नई दिल्ली
बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर ने रामचरितमानस का अपमान करते हुए एक बयान दिया। उस विषय पर हुई एक टीवी डिबेट के दौरान एंकर रुबिका लियाक़त रामचरितमानस लेकर बैठीं थी। जहां उनकी क़ुरान और रामचरितमानस को लेकर आरजेडी नेत्री इज्या यादव से बहस हुई। इसी डिबेट को लेकर Millat Times डिजिटल चैनल के पत्रकार शम्स तबरेज ने सवाल उठाया। उन्होंने रुबिका लियाक़त पर क़ुरान का अपमान का आरोप लगाया। जिस पर एंकर ने पलटवार किया।
पत्रकार शम्स तबरेज ने कही यह बात
पत्रकार शम्स तबरेज ने अपने एक शो में एंकर रुबिका लियाक़त की टीवी डिबेट का वीडियो दिखाते हुए कहा कि रामचरितमानस का बचाव करने के लिए क़ुरान का अपमान क्यों? इसके साथ उन्होंने टीवी डिबेट का वीडियो शेयर कर लिखा,”रामचरितमानस पर होने वाले एतराज से बचने के लिए एंकर रुबिका लियाक़त ने अपने डिबेट में कुरान का सहारा ले लिया जबकि रामचरितमानस और कुरान दोनों में कोई जोड़ नहीं है, इस जैसी किताब हमारे यहां गुलिस्ता और बोस्ता है।”
एंकर रुबिका लियाक़त ने यूं किया पलटवार
एंकर रुबिका लियाक़त ने डिबेट का एक दूसरा हिस्सा शेयर किया। जिसमें उन्होंने कहा है कि क़ुरान पर भी बहस होगी तो वह यही कहेंगी कि धर्मिक किताबों पर इस तरह की चर्चा और बहस नहीं होनी चाहिए। उन्होंने वीडियो के साथ भड़कते हुए लिखा,”तुम लोगों का एजेंडा है किसी और की आस्था का भी सम्मान करे तो इस्लाम विरोधी साबित कर दो। डिबेट का एक अंश लेकर झूठ फैलाओ और नफ़रत बांटों। उसी डिबेट का ये हिस्सा भेज रही हूं, कान खोलकर सुन लेना। इस देश में हर मज़हब, हर ग्रंथ का एक सरीखा सम्मान होगा..चाहे क़ुरान हो या रामायण। याद रहे।”
लोगों के रिएक्शन
इन दोनों पत्रकारों द्वारा किये गए पोस्ट पर आम सोशल मीडिया यूज़र्स ने भी तरह- तरह के कमेंट्स किये हैं। कुछ लोगों ने एंकर रुबिका लियाक़त पर सवाल खड़े किये हैं तो वहीं कुछ लोगों ने शम्स तबरेज पर तंज कसा है। @IliasLaskar नाम के एक ट्विटर हैंडल से लिखा गया,”जब नफ़रत फैलाना ही किसी का काम हो जाये तो कुछ नहीं कहा जा सकता है, क़ुरान पर बोलने वालों को सजा मिलनी चाहिए।” @Kabir_Khan_888 नाम के एक यूजर ने कमेंट किया – मैडम, रामचरितमास पर बात करने के बाजय क़ुरान का जिक्र क्यों कर रही हैं? इसे तो ही इनका काम चलना है।
@manishsoni नाम के एक ट्विटर यूजर ने लिखा,”रुबिका जी आप ने धो डाला… सीधी भाषा इनको समझ नही आती।” @VipinTi5 नाम के एक यूजर ने कमेंट किया- यही तो तस्लीम रहमानी एवं नूपुर शर्मा प्रसंग में भी हुआ। अपमान तो रहमानी ने भी किया था किन्तु चर्चा केवल नूपुर शर्मा की ही हुई। शुभम शुक्ला नाम के एक यूजर ने लिखा कि धर्मिक पुस्तकों पर क्यों इतने सवाल किये जा रहे हैं? क्या इस देश में यही बचा रह गया है?
