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नमाज रोकने का कोई आदेश था? सुप्रीम कोर्ट के सवाल पर वकील बोला- नहीं, दिल्ली HC को दिया तुरंत सुनवाई का आदेश

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नई दिल्ली

कुतुब मीनार कांप्लेक्स में नमाज अदा करने की अनुमति हासिल करने पहुंचे दिल्ली वक्फ बोर्ड को सुप्रीम कोर्ट ने खाली हाथ लौटा दिया। बोर्ड की याचिका की सुनवाई करने से कोर्ट ने साफ तौर पर इनकार कर दिया। लेकिन शीर्ष अदालत को जब ये पता चला कि केंद्र ने बगैर कोई आदेश जारी किए नमाज अदा करने पर रोक लगा दी तो डबल बेंच ने दिल्ली हाईकोर्ट को मामले में तत्काल सुनवाई करने का आदेश दिया।

दिल्ली वक्फ बोर्ड की सुप्रीम कोर्ट से अपील थी कि अभी रमजान का महीना चल रहा है। लिहाजा वो मुस्लिम समाज की भावनाओं को समझकर मुगल मस्जिद में नमाज अदा करने की अनुमति दे।सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस कृष्ण मुरारी और जस्टिस सीटी रवि कुमार की बेंच ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा कि वो इस मामले में दखल नहीं दे सकते। डबल बेंच ने याचिकर्ता के वकील से पूछा कि केंद्र ने कुतुब मीनार कांप्लेक्स में नमाज अदा करने से रोकने के लिए कोई आदेश जारी किया था।

वक्फ बोर्ड के वकील ने कहा कि नहीं ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया गया। केवल फोर्स का इस्तेमाल कर जबरन हमें कांप्लेक्स में जाने से रोक दिया गया। वकील का जवाब सुनने के बाद दोनों जजों की पेशानी पर बल पड़ गए। उनका कहना था कि बगैर आदेश जारी किए बगैर सरकार ऐसा कैसे कर सकती है। दिल्ली हाईकोर्ट से कहा गया कि वो मामले की तह में जाकर सुनवाई करे और जल्द से जल्द इस मामले में कोई आदेश जारी करे।

दिल्ली वक्फ बोर्ड के वकील ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि कुतुब मीनार कांप्लेक्स में मौजूद मुगल मस्जिद 16 अप्रैल 1970 के एक नोटिफिकेशन के तहत उसकी संपत्ति है। मस्जिद में बाकायदा एक इमाम को नियुक्त किया गया है जिससे वहां पर नमाज अदा कराई जा सके। वक्फ बोर्ड से सुप्रीम कोर्ट से कहा कि उनकी अपील दिल्ली हाईकोर्ट के पास लंबित है। लेकिन सुनवाई बेहद धीमी रफ्तार से हो रही है। लगता नहीं कि न्याय मिल पाएगा।

वक्फ बोर्ड बोला- दिल्ली हाईकोर्ट को गुमराह कर रहा केंद्र
वक्फ बोर्ड के मुताबिक 6 और 13 मई 2022 को केवल पांच लोग नमाज अदा करने मस्जिद में गए तो उनको रोक दिया गया। केंद्र सरकार के अफसरों का कहना था कि वो वहां नमाज अदा नहीं कर सकते। दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल अपने जवाब में केंद्र ने कहा है कि ये मस्जिद एक धरोहर है। साकेत की अदालत ने भी ऐसा ही माना है। वक्फ बोर्ड का कहना था कि साकेत की अदालत के पास जो मसला है वो दूसरी मस्जिद का है।

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