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Friday, May 15, 2026
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छोटी चिप ने दिया बड़ा दर्द! चाहकर भी चीन को नहीं छोड़ पा रहा है अमेरिका

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नई दिल्ली

दुनिया की दो बड़ी ताकतों अमेरिका और चीन के बीच लंबे समय से तनाव चल रहा है। लेकिन अमेरिका चाहकर भी चीन नहीं छोड़ पा रहा है। दोनों देशों के रिश्तों को सामान्य बनाने के लिए अमेरिकी की वित्त मंत्री जेनेट येलेन आजकल चीन के दौरे पर है। अमेरिका और चीन के संबंधों में आई खटास से सबसे ज्यादा नुकसान सेमीकंडक्टर बनाने वाली कंपनियों को हुआ है। दोनों देशों ने एकदूसरे की कंपनियों पर तरह-तरह की पाबंदियां लगाई हैं। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि चीन के मिलिट्री और सर्विलांस प्रोग्राम्स में अमेरिकी प्रॉडक्ट्स लगाए गए हैं। इसलिए चिप्स और चिपमेकिंग इक्विपमेंट को चीन भेजने पर सख्त पाबंदी लगाई गई है। अमेरिका चाहता है कि इन्हें देश में ही बनाया जाए। इसके लिए कंपनियों का तगड़ा इंसेटिव भी दिया जा रहा है। लेकिन अमेरिका कंपनियों के लिए ऐसा करना आसान नहीं है।

चीन अमेरिका की चिप कंपनियों के लिए बड़ा मार्केट है। इसकी वजह यह है कि वहां बड़ी संख्या में ऐसे प्रॉडक्ट्स बनाए जाते हैं जिनमें सेमीकंडक्टर यानी चिप का व्यापक इस्तेमाल होता है। इनमें स्मार्टफोन, डिशवॉशर्स, कार और कंप्यूटर शामिल हैं। इनका पूरी दुनिया में एक्सपोर्ट होता है। दुनिया में सेमीकंडक्टर की कुल बिक्री में चीन का एक तिहाई योगदान है। लेकिन अमेरिका की कुछ कंपनियों का 60 से 70 फीसदी रेवेन्यू चीन से ही आता है। कई कंपनियां तो अमेरिका में चिप बना रही हैं लेकिन एसेंबलिंग और टेस्टिंग के लिए इन्हें चीन भेजा जाता है। अमेरिका में इसके लिए नई फैक्ट्रीज लगाने में काफी साल लग जाएंगे। यानी सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री काफी हद तक चीन पर निर्भर है।

क्या है मजबूरी
मई में अमेरिका की चिपमेकर कंपनी माइक्रोन टेक्नोलॉजीज पर चीन की सरकार ने बैन लगा दिया था। उसका कहना था कि कंपनी साइबर सिक्योरिटी रिव्यू में फेल रही। कंपनी का कहना है कि इस बैन से उसका करीब 12 परसेंट रेवेन्यू खत्म हो जाएगा। जून में कंपनी ने चीन में अपना निवेश बढ़ाने की घोषणा की। कंपनी शियान शहर में 60 करोड डॉलर के निवेश से एक चिप पैकेजिंग फैसिलिटी बनाएगी। यह इस बात का सबूत है कि अमेरिका की कंपनियां चाहकर भी चीन को नहीं छोड़ सकती हैं। खासकर चिप इंडस्ट्री के लिए चीन के साथ संबंध बनाए रखना मजबूरी है। यही वजह है कि अमेरिका भी चीन के साथ रिश्तों को सामान्य बनाने के लिए जोर दे रहा है।

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