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ज्ञानवापी मजिस्द विवाद: जिला प्रशासन के साथ बनी मुस्लिम पक्ष की बड़ी सहमति, सुप्रीम कोर्ट दे सकती है राहत!

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वाराणसी

ज्ञानवापी परिसर में वजूखाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने दिशा निर्देश जारी किए थे, जिसके बाद वाराणसी के जिला प्रशासन ने ज्ञानवापी परिसर से जुड़े सभी पक्षों को साथ लेकर एक सहमति बनाई है। दरअसल वजूखाने को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सील कर दिया गया था, जिसके बाद से मुस्लिम पक्ष लगातार वजूखाने को लेकर सवाल उठा रहा था। इस मामले को लेकर ज्ञानवापी परिसर की देखरेख करने वाली अंजुमन इंतजामिया कमिटी सुप्रीम कोर्ट गई थी। चीफ जस्टिस के निर्देश के बाद जिला प्रशासन ने आज अहम बैठक की। ज्ञानवापी परिसर के वाजूखाने में ही आदिविश्वेश्वर का शिवलिंग मिलने का दावा किया गया था, जिसके बाद से सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उस जगह को सील कर दिया था।

वाराणसी के जिलाधिकारी एस राज्यलिंगम ने आज ज्ञानवापी परिसर की देखभाल करने वाली अंजुमन इंतजामिया कमेटी के पदाधिकारियों के साथ बैठक की। सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों के अनुसार ज्ञानवापी में वजू करने को लेकर मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। इस पर आज बैठक करके वजू करने के लिए टैंक और मोबाइल शौचालय लगाने की सहमति बनी है। जिलाधिकारी एस राजलिंगम ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बैठक करके सहमति बनाई गई। जल्द ही इस बैठक से जुड़ी तमाम बातें जिन पर सहमति बनी है, उसे कोर्ट को बताया जाएगा। फिर जैसा सुप्रीम कोर्ट निर्देश देगा, उसकी व्यवस्था की जाएगी।

मुस्लिम पक्ष ने कहा सुप्रीम कोर्ट की बात मानेंगे
अंजुमन इंतजामिया कमिटी के संयुक्त सचिव यासीन ने बताया कि हम लोग वजू करने में आ रही परेशानी को सुप्रीम कोर्ट के सामने रखा था। इस पर चीफ जस्टिस ने जिला प्रशासन को वजू करने में आ रही परेशानी का हल निकालने को कहा। आज जिला प्रशासन के उच्च अधिकारी के साथ बैठक में कुछ बातों पर सहमति बनी है। अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर जो व्यवस्था बनाई जाएगी, हम उस व्यवस्था के साथ सहमत रहेंगे।

सुप्रीम कोर्ट में आदेश पर ही बंद है वजूखाना
ज्ञानवापी परिसर के सर्वे के दौरान वजूखाने में फव्वारानुमा एक आकृति मिली थी, जिसे हिंदू पक्षकारों ने शिवलिंग बताया था। इस दावे के आधार पर सुप्रीम कोर्ट से वजू खाने के परिसर को सील करने संबंधी आदेश पारित करवाया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ही वजू खाने का पूरा परिसर सील कर दिया गया। इसके बाद से नमाजियों के लिए वजू की वैकल्पिक व्यवस्था की मांग होने लगी। वजू के व्यवस्था को लेकर ही मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था।

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