6.6 C
London
Wednesday, April 22, 2026
Homeराष्ट्रीयमुलायम ही नहीं रहे तो केस में क्या बचा, CJI बोले तो...

मुलायम ही नहीं रहे तो केस में क्या बचा, CJI बोले तो हुआ अखिलेश और प्रतीक का जिक्र, SC ने पूछा- छह साल बाद क्यों आए

Published on

नई दिल्ली

आय से अधिक संपत्ति के मामले में मुलायम सिंह यादव के खिलाफ जांच बंद करने की सीबीआई की रिपोर्ट की कॉपी की मांग वाली याचिका को खारिज करते हुए सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने पूछा कि छह साल बाद याचिका दायर करने का क्या मतलब है। अदालत का कहना था कि मुलायम सिंह यादव ही नहीं रहे तो फिर केस में क्या बचा। याचिकाकर्ता ने अखिलेश और प्रतीक का जिक्र किया। कोर्ट ने उलटा सवाल दागा कि सीबीआई ने मामला बंद करने का फैसला 2013 में किया। आपने 2019 में याचिका दायर की। छह साल तक क्या करते रहे थे।

सीबीआई ने 2019 में शीर्ष अदालत को बताया था कि मुलायम और उनके दो बेटों- अखिलेश और प्रतीक के खिलाफ संज्ञेय अपराध होने का “प्रथम दृष्टया कोई सबूत” नहीं मिला था, इसलिए प्रारंभिक जांच (PE) को FIR में नहीं बदला गया था। सात अगस्त 2013 के बाद मामले में कोई जांच नहीं हुई थी।

सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस जेबी पारदीवाला की बेंच ने कहा कि एक मार्च 2007 और 13 दिसंबर 2012 के फैसले के बाद से सीबीआई ने सात अगस्त, 2013 को अपनी प्रारंभिक जांच बंद कर दी और आठ अक्टूबर 2013 को अपनी रिपोर्ट सीवीसी को सौंपी। यह याचिका छह साल बाद 2019 में दाखिल की गई है। आवेदन में कोई दम नहीं है और इसलिए इसे खारिज किया जाता है।

शीर्ष अदालत ने बताया कि उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव का निधन हो चुका है। बेंच ने याचिकाकर्ता विश्वनाथ चतुर्वेदी से पूछा कि मामले में क्या बचा है। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि मुलायम के खिलाफ कार्यवाही बंद कर दी गई है, लेकिन आरोप उनके बेटों-अखिलेश और प्रतीक के खिलाफ भी हैं।

अखिलेश और प्रतीक की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि सीबीआई ने प्रारंभिक जांच करने के बाद क्लोजर रिपोर्ट दायर की और कहा कि नियमित मामला दर्ज करने के लिए कोई औचित्य नहीं बनता है। चतुर्वेदी के वकील ने तर्क दिया कि उन्होंने सीवीसी के समक्ष एक आरटीआई आवेदन दायर किया था। उन्हें सूचित किया गया था कि सीबीआई ने ऐसी कोई क्लोजर रिपोर्ट दायर नहीं की थी।

जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि क्लोजर रिपोर्ट 2013 में दायर की गई थी और याचिकाकर्ता ने 2019 में अपनी याचिका दायर की थी। उन्होंने पूछा कि हमें बताए कि इतने वर्षों के बाद हम इस आवेदन पर कैसे विचार कर सकते हैं। वकील ने कहा कि जब एक संज्ञेय अपराध प्रथम दृष्टया बनता है तो शिकायतकर्ता को क्लोजर रिपोर्ट की प्रति प्रदान की जानी चाहिए। बेंच ने जवाब दिया कि वह क्लोजर रिपोर्ट की प्रति के लिए आवेदन पर विचार करने के लिए इच्छुक नहीं है।

Latest articles

पहलगाम हमले की बरसी: PM मोदी ने जान गंवाने वाले निर्दोषों को याद किया, कहा- आतंक के आगे भारत कभी नहीं झुकेगा

नई दिल्ली। पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भावुक...

चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी ने एआई इम्पैक्ट समिट-2026 की तर्ज पर भारत के पहले एआई फेस्ट की मेजबानी

चंडीगढ़ l इंडिया एआई मिशन को मजबूती देने के लिए सीयू एआई मिशन लॉन्च...

अवैध प्लाटिंग और अतिक्रमण पर सख्ती बरतें, कोताही बर्दाश्त नहीं: उप मुख्यमंत्री अरुण साव के कड़े निर्देश

रायपुर। छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव ने...

राजस्थान: पेयजल संकट से निपटने के लिए सरकार का ‘सुपर एक्शन’, दो दिन में ठीक हुए 1500 से ज्यादा हैंडपंप

जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देश पर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था...

More like this

पहलगाम हमले की बरसी: PM मोदी ने जान गंवाने वाले निर्दोषों को याद किया, कहा- आतंक के आगे भारत कभी नहीं झुकेगा

नई दिल्ली। पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भावुक...

महिला आरक्षण बिल पास नहीं हुआ, PM बोले- माफी मांगता हूं

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज राष्ट्र को संबोधित किया। इस दौरान पीएम...

54 वोट से गिरा महिला आरक्षण से जुड़ा बिल: पास होने के लिए चाहिए थे 352, मिले 298

मोदी सरकार बिल पास कराने में पहली बार नाकाम नई दिल्ली। महिला आरक्षण बिल से...