नई दिल्ली,
अमेरिकी कांग्रेस के संयुक्त सत्र में पीएम मोदी के संबोधन से पहले अमेरिकी डेमोक्रेटिक पार्टी की दो मुस्लिम महिला सांसद इल्हान उमर और रशीदा तलीब ने पीएम मोदी के संबोधन का बहिष्कार करने का ऐलान किया है. दोनों मुस्लिम सांसदों ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने भारत में अल्पसंख्यकों का दमन किया है.
डेमोक्रेटिक सांसद के इस आरोप पर भारत के राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष आतिफ रशीद ने पलटवार करते हुए कहा कि आप अपने नफरती एजेंडे के तहत भारत की गलत छवि दिखा रही हैं. उन्होंने कहा, “मैं भारत के अल्पसंख्यक समुदाय से आता हूं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भारत में अपनी धार्मिक स्वतंत्रता और धार्मिक पहचान के साथ स्वतंत्र रूप से रहता हूं. यहां के प्रत्येक संसाधन में मेरी बराबर की हिस्सेदारी है. मुझे भारत में वह आजादी मिली है कि मैं जो बोलना चाहता हूं, बोलता हूं. आप जहर उगलना बंद करें.”
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के निमंत्रण पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्तमान में तीन दिवसीय अमेरिकी यात्रा पर हैं. पीएम मोदी की यह पहली अमेरिकी राजकीय यात्रा है. यात्रा के दौरान पीएम मोदी आज यानी 22 जून को अमेरिकी सदन के दोनों सदनों को संयुक्त रूप से संबोधित करेंगे.
दो मुस्लिम डेमोक्रेटिक सांसदों ने संबोधन का बहिष्कार करने का किया एलान
पीएम मोदी के संबोधन से पहले डेमोक्रेटिक सांसद इल्हान उमर ने ट्वीट करते हुए लिखा, ” प्रधानमंत्री मोदी की सरकार ने धार्मिक अल्पसंख्यकों का दमन किया है और हिंसक हिंदू राष्ट्रवादी समूहों को प्रोत्साहित किया है. मोदी सरकार ने पत्रकारों, मानवाधिकारों और वकीलों को निशाना बनाया है. इसलिए मैं मोदी के भाषण में शामिल नहीं होऊंगी. मैं नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के दौरान हुए दमन और हिंसा के रिकॉर्ड पर चर्चा करने के लिए मानवाधिकार समूहों के साथ एक ब्रीफिंग करूंगी.
वहीं, रशीदा तलीब ने ट्वीट करते हुए लिखा, “यह बहुत ही शर्मनाक है कि नरेंद्र मोदी को हमारे देश (अमेरिका) की राजधानी में बोलने के लिए मंच दिया गया है. नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में मानवाधिकारों के हनन, अलोकतांत्रिक कार्यों, मुसलमानों और धार्मिक अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने का एक लंबा रिकार्ड रहा है. मैं संसद में मोदी के संयुक्त संबोधन का बहिष्कार करूंगी.”
आतिफ रशीद ने किया पलटवार
इल्हान उमर और रशीदा तलीब के आरोपों पर राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष आतिफ रशीद ने पलटवार करते हुए कहा, ” मैं भारत के अल्पसंख्यक समुदाय से आता हूं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भारत में अपनी धार्मिक स्वतंत्रता और धार्मिक पहचान के साथ स्वतंत्र रूप से रहता हूं. भारत में मुझे यह आजादी है कि जो मुझे लिखना होता है, मैं लिखता हूं. मुझे यह कहते हुए दुख हो रहा है कि आप अपने नफरत के एजेंडे के तहत मेरे भारत की गलत तस्वीर दिखा रही हैं.”उन्होंने आगे कहा कि यहां के प्रत्येक संसाधन में मेरी बराबर की हिस्सेदारी है. मुझे भारत में वह आजादी मिली है कि मैं जो बोलना चाहता हूं, बोलता हूं. आप जहर उगलना बंद करें.
75 प्रतिनिधियों ने लिखा था बाइडेन को पत्र
पीएम मोदी के दोनों सदनों के संयुक्त सत्र को संबोधित करने से पहले 75 यूएस सांसदों और कांग्रेस प्रतिनिधियों ने राष्ट्रपति बाइडेन को पत्र लिखकर कहा था कि वो भारत-अमेरिका के संबंधों को मजबूत करने के लिए काम करें लेकिन साथ ही पीएम मोदी से मुलाकात के दौरान चिंता के कुछ विषयों पर भी चर्चा करें.
मंगलवार को लिखे इस पत्र में सांसदों ने अमेरिकी विदेश विभाग और सिविल सोसाइटी की रिपोर्टों का हवाला देते हुए राष्ट्रपति से कहा कि वो पीएम मोदी से बातचीत में भारत में ‘पॉलिटिकल स्पेस के कम कम होने, धार्मिक असहिष्णुता के बढ़ने, सिविल सोसाइटी संगठनों और पत्रकारों को निशाना बनाने, प्रेस और इंटरनेट पर बढ़ते प्रतिबंधों’ का मुद्दा उठाएं.
