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हाईकोर्ट से NSUI छात्र नेता को बड़ी राहत, DU के आदेश को किया रद्द

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नई दिल्‍ली,

BBC डॉक्‍यूमेंट्री स्क्रीनिंग मामले में दिल्ली विश्वविद्यालय की ओर से एनएसयूआई छात्र लोकेश चुग को दी गई ‘सजा’ अब प्रभावी नहीं रहेगी. दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में NSUI छात्र नेता लोकेश चुग को बड़ी राहत देते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय के उस आदेश को रद्द कर दिया है जिसमें लोकेश चुग को एक साल से डीयू कैंपस से डीबार कर दिया गया था.

मामले के अनुसार बीते माह दिल्ली विश्वविद्यालय ने BBC डॉक्यूमेंट्री स्क्रीनिंग मामले में सख्ती दिखाते हुए लोकेश को दिल्ली विश्वविद्यालय की किसी भी परीक्षा में शामिल होने के लिए एक साल की रोक लगा दी थी. मामला हाईकोर्ट में पहुंचा तो डीयू ने लोकेश को स्क्रीनिंग मामले का मास्टरमाइंड बताते हुए तर्क दिया था कि छात्र ने अनुशासनहीनता की है. लेकिन डीयू के ये तर्क अदालत में काम नहीं आए और अदालत ने इस मामले में छात्र हित में फैसला लेते हुए कहा कि इस केस में नेचुरल जस्टिस का पालन नहीं हुआ. यूनिवर्सिटी ने बिना सुनवाई का मौका दिए छात्र पर कार्रवाई की है. कोर्ट ने कहा कि छात्र चूंकि पीएचडी कर रहा है, उसकी जो थीसिस जहां से रोकी थी, वहीं से शुरू की जाएं.

हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता लोकेश चुग के वकील कपिल सिब्बल और रितिका बोरा ने डीयू के इस फैसले को लेकर दलील दी थी कि इस फैसले से छात्र का भव‍िष्य खराब होगा. छात्र एनएसयूआई के नेशनल सेक्रेटरी के पद पर है, इसलिए उसे सक्र‍िय रहना होता है. लेकिन, जिस घटना को लेकर डीयू उस पर कार्रवाई कर रहा है, उसमें उसकी कतई भूमिका नहीं है. अंत में अपने पक्ष में फैसला होने के बाद लोकेश ने aajtak.in से कहा कि मुझे पूरा भरोसा था कि हाईकोर्ट से मुझे न्याय जरूर मिलेगा. मैं अब आगे की पढ़ाई जारी रख सकता हूं.

क्‍या था पूरा मामला
जनवरी माह में दिल्‍ली यूनिवर्सिटी के कैंपस में प्रधानमंत्री मोदी पर बनी BBC की डॉक्‍यूमेंट्री की स्‍क्रीनिंग के आरोप में NSUI के राष्‍ट्रीय सचिव लोकेश चुग को एक साल के लिए डीबार कर दिया गया था. यूनिवर्सिटी प्रशासन ने छात्र पर एक साल का प्रतिबंध लगाकर उनके परीक्षा देने पर रोक लगा दी थी. यूनिवर्सिटी ने नोटिस जारी कर चुग को आर्ट्स फैकल्‍टी में बिना अनुमति डॉक्‍यूमेंट्री की स्‍क्रीनिंग कराने के चलते डीबार किया था.

यूनिवर्सिटी के एंथ्रोपोलॉजी विभाग के PHd स्‍कॉलर लोकेश चुग का कहना है कि डॉक्‍यूमेंट्री पर बैन है या नहीं, ये पूरा मामला अभी न्यायालय में लंबित है. लेकिन यूनिवर्सिटी ने जल्दबाजी में कोर्ट से पहले ही इसे बैन घोषित करके मुझे सजा भी सुना दी थी. मेरी PHd वाइवा अभी होने हैं. प्रतिबंध लग जाने से मेरा भविष्‍य खराब हो जाता.

 

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