में चीन अड़ंगा लगाने की मंशा रखता है।

3. रिपोर्ट में कहा गया, ‘LAC पर भारत के साथ टकराव के बीच चीनी अधिकारियों ने संकट की गंभीरता को कमतर दिखाने की कोशिश की है। इस बात पर जोर दिया है कि चीन की मंशा सीमा पर स्थिरता कायम करने और भारत के साथ उसके द्विपक्षीय संबंधों के दूसरे क्षेत्रों को गतिरोध से होने वाले नुकसान से बचाने की है।’

4. चीन ने अमेरिकी अधिकारियों को चेतावनी भी दी है कि वे भारत के साथ उसके संबंधों में दखल न दें।

अमेरिका कैसे कर रहा भारत की मदद?
दरअसल, 2020 में गलवान में खूनी संघर्ष के बाद भारत और अमेरिका ने बॉर्डर पर चीनी सैनिकों की मूवमेंट पर निगरानी के लिए मिलकर काम किया है। मोर्चे पर बर्फीले इलाकों में तैनात भारतीय सैनिकों के लिए अमेरिका ने विशेष कपड़े उपलब्ध कराए हैं। इसके अलावा वह सैटेलाइट तस्वीरों और खुफिया इनपुट देकर मदद कर रहा है। अमेरिका से लिए गए ड्रोन को भी भारत ने लद्दाख के पास चीनी सैनिकों की मूवमेंट की निगरानी के लिए तैनात किया है।

चीन और पाकिस्तान की साठगांठ
अमेरिकी रिपोर्ट में पाकिस्तान का भी जिक्र है। कहा गया है कि चीन सशस्त्र ड्रोन समेत कई आधुनिक हथियारों को पाकिस्तान को दे रहा है। उसने पाकिस्तान को नई जेनरेशन की सबमरीन देने के लिए भी एक डील की है। PLA की स्ट्रैटिजिक सपोर्ट फोर्स फसिलिटी भी पाकिस्तान में मौजूद है। पेंटागन का कहना है कि चीन पाकिस्तान में एक और दुनिया के कई देशों में बेस बनाने की दिशा में काम कर रहा है।

जिबूती में चीन का बेस
रिपोर्ट के मुताबिक जिबूती में पीएलए के सपोर्ट बेस के अलावा चीन कई और सैन्य लॉजिस्टिक्स फसिलिटी तैयार करने पर सोच रहा है जिससे थलसेना, जलसेना और वायुसेना के लिए सप्लाई की जा सके। पाकिस्तान, श्रीलंका और म्यांमार में वह बेस बना सकता है। अमेरिका का दावा है कि चीन जिबूती में विमान वाहक पोत, युद्धपोत, पनडुब्बियों को तैनात कर सकता है।

पैंगोंग इलाके में हिंसक झड़प के बाद पांच मई 2020 को पूर्वी लद्दाख सीमा पर गतिरोध शुरू हुआ था। अमेरिका का कहना है कि दोनों देश एक-दूसरे के सैन्य बलों की वापसी की मांग कर रहे हैं और गतिरोध से पहले की स्थिति में लौटना चाहते हैं, लेकिन न तो चीन और न ही भारत उन शर्तों पर सहमत हैं, जिसके कारण टकराव जैसी स्थिति बनी हुई है।

इधर खुफिया जहाज हिंद महासागर में घुसा
हाल में खबर आई कि पिछले कुछ महीनों में दूसरी बार चीन का एक खुफिया जहाज हिंद महासागर में दाखिल हुआ है। इस पर नौसना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि भारतीय नौसेना हिंद महासागर की लगातार निगरानी करती रहती है, जहां चीन की घुसपैठ असामान्य नहीं है। अपने सामरिक क्षेत्र में फोर्स देश के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। दक्षिणी नेवल कमांड के चीफ वाइस एडमिरल एम ए हंपीहोली ने कहा है कि हम हिंद महासागर में सैटलाइट और एयरक्राफ्ट से निगरानी करते रहते हैं।

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