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शेरपुरिया की किताबों का मोहन भागवत ने किया था विमोचन, जानिए ठगी के आरोपी का गुजरात कनेक्शन

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नई दिल्ली

सोशल एंटरप्रेन्योर, कोविड हीरो, सीरियल इन्वेस्टर और लेखक जैसे आधा दर्जन से अधिक उपाधियां संजय राय शेरपुरिया के नाम से जुड़ी हुई हैं। शेरपुरिया का एक म्यूजिक वीडियो भी आ चुका है। उत्तर प्रदेश पुलिस का आरोप है कि शेरपुरिया ने ये सब प्रधानमंत्री कार्यालय में पहुंच होने का दावा कर हासिल किया है। 26 अप्रैल को उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने संजय राय शेरपुरिया गिरफ्तार को लखनऊ से गिरफ्तार किया था।

शेरपुरिया की किताब- दिव्यदर्शी मोदी
अपने सोशल मीडिया पेजों पर खुद को सोशल एंटरप्रेन्योर बताने वाले शेरपुरिया ने कई वरिष्ठ राजनीतिक नेताओं के साथ अपनी तस्वीरें पोस्ट की हैं। पिछले कुछ वर्षों में शेरपुरिया की आधा दर्जन पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं- आई एम माधोभाई: ए पाकिस्तानी हिंदू, हिंदू धर्म की धारोहर: भारतीय संस्कृति, टीचर्स, मेगा टैंट्रम्स ऑफ ममता: द वेलिंग बंगाल, अन्य। शेरपुरिया ने एक किताब ‘दिव्यदर्शी मोदी’ नाम से भी लिखी है।

इन किताबों के विमोचन समारोह में कई जानी-मानी हस्तियां शामिल हुईं। ये सभी पुस्तकें दिल्ली स्थित प्रभात प्रकाशन से प्रकाशित हुईं हैं।शेरपुरिया की नवीनतम किताब का नाम ‘जल प्रबंधन’ है, जिसे 17 अप्रैल को दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में रिलीज किया गया था। स्वच्छ और सुरक्षित जल पर आयोजित जी20 के जिस कार्यक्रम में किताब का विमोचन हुआ, उसका आयोजन नरेंद्र मोदी अध्ययन केंद्र और युवा भारती ट्रस्ट ने किया था।

कई आरएसएस नेताओं की लिखी किताबें प्रकाशित करने वाले प्रभात प्रकाशन के प्रभात कुमार कहते हैं कि वह शेरपुरिया की कथित संदिग्ध पृष्ठभूमि से अवगत नहीं थे। द इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए उन्होंने कहा, “वह किसी के माध्यम से हमारे पास आए। उस समय उन्हें पाकिस्तान से आए हिंदू शरणार्थियों के कल्याण के लिए काम करने के लिए जाना जाता था। यह हमारे दिल के करीब का विषय है। हमें उनका कॉन्टेंट पसंद आया इसलिए हमने उनकी पुस्तकें प्रकाशित कीं। इनमें से दो पुस्तकों का विमोचन आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत जी ने किया। हम किसी की किताबें प्रकाशित करने से पहले उसकी बैलेंस शीट नहीं मांगते।”

पहले सिक्योरिटी गार्ड और ड्राइवर का किया काम
सूत्रों के मुताबिक, शेरपुरिया के दादा एक स्वतंत्रता सेनानी थे। उनके पिता बालेश्वर राय काम के सिलसिले में असम चले गए थे। वहीं शेरपुरिया का जन्म हुआ। हालांकि, 1980 के दशक में उल्फा उग्रवादियों द्वारा राज्य में ‘बाहरी लोगों’ को निशाना बनाए जाने की घटना सामने आने के बाद बालेश्वर राय अपने गृहनगर गाजीपुर लौट आए। सूत्रों ने कहा कि जवानी में शेरपुरिया गुजरात चले गए, जहां उन्होंने सुरक्षा गार्ड और ड्राइवर के रूप में काम किया।

गुजरात पुलिस के अधिकारी ने बताया कि “शेरपुरिया ने एक प्रभावशाली परिवार में शादी की और अपनी खुद की कंपनी शुरू की। कंपनी पर बाद में लोन डिफॉल्ट के लिए केस चला। वह 2000 के दशक की शुरुआत से ही सामाजिक और राजनीतिक रूप से सक्रिय रहे हैं।”शेरपुरिया ने गुजरात में कई साल बिताए। वह ताइक्वांडो एसोसिएशन ऑफ गुजरात के अध्यक्ष भी रहे। यह संस्था भारतीय ओलंपिक संघ के तहत आने वाला एक एक खेल निकाय है।

2014 में शिफ्ट हुआ दिल्ली
सूत्रों के मुताबिक 2014 के आसपास शेरपुरिया दिल्ली में शिफ्ट हो गए। साथ ही उन्होंने अपने गृहनगर गाजीपुर में एक “सोशल एंटरप्रेन्योर” के रूप में नाम कमाया।गाजीपुर में उन्होंने कोरोना महामारी के दौरान ‘लकड़ी बैंक’ खोला, जो दाह संस्कार की सुविधा के लिए मृतक के परिवारों को लकड़ी प्रदान करता था। कहा जाता है कि उन्होंने महामारी के दौरान ऑक्सीजन सिलेंडर, मास्क और दवाएं भी बांटी थीं, जिसके कारण उन्हें फोर्ब्स इंडिया में जगह मिली थी।

2019 में शेरपुरिया ने यूथ रूरल एंटरप्रेन्योर फाउंडेशन (YREF) नाम से एक एनजीओ खोला। इस एनजीओ ने गाजीपुर में ‘आत्मनिर्भर भारत’ थीम पर आधारित “युवा-उन्मुख और रोजगार सृजन” कार्यक्रम आयोजित किए।इंडियन एक्सप्रेस ने 29 अप्रैल को बताया था कि केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय ने राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के माध्यम से 2 करोड़ रुपये की सब्सिडी की मंजूरी दी थी। इसके अलावा, डालमिया परिवार ट्रस्ट ऑफिस ने कथित तौर पर इस साल जनवरी में YREF को दान के रूप में 6 करोड़ रुपये दिए थे।

शेरपुरिया की सामाजिक गतिविधियों के साथ-साथ उनके YREF की गतिविधियों को भी नियमित रूप से स्थानीय समाचार पत्रों और टीवी में दिखाया जाता है। डीडी न्यूज ने उन पर कई बुलेटिन भी चलाए हैं।इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में यह भी बताया था कि कैसे शेरपुरिया ने 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले मनोज सिन्हा को 25 लाख रुपये उधार दिए थे।

शीर्ष नेताओं तक पहुंच का उठाया फायदा
2021 में दिल्ली में शेरपुरिया ने पाकिस्तान से आए हिंदू शरणार्थियों के लिए मजलिस पार्क में एक आश्रय स्थल खोला था। उन्होंने शहर में स्वरोजगार के अवसर पैदा करने पर काम करने का भी दावा किया है।सूत्रों बताते हैं कि दिल्ली में उन्होंने कथित तौर पर राजनेताओं और सरकारी अधिकारियों के साथ मेलजोल बढ़ाया, जिनमें से कई कथित तौर पर उनके गुड़गांव के फ्लैट या उनके दिल्ली के पते, ‘दिल्ली राइडिंग क्लब नंबर 1 सफदरजंग रोड, नई दिल्ली’ पर गए थे।भाजपा और आरएसएस में अच्छी तरह से जुड़े एक सरकारी अधिकारी ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ को बताया कि “शीर्ष नेताओं और सरकार में शीर्ष अधिकारियों तक उनकी पहुंच थी। उन्होंने शीर्ष पर कई नेताओं तक सीधी पहुंच का फायदा उठाया।”

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