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सरकार से पंगा लेने में डरता है सुप्रीम कोर्ट, सीनियर एडवोकेट बोले- जब तक पलटवार नहीं होगा, ये लोग मानने वाले नहीं

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नई दिल्ली

सीनियर एडवोकेट दुष्यंत दवे मानते हैं कि सुप्रीम कोर्ट सरकार से आमने सामने की लड़ाई लड़ने में डरता है। यही वजह है कि 1993 के बाद से कभी भी न्यायिक नियुक्तियों के मामले में पॉवर ऑफ कंटेंप्ट का इस्तेमाल नहीं किया गया। जब तक सुप्रीम कोर्ट सरकार पर पलटवार नहीं करेगा तब तक उसके अधिकार क्षेत्र में सरकारी दखल होता रहेगा।

एक सेमिनार में दवे ने जस्टिस मुरलीधर का जिक्र कर सुप्रीम कोर्ट की बेबसी को उजागर किया। उनका कहना था कि जस्टिस मुरलीधर बेहतरीन समझ वाले शख्स हैं। कानूनी मामलों में उनकी जानकारी से सभी वाकिफ हैं। उनकी जगह सुप्रीम कोर्ट में होनी चाहिए थी। लेकिन सरकार ने टांग अड़ाई और वो अभी तक एक अच्छे हाईकोर्ट के लिए भी तरस रहे हैं।

न्यायपालिका ऐसे जजों से भरी, जिन्हें कानून के बारे में ज्यादा कुछ नहीं पता
दुष्यंत दवे ने कहा कि न्यायपालिका ऐसे जजों से भरी पड़ी है जिन्हें कानून के बारे में ज्यादा कुछ नहीं पता। उनके पास वो कमिटमेंट भी नहीं है जो न्यायपालिका के लिए चाहिए होता है। दवे का कहना था कि एक्स सीजेआई यूयू ललित, जस्टिस एमबी लोकुर भारत के अब तक के बेहतरीन जज रहे हैं। लेकिन ये सभी लोग लुप्त होती प्रजाति का हिस्सा हैं। उनका कहना था कि कॉलेजियम सिस्टम बेहतरीन जजों को सामने लाने में नाकाम रहे है। अगर ऐसा होता तो जस्टिस मुरलीधर, जस्टिस अखिल कुरैशी सुप्रीम कोर्ट की शोभा बढ़ा रहे होते। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस सभी के मामलों में सरकार के सामने सरेंडर कर दिया।

सीनियर एडवोकेट में कहा कि भारत के लोग शांतिप्रिय हैं। जबकि इजरायल और पाकिस्तान को देखे तो वहां ऐसी स्थिति नहीं है। इजरायल के प्रधानमंत्री ने न्यायपालिका में अतिक्रमण की कोशिश की तो लोग सड़कों पर उतर आए। सरकार को बैकफुट पर जाना पड़ा। पाकिस्तान में भी जनरल परवेज मुशर्रफ ने जब जूडिशिरी को काबू करने की कोशिश की तो भी बार और दूसरे लोगों ने उनको बैकफुट पर धकेल दिया। उनका कहना था कि भारत में न तो बार और न ही लोग न्यायपालिका की आजादी को लेकर संजीदा नहीं हैं।

सरकार बड़े पैमाने पर दे रही इंदिरा के जमाने जैसा दखल
उनका कहना था कि आज न्यायपालिका में बड़े पैमाने पर सरकार का दखल हो रहा है। आज जो हो रहा है वो इंदिया गांधी के समय में भी हुआ था। तब भी न्यायपालिका कमजोर की गई थी। लेकिन आज वक्त की जरूरत है कि सुप्रीम कोर्ट को सरकार पर पलटवार करना होगा। अवमानना इसका बेहतरीन हथियार है। कोर्ट इसे इस्तेमाल करे।

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