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रुद्राक्ष महोत्सव में भगदड़ और महिला की मौत, पं प्रदीप मिश्रा के कुबेरेश्वर धाम पर लग रहे आरोप

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सीहोर

कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा के सीहोर स्थित कुबेरेश्वर धाम में रुद्राक्ष महोत्सव में रुद्राक्ष वितरण बंद कर दिया गया है। प्रशासन के आग्रह पर यह फैसला किया गया है। इससे पहले रुद्राक्ष महोत्सव के दूसरे दिन भी भारी अव्यवस्था का माहौल है। रुद्राक्ष के लिए आए श्रद्धालु सुबह से लाइन में लग गए। महोत्सव के पहले दिन गुरुवार को श्रद्धालुओं की भीड़ के चलते कई बार भगदड़ की हालत पैदा हो गई थी। सेकड़ों लोगों के लापता होने की खबरें आईं जबकि एक महिला की मौत हो गई। प्रशासन का कहना है कि उसे पांच-छह लाख लोगों के आने की जानकारी दी गई थी। प्रशासन ने दस लाख लोगों के लिए इंतजाम किए, लेकिन महोत्सव में 20 लाख से ज्यादा लोग आ गए। इसके चलते आयोजन स्थल पर अव्यवस्था होने के साथ भोपाल-इंदौर हाईवे पर भी कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया। प्रशासन ने कहा है कि आयोजकों ने सोशल मीडिया के जरिए श्रद्धालुओं को आमंत्रित किया जिसके चलते इतनी भीड़ हो गई।पंडित प्रदीप मिश्रा के आयोजनों में इससे पहले भी अव्यवस्था होती रही है। उनके फॉलोअर्स की संख्या लाखों में है। विवादों से भी उनका पुराना नाता रहा है।

सीहोर में हुआ जन्म
पंडित प्रदीप मिश्रा साल 1980 में मध्य प्रदेश के सीहोर में पैदा हुए थे। सीहोर के हाई स्कूल से पढ़ाई करने के बाद उन्होंने ग्रेजुएशन की डिग्री ली। उनके पिता का नाम पंडित रामेश्वर दयाल मिश्रा है। पं प्रदीप मिश्रा के दो भाई हैं।

कथा वाचन से पहले शिक्षक
पं प्रदीप मिश्रा गृहस्थ जीवन जीते हैं। वे विवाहित हैं। कथा वाचन को पेशा बनाने से पहले वे शिक्षक थे। वे सीहोर के निजी स्कूलों में शिक्षक रह चुके हैं। इसके साथ-साथ वे लोगों के घरों में पूजा-पाठ और कथा वाचन भी करते थे। वे अधिकतर महिलाओं के व्रत और पूजा में कथा वाचन करते थे। आगे चलकर उन्होंने भागवत कथा का वाचन भी शुरू कर दिया।

हनुमान जी की प्रतिमा का आया सपना
पं प्रदीप मिश्रा जब कर्मकांड का काम करते थे, तब उन्हें एक दिन अपने घर के पास एक खंडहर में हनुमान जी की प्रतिमा होने का स्वप्‍न आया। उस जगह की खुदाई करवाने पर एक शिला निकली जिस पर सिंदूर लगा था। इसके बाद लोगों ने उस जगह पर मंदिर बनाने की मांग की। लेकिन इसमें दो बड़ी समस्या थी। एक तो वह खंडहर बीच बाजार में था और दूसरा शहर की बहुमूल्य जमीनों में शामिल था। जमीन का मालिक वहां मंदिर बनाने को राजी नहीं हुआ। उसने शिला को वहां से ले जाने को कहा। इसके बाद शिला को खंडहर के पास स्थित एक घर में स्थापित की गई। यह जगह भी पं प्रदीप मिश्रा के घर के पास ही स्थित है, लेकिन वे वहां कभी नहीं जाते।

कथा वाचन के साथ टोटके और रिश्तों के किस्से
पं प्रदीप मिश्रा शिव महापुराण का वाचन करने के साथ टोटके भी बताते हैं। उनके टोटके विवाह, नौकरी, संतान और परीक्षा में सफल होने संबंधी होते हैं। कर्ज से मुक्ति और धनवान बनने के टोटके भी वे बताते हैं। उनका दावा है कि उनके टोटके पुराणों में लिखे हैं। अपनी कथा में वे सास-बहू, देवरानी-जेठानी, ननद-भौजाई और अन्य रिश्तों के किस्से भी बताते हैं। इसलिए उनके फॉलोअर्स में महिलाओं की बड़ी तादाद है।

कई बार रहे विवादों में
शिला को मंदिर में स्थापित करने को लेकर सीहोर में जमकर विवाद हुआ था, लेकिन इस घटना के बाद वे मशहूर हो गए। लोग उन्हें सिद्ध मानने लगे। इसके कुछ दिन बाद वे दूसरे बड़े विवाद में फंसे, जब उन्होंने सीहोर में गायों का भंडारा कराया। इसमें कुछ गायों की मौत हो गई थी।

रुद्राक्ष महोत्‍सव से हुए मशहूर
पं प्रदीप मिश्रा के आयोजनों में कई बार विवाद हुए। कोरोना के दौरान उन्होंने आयोजन कराया जिसका विरोध हुआ। पिछले साल उन्होंने कुबेरेश्वर धाम में रुद्राक्ष महोत्सव किया। रुद्राक्ष की मदद से बीमारी से लेकर धनवान होने तक के उपाय उन्होंने बताए। इससे उनकी ख्याति बढ़ी।

वैष्‍णव मत के समर्थक
पं प्रदीप मिश्रा की प्रसिद्धि का कारण शिव महापुराण का वाचन और रुद्राक्ष महोत्सव है, लेकिन वे खुद वैष्णव मत का समर्थन करते हैं। वे अपने माथे पर हमेशा वैष्णव मत का तिलक लगाते हैं।

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