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कौन है वीरेंद्र देव दीक्षित? लगे नशा देकर लड़कियों से रेप के आरोप, इंटरपोल नोटिस के बाद दिल्ली HC सख्त

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नई दिल्ली,

साल 2017 में दिल्ली के रोहिणी में एक आध्यात्मिक विश्वविद्यालय में सैकड़ों लड़कियों के कैद होने की खबर ने सनसनी मचा दी थी. हाई कोर्ट के कहने पर दिसंबर में पुलिस ने विश्वविद्यालयमें छापेमारी की. साथ में महिला आयोग भी था. छापे के दौरान विश्वविद्यालय की जो हालत दिखी, उसने बड़े-बड़े केसों से डील करने वाली पुलिस को भी चौंका दिया.

किले की तरह सख्त था विश्वविद्यालय पर पहरा
बेहद बदहाल विश्वविद्यालय में हर जगह सीलबंदी थी. खिड़कियां तक नहीं थीं कि बाहर की हवा भीतर आ सके. यहां तक कि वहां बाथरूम में दरवाजे तक नहीं थे. बाहर वालों को भीतर आने की इजाजत नहीं थी. लेकिन सबसे खराब थी, वहां रहती लड़कियों की. लगभग 40 लड़कियों को जब रेस्क्यू किया गया, जो वे ठीक से चल या बोल भी नहीं पा रही थीं. ऐसा लगता था कि वे गहरे नशे में हैं. वहां से कई लड़कियों को अस्पताल ले जाना पड़ा.

अमेरिका में पढ़ रही लड़कियां भी बन गईं भक्त
लड़कियों ने माना कि अपनी इच्छा से विश्वविद्यालय आईं. लगभग सबने यूट्यूब पर वहां के वीडियो देख रखे थे और उसी को देखकर कथित बाबा से मिलने चली आईं. बहुत सी लड़कियों के रेस्क्यू और कथित बाबा के फरार हो जाने के बाद भी आश्रम बंद नहीं हुआ, बल्कि देश, विदेश से वहां महिलाएं आती ही रहीं. ये कम पढ़ी-लिखी या कम उम्र लड़कियां नहीं थीं, बल्कि कईयों ने अमेरिका की नामी यूनिवर्सिटीज में पढ़ाई कर रखी थी. हालांकि बाबा का कारनामा खुलने के बाद भी उनकी भक्ति कम नहीं हुई.

कौन है वीरेंद्र देव दीक्षित
उत्तरप्रदेश के फर्रुखाबाद में फरवरी 1942 में जन्मे वीरेंद्र देव के बचपन के बारे में खास जानकारी कहीं नहीं, सिवाय इसके कि वे काफी गरीब परिवार से थे. दीक्षित के खिलाफ नोटिस जारी होने के बाद पहली बार उनके परिवार के कुछ सदस्य सामने आए, जिन्होंने कहा कि वो काफी शर्मिला, परिवार से प्रेम करने वाला और औरतों को लेकर काफी प्रोटेक्टिव इंसान रहा. दीक्षित के पिता से नहीं बनती थी, और मां की मौत के बाद वो अहमदाबाद चला गया ताकि वहां किसी विषय पर शोध कर सके. इसी दौरान उसकी ब्रह्माकुमारीज से जान-पहचान हुई.

माउंट आबू में किया पहला दावा
यहां से रिसर्च छोड़कर वो ब्रह्माकुमारी के मुख्य आश्रम माउंट आबू चला गया. यहां ब्रह्माकुमारी आश्रम के फाउंडर लेखराज कृपालिनी की मौत के बाद दीक्षित दावा करने लगा कि उसके भीतर कृपालिनी की आत्मा है. धीरे-धीरे ये दावा बदलकर और बड़ा हो गया.

इस तरह पहुंचा अपने पैतृक घर
वो खुद को सीधे भगवान कृष्ण और शिव का अवतार कहने लगा और लोगों को खुद को फॉलो करने को कहता. ब्रह्माकुमारी के लोगों के एतराज जताने पर दीक्षित आश्रम छोड़कर भागा तो महिलाओं के विंग में घुस गया. यहां से पीटकर भगाए जाने के बाद वो अपने पैतृक गांव पहुंचा, जहां अब पिता की भी मौत हो चुकी थी.

देश के कई शहरों में विश्वविद्यालय
यहीं पर पहला आध्यात्मिक विश्वविद्यालय बना. दीक्षित अब खुद को बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित कहता. धीरे-धीरे उसके फॉलोवर बढ़ने लगे. दीक्षित ने अपना आश्रम कोलकाता, दिल्ली, जम्मू, कर्नाटक के कई गांवों में में भी बना लिया. यहां वो सिर्फ महिला अनुयायियों को अपने आश्रम में रहने देता. पुलिस के रिकॉर्ड की मानें तो उसके 100 से भी ज्यादा छोटे-बड़े आश्रम हैं.

कोलकाता में लगा पहले यौन शोषण का आरोप
साल 1998 में कथित बाबा के खिलाफ कोलकाता के एक पिता ने रेप केस दर्ज करवाया. उनका आरोप था कि दीक्षित ने अपने कंपिल विश्वविद्यालयमें उनकी बेटी को नशा देकर उससे रेप किया. इसके बाद तीन और केस हुए. लेकिन 4 महीनों की कैद के बाद वो जेल से बाहर आ गया और अपना कारोबार बढ़ाता चला गया.

सोशल मीडिया पर करने लगा प्रचार
कथित तौर पर दीक्षित के पास आईटी सेल जैसा स्ट्रक्चर है, जो उसके प्रवचन रिकॉर्ड करता और यूट्यूब पर डालता. धीरे-धीरे फॉलोवर बढ़ने लगे. दीक्षित लड़कियों को टारगेट करता. वो कहता कि जल्द ही दुनिया में कयामत आने वाली है. सब खत्म हो जाएगा और वही बाकी रहेंगे, जो विश्वविद्यालयमें बाबा के साथ रहते हैं.

लड़कियों से विश्वविद्यालय में आने के बाद एक एफिडेविट नुमा कोई चीज साइन कराई जाती, जिसमें लिखा होता कि वे अपनी मर्जी से खुद को बाबा को सौंप रही हैं. करार में कई दूसरी बातें भी लिखी होती हैं, जिनके बारे में विश्वविद्यालय में छापे के बाद बाहर आई कुछ लड़कियों ने कही थी. ये लड़कियां वहां ड्रेस कोड में रहती थीं. हल्की गुलाबी साड़ी के साथ चमकीली बिंदी लगाई जाती.

सबसे अजीब होता था, आश्रम का स्ट्रक्चर और माहौल
भरी-पूरी कॉलोनी में बनी इन इमारतों में कोई खिड़की नहीं होती थी, जो बाहर की तरफ खुले. सामने लोहे का काफी विशाल दरवाजा होता, जैसे किसी किले का दरवाजा हो. आसपास रहने वालों ने कई शहरों में कहा कि उन्होंने यहां रहने वाली लड़कियों को कभी नहीं देखा. आश्रम से बड़ी-बड़ी कारें बाहर निकलती या अंदर आया करतीं. भीतर रहती लड़कियां शायद ही कभी बाहर निकलती हों. वे बाबा के हवाले से दुनिया को खतरनाक और खत्म होने जा रहा बताती थीं.

रात 2 बजे उठकर बाबा की मुरली सुनती लड़कियां
विश्वविद्यालय की भीतरी दीवारों पर मुरली लिखी होती. यानी बाबा का वो ज्ञान, जो इन महिलाओं को दुनिया से बचाएगा. ज्यादातर बातें उन्हें कंट्रोल करने पर होतीं, जैसे जोर से हंसना भी एक तरह का विकार है. या साज-सज्जा कोढ़ की तरह है, जो शरीर के साथ दिमाग को भी खा जाती है. लड़कियां रात में दो बजे उठकर बाबा की मुरली सुनतीं. वे इसे अमृत बेला कहती थीं.

आश्रम की फंडिंग कहां से आ रही?
दिल्ली और कोलकाता में छापों के बाद हाई कोर्ट ने साल 2022 में ही कहा कि दीक्षित की फरारी के बाद भी आश्रम कैसे चल रहा है, वहां पैसे कहां से आ रहे हैं, इसका पता लगाया जाए. हालांकि कुछ भी पता नहीं लगा. घर से बागी होकर भागी लड़कियों का कहना था कि उनके घरवाले भटके हुए हैं, लेकिन वे सही रास्ते आ चुकी हैं.

अमेरिका में रह रहे एक माता-पिता अपनी बेटी को तलाशते दिल्ली के रोहिणी विश्वविद्यालय पहुंचे तो उसने उनसे मिलने से भी इनकार कर दिया. बाहर निकलकर पिता ने नशा देकर बेटी का ब्रेनवॉश करने का आरोप दीक्षित पर लगाया. अब भी रेप, ड्रग्स देने और मारपीट जैसे कई केस कथित बाबा पर चल रहे हैं.

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