नई दिल्ली
तुर्की और सीरिया से खौफनाक तस्वीरें आ रही हैं। ऊंची इमारतें जमींदोज हो गई हैं। हर तरफ मलबा बिखरा पड़ा है। चीखते लोग, बच्चों के शवों को उठाए बदहवास लोग भागते देखे जा रहे हैं। मल्टी-स्टोरी बिल्डिंग्स के मलबे में फंसे लोगों को निकाला जा रहा है। जब से तुर्की में जलजले की खबर आई है, भारत में भी ऊंची इमारतों में रहने वाले लोग टेंशन में हैं। कहीं इतना जोरदार भूकंप यहां आ गया तो क्या होगा? क्या हम जिन 30-40 मंजिला फ्लैटों में रहते हैं, वे जोरदार झटके झेल सकते हैं? आज सुबह तुर्की-सीरिया में आए शक्तिशाली भूकंप ने 1300 से ज्यादा लोगों की जानें ले ली। 3000 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। इस भूकंप की तीव्रता 7.8 थी। आमतौर पर 6 से ज्यादा तीव्रता का जलजला तबाही लाता है। बड़े झटके के बाद 6 के आसपास की तीव्रता के कम से कम 50 झटके महसूस किए गए हैं। ऐसे में वहां के मंजर का अंदाजा लगाया जा सकता है।
दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, मुंबई समेत देश के तमाम शहरों में आजकल ऊंची इमारतों में बड़ी आबादी रहती है। पहले वो दौर था जब लोग खुद घर बनाते थे लेकिन आजकल बिल्डर बनाकर देता है और लोगों को पता नहीं रहता कि इस इमारत की क्वॉलिटी क्या है। हां, यह जरूर है कि विकास प्राधिकरण की तरफ से निगरानी रखी जाती है और बाकायदा समय-समय पर रिपोर्ट लेने का प्रावधान है। लेकिन भ्रष्टाचार और रिश्वत कल्चर से भी इनकार नहीं किया जा सकता। जिस तरह से फ्लैट देने में हीलाहवाली होती है, बिल्डर बताते कुछ हैं देते कुछ हैं, उससे कई तरह की आशंकाएं पैदा होती हैं।
दिल्ली-नोएडा में आए दिन महसूस हो रहे झटके
दिल्ली-एनसीआर में भूकंप के झटके महसूस होना आम बात हो गई है। पिछले महीने में भूकंप आया था। दो साल में कई बार भूकंप आ चुका है। जब भी धरती कांपती है तो ऊंची इमारतों में रहने वाले लोगों का दिल भी तेजी से धड़कने लगता है। गाहे-बगाहे यह भी खबर आती है कि दिल्ली में बड़े भूकंप का खतरा बना हुआ है। नेपाल, पाकिस्तान, अफगानिस्तान में आए भूकंप के झटके से ही दिल्ली-नोएडा के लोग सहम जाते हैं। सवाल वही, यहां इतना जोरदार जलजला आया तो क्या होगा? दरअसल, दिल्ली की लोकेशन के हिसाब से आशंका जताई जाती है कि यहां भविष्य में 7 की तीव्रता का भूकंप आ सकता है। भूविज्ञान मंत्रालय की रिपोर्ट है कि अगर राजधानी में 6 से ज्यादा की तीव्रता का भूकंप आया तो भारी नुकसान हो सकता है।
दिल्ली की इमारतें कितनी सेफ हैं?
चिंता की बात यह है कि दिल्ली की आधी इमारतें तेज झटका झेल पाने की स्थिति में नहीं हैं। पुरानी इमारतों को ज्यादा नुकसान होता है। आपको याद होगा 2015 में नेपाल में करीब 8 की तीव्रता का भूकंप आया था। दिल्ली को तीन जोन में बांटकर देखा जाए तो सबसे खतरे वाले इलाके में DU का नॉर्थ कैंपस, गीता कॉलोनी, वजीराबाद, सरिता विहार, करोल बाग, बवाना, रोहिणी, रिठाला, जनकपुरी आता है। दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर 2019 में भूकंप से बचने के लिए इमारतों की मजबूती जांचने के लिए एक्शन प्लान बना था। हालांकि यह काम आज भी अधूरा है।
तीन महीने पहले की रिपोर्ट के मुताबिक जिन एजेंसियों को ऊंची इमारतों की सेफ्टी जांच का जिम्मा सौंपा गया था, उन्होंने केवल 4600 इमारतों को चिन्हित किया था और मात्र 750 इमारतों का सेफ्टी ऑडिट पूरा हो पाया था। जबकि दिल्ली-एनसीआर में 30 लाख से ज्यादा बिल्डिंग्स हैं। डीडीए के वरिष्ठ अधिकारी रहे एके जैन बताते हैं कि MCD हर साल जोखिम वाली इमारतों की जांच करती है। 10-12 लाख बिल्डिंग का ही सर्वे हो पाता है। उनका दावा है कि दिल्ली की करीब 40 लाख बिल्डिंग्स में से 80 फीसदी इमारतें भूकंप का तेज झटका नहीं झेल सकती हैं।
30 साल में गगनचुंबी इमारतों की बाढ़!
भूकंप के लिहाज से राजधानी सिस्मिक जोन-4 में पड़ता है यानी यह अतिसंवेदनशील क्षेत्र है। यूं समझ लीजिए कि हर बिल्डिंग का स्ट्रक्चर ऑडिट होना चाहिए। एक्सपर्ट बताते हैं कि पिछले 30 साल में बड़ी संख्या में गगनचुंबी इमारतें बनी हैं। गौर करने वाली बात यह है कि सामान्य रूप से 30 साल पुरानी इमारतों को सुरक्षित नहीं कहा जा सकता है। आगे की सेफ्टी रखरखाव और इमारत में लगी सामग्री की क्वॉलिटी पर निर्भर करती है। अवैध रूप से बसी कॉलोनियों और दशकों पुरानी इमारतें तो कम झटके में भी ढह सकती हैं।
ये नियम कम लोग जानते हैं
इमारत 30 मंजिला हो या 3 मंजिला, जरूरी यह है कि उसमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री की जांच हो। सरिये की मजबूती से कोई समझौता न हो। इमारत के आसपास पानी लगने से भी स्ट्रक्चर कमजोर होता है। खराब बालू-सीमेंट का इस्तेमाल और बाद में रखरखाव न होने से भी बिल्डिंग कमजोर हो जाती है। यूं समझ लीजिए कि दिल्ली-एनसीआर के लोग हाई रिस्क जोन में हैं। 8 के करीब की तीव्रता का भूकंप आया तो कुछ भी कहा नहीं जा सकता है।
