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Monday, March 9, 2026
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यूक्रेन युद्ध में मोदी सरकार ने नेहरू की नीति अपनाकर भारत को किया मालामाल, तकता रह गया अमेरिका

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वॉशिंगटन/मास्‍को/नई दिल्‍ली

यूक्रेन युद्ध के बीच रूस से तेल मंगाने को लेकर भारत पश्चिमी देशों के निशाने पर है। यूरोपीय यूनियन से लेकर अमेरिका तक भारत को घेरने की कोशिश कर रहे हैं। पिछले दिनों विदेश मंत्री जयशंकर ने यरोपीय यूनियन को रूसी तेल के निर्यात के मुद्दे पर धो डाला था। अब अमेरिकी अखबार न्‍यूयॉर्क टाइम्‍स ने शिपिंग के डेटा के आधार पर खुलासा किया है कि भारत यूक्रेन युद्ध में पंड‍ित नेहरू की गुटनिरपेक्षता की नीति पर बना रहा। उसकी इस नीति का फायदा यह हुआ है कि उसने रूसी तेल से जमकर पैसा कमाया है। भारत ने यूक्रेन युद्ध का समर्थन कर रहे पश्चिमी देशों और रूस के बीच दोनों से ही रणनीतिक आर्थिक संबंध बरकरार रखे हैं जो उसे फायदा दे रहे हैं।

दरअसल, अमेरिका, यूरोप और अन्‍य देशों रूस के खिलाफ कई कड़े प्रतिबंध लगाए हैं। इन देशों का उद्देश्‍य प्रतिबंधों के जरिए रूस को घुटनों पर लाना था। यही नहीं पश्चिमी देशों ने रूसी तेल पर प्राइस कैप भी लगा दिया। न्‍यूयॉर्क टाइम्‍स की रिपोर्ट के मुताबिक इस सस्‍ते तेल को अब नया बाजार जैसे भारत मिल गया है जो अब रूस से 20 लाख बैरल तेल प्रतिदिन खरीद रहा है। अंतरराष्‍ट्रीय ऊर्जा एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक यह भारत के कुल तेल आयात का 45 प्रतिशत है। इसने न केवल भारत की अर्थव्‍यवस्‍था को मजबूत किया बल्कि रूस के सस्‍ते तेल ने भारत को तेल साफ करने का बेहद लाभदायक बिजनस भी दे दिया।

भारत को बेहद सस्‍ता मिल रहा रूसी तेल
रिपोर्ट के मुताबिक इस रिफाइन किए गए तेल की दुनिया के अन्‍य हिस्‍सों में सख्‍त जरूरत थी। इसमें यूरोपीय संघ भी शामिल था जिसने रूस से सीधे तेल खरीदने पर बैन लगा दिया था। पीएम मोदी ने रूस-यूक्रेन युद्ध में एक तटस्‍थ रुख अपनाया है। अमेरिकी राष्‍ट्रपति जो बाइडन के साथ मुलाकात में रूस का मुद्दा उठा है। अमेरिका की कोशिश है कि भारत रूस से अपने संबंधों को कम करे जिसमें रक्षा और ऊर्जा शामिल है। भारत ने अभी इसको खास तवज्‍जो नहीं दी है। मात्र एक साल में भारत जो बहुत कम रूसी तेल खरीदता था, वह अब समुद्र के रास्‍ते भेजे जाने वाले रूसी तेल का आधा खरीदता है।

स्टेट डिनर में पीएम मोदी और बाइडन ने क्या कुछ कहा सुनिए
रूस दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उत्‍पादक देश है। रूस का कुछ तेल पाइपलाइन से भेजा जाता है। इसके गंतव्‍य स्‍थान को आसानी से बदला नहीं जा सकता है। लेकिन टैंकर्स के तेल को आसानी से एक-जगह से दूसरी जगह भेजा जा सकता है। यह चीन और भारत जा रहा है जिन्‍होंने मई में समुद्र के रास्‍ते भेजे जाने वाले तेल का 80 फीसदी खरीदा है। तेल की गिरती कीमतों के बीच में भारत ने इस स्थिति का फायदा उठाया है। भारत को अब सस्‍ते दर पर आसानी से रूसी तेल मिल जा रहा है जो पहले खाड़ी देशों से ज्‍यादा तेल खरीदता था। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत को रूसी तेल 51 डॉलर प्रति बैरल मिल रहा है।

यूरोप को तेल निर्यात कर रही हैं भारतीय कंपनियां
र‍िपोर्ट के मुताबिक इससे अरबों डॉलर की बचत हो रही है। भारत रूस से सस्‍ता तेल कर उसे रिफाइन कर रहा है और फिर उसे बाजार दर यूरोप को निर्यात कर रहा है। इससे भी काफी फायदा भारत की कंपनियों को हो रहा है। यूरोप के नियमों के मुताबिक किसी दूसरे देश से तेल लेकर निर्यात करना गैरकानूनी नहीं है। ऐसे में यूरोपीय देश चाहकर भी कुछ नहीं कर पा रहे हैं। इससे भारत का विदेशी मुद्राभंडार भी बढ़ रहा है।

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