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मानहानि क्या है, इसमें कितनी सजा हो सकती है? पढ़ें वे 10 बातें जब नहीं दर्ज हो सकता केस

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नई दिल्ली,

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को मानहानि के मामले में दोषी करार दिया गया है. राहुल को ‘मोदी सरनेम’ पर टिप्पणी को लेकर सूरत की कोर्ट ने दो साल की सजा सुनाई है. हालांकि, उन्हें तुरंत जमानत भी मिल गई. राहुल गांधी को ये सजा चार साल पुराने मामले में मिली है. राहुल ने ‘मोदी सरनेम’ पर 13 अप्रैल 2019 को कर्नाटक की चुनावी रैली में विवादित टिप्पणी की थी. उन्होंने कहा था, ‘नीरव मोदी, ललित मोदी, नीरव मोदी का सरनेम कॉमन क्यों है? सभी चोरों का सरनेम मोदी क्यों होता है?’

राहुल गांधी की इस टिप्पणी पर बीजेपी विधायक पूर्णेश मोदी ने मानहानि का केस दायर किया था. इसी पर सीजेएम एचएच वर्मा ने राहुल को सजा सुनाई. हालांकि, सजा के ऐलान के बाद ही उन्हें जमानत भी दे दी गई. साथ ही उनकी सजा को 30 दिन के लिए निलंबित भी कर दिया गया है, ताकि उन्हें ऊपरी अदालत में अपील करने का मौका मिल सके.

जिस समय सजा का ऐलान किया गया, उस समय राहुल गांधी अदालत में ही मौजूद थे. सजा के ऐलान के बाद राहुल गांधी ने महात्मा गांधी के एक कथन को शेयर करते हुए ट्वीट किया, ‘मेरा धर्म सत्य और अहिंसा पर आधारित है. सत्य मेरा भगवान है, अहिंसा उसे पाने का साधन.’ कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी ट्विटर पर सरकार को घेरा. उन्होंने लिखा की तानाशाही सरकार डरी हुई है, क्योंकि हम भ्रष्टाचार का उजागर कर रहे हैं. खड़गे ने बताया कि इस फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती दी जाएगी.

ये मानहानि क्या होती है?

– संविधान के तहत भारत के हर नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मिली है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि आपको किसी को अपमानित करने का अधिकार भी मिल गया है.

– आईपीसी की धारा 499 में ‘मानहानि’ को डिफाइन किया गया है. इसके अनुसार अगर कोई बोलकर, लिखकर, पढ़कर, इशारों या तस्वीरों के जरिए किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा पर लांछन लगाता है तो इसे मानहानि माना जाएगा.

– इसके अलावा अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर बोलकर, लिखकर, पढ़कर, इशारों या तस्वीरों-वीडियो के जरिए किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा पर लांछन लगाता है तो वो भी मानहानि के दायरे में आता है.

– इसी धारा में मृत व्यक्ति की मानहानि का भी जिक्र है. इसके तहत, किसी मृत व्यक्ति को भी मानहानि के योग्य माना गया है. मृत व्यक्ति के करीबी रिश्तेदार-नातेदार इसके लिए मुकदमा भी चला सकते हैं. किसी टिप्पणी या शब्दों के जरिए मृत व्यक्ति के सम्मान और प्रतिष्ठा को क्षति पहुंचाई जाती है तो वो भी मानहानि मानी जाएगी.

– मानहानि के लिए टिप्पणी या बयान का ‘आपत्तिजनक’ होना जरूरी है. अब आपत्तिजनक क्या होगा? इसका फैसला अदालत करेगी.

ऐसी बातों को नहीं माना जाता मानहानि

1. अगर किसी ऐसी बात का लांछन लगाया जाता है, जो उस व्यक्ति के बारे में सही हो तो उसे मानहानि नहीं माना जाता.

2. अगर अच्छे मकसद के लिए किसी सरकारी सेवक को लेकर कुछ अभिव्यक्त करते हैं तो उसे मानहानि नहीं माना जाएगा.

3. आम जनता से जुड़े किसी सवाल को लेकर अगर किसी सरकारी सेवक को लेकर कुछ अभिव्यक्त किया जाता है वो मानहानि नहीं होगी.

4. अगर किसी अदालत की कार्यवाहियों की सही रिपोर्टिंग की जाती है तो वो मानहानि नहीं होगी.

5. अगर अदालत में कोई मामला चल रहा हो तो उससे जुड़े लोगों के बारे में अगर कुछ रिपोर्ट किया जाता है तो उसे मानहानि नहीं माना जाता.

6. अगर कोई व्यक्ति अपनी किसी रचना को पब्लिक ओपिनियन के लिए रखता है और उस पर आप कोई राय देते हैं तो वो मानहानि नहीं होगी.

7. किसी व्यक्ति का किसी दूसरे व्यक्ति पर कानूनी रूप से अधिकार है और वो उसकी निंदा करता है तो ये मानहानि के दायरे में नहीं आएगा.

8. अगर कोई व्यक्ति किसी ऐसी व्यक्ति के खिलाफ कोई आरोप लगाता है जिस पर उसका कानूनी रूप से अधिकार है तो वो भी मानहानि नहीं होगी.

9. अगर कोई व्यक्ति अपने या दूसरे के हित के लिए किसी तीसरे व्यक्ति पर कोई लांछन लगाता है तो वो भी मानहानि नहीं मानी जाएगी.

10. अगर कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति को तीसरे व्यक्ति से अच्छे मकसद से सावधान रहने के लिए कहता है तो ये भी मानहानि नहीं होगी.

मानहानि पर सजा का क्या है प्रावधान?
आईपीसी की धारा 500 में मानहानि के मामले में दोषी पाए जाने पर सजा का प्रावधान है. अगर कोई व्यक्ति किसी व्यक्ति की मानहानि का दोषी पाया जाता है तो उसे दो साल की जेल या जुर्माने या दोनों की सजा हो सकती है.

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