नई दिल्ली,
अप्रैल महीने में पिछले दिनों कई राज्य हीटवेव का कहर झेल रहे थे. अब भी कई राज्य ऐसे हैं, जहां लू का सितम जारी है. लेकिन अब इस मामले पर एक डराने वाली रिपोर्ट सामने आई है. एक अध्ययन में पता चला है कि जलवायु परिवर्तन के कारण भारत में ‘लू’ लगातार और भी खतरनाक होती जा रही है. रिसर्च के मुताबिक, देश का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा लू के प्रभाव से डेंजर ज़ोन में है. इसमें दिल्ली का पूरा इलाका शामिल है.
खतरे में दिल्ली
ये रिसर्च कैंब्रिज विश्वविद्यालय में रामित देबनाथ और उनके सहयोगियों द्वारा की गई. अध्ययन में कहा गया है कि ‘लू’ ने संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को प्राप्त करने की दिशा में भारत की प्रगति को पहले की तुलना में ज्यादा बाधित किया है. इसी अध्ययन के आधार पर ये कहा गया है कि दिल्ली भी लू के प्रभाव के खतरे के क्षेत्र में है.
हीटवेव से 50 वर्षों में 17,000 से अधिक लोगों की मौत
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के पूर्व सचिव एम राजीवन द्वारा वैज्ञानिक कमलजीत रे, एस एस रे, आर के गिरि और ए पी डिमरी के साथ लिखे गए एक पेपर के अनुसार, हीटवेव ने भारत में 50 वर्षों में 17,000 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है. 2021 में छपे पेपर में कहा गया था कि 1971-2019 तक देश में लू की 706 घटनाएं हुईं. 16 अप्रैल (रविवार) को नवी मुंबई में महाराष्ट्र सरकार के एक पुरस्कार समारोह में हीटस्ट्रोक से तेरह लोगों की मौत हो गई, जिससे यह देश के इतिहास में हीटवेव से संबंधित किसी भी घटना से सबसे अधिक मौतों में से एक बन गया.
क्या होती है हीटवेव?
अगर मैदानी इलाकों में अधिकतम तापमान कम से कम 40 डिग्री सेल्सियस, तटीय क्षेत्रों में कम से कम 37 डिग्री सेल्सियस और पहाड़ी क्षेत्रों में कम से कम 30 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है और सामान्य से कम से कम 4.5 डिग्री सेल्सियस ज्यादा हो जाता है तो उसे हीटवेव घोषित की जाती है.
बता दें कि इस महीने की शुरुआत में, भारत मौसम विज्ञान विभाग ने उत्तर-पश्चिम और प्रायद्वीपीय क्षेत्रों को छोड़कर अप्रैल से जून तक देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक अधिकतम तापमान की भविष्यवाणी की थी. इस दौरान मध्य, पूर्व और उत्तर-पश्चिम भारत के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक गर्म हवा के दिनों की उम्मीद है.
2023 में सबसे गर्म फरवरी
2023 में भारत ने 1901 में रिकॉर्ड-कीपिंग शुरू होने के बाद से अपने सबसे गर्म फरवरी का अनुभव किया. हालांकि, मार्च में सामान्य से अधिक बारिश ने तापमान को नियंत्रित रखा. वहीं, मार्च 2022 अब तक का सबसे गर्म और 121 वर्षों में तीसरा सबसे सूखा वर्ष था. इस साल 1901 के बाद से देश का तीसरा सबसे गर्म अप्रैल भी देखा गया.
भारत में लगभग 75 प्रतिशत कर्मचारी (लगभग 380 मिलियन लोग) गर्मी से जुड़ा तनाव का अनुभव करते हैं. मैकिन्से ग्लोबल इंस्टीट्यूट की एक रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अगर ऐसा ही चलता रहा, तो 2030 तक देश की जीडीपी पर 2.5 प्रतिशत से 4.5 प्रतिशत प्रति वर्ष तक नकारात्मक असर पड़ेगा.
