कोलकाता
पश्चिम बंगाल में यह एक ऐसा चुनाव था, जिसे लोकसभा से पहले लिटमस टेस्ट कहा जा रहा था। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए लोकसभा से पहले पंचायत की परीक्षा पास करना अहम था। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस ने छप्परफाड़ जीत हासिल की है। वैसे खूनखराबे और भारी हिंसा के लिए भी इस चुनाव को याद रखा जाएगा। फिर भी टीएमसी ने पंचायत चुनाव में बाकी विपक्षी पार्टियों का सूपड़ा साफ कर दिया है। नतीजों को देखें तो बीजेपी के मुकाबले टीएमसी को चार गुना ज्यादा सीटें मिली हैं। यानी पंचायत चुनाव में तगड़ा पंच लगाते हुए ममता बनर्जी बंगाल में फिर ‘सरपंच’ बनी हैं।
ग्राम पंचायत में इतनी सीटों पर आगे टीएमसी
पश्चिम बंगाल में 8 जुलाई को ग्राम पंचायत 63229, पंचायत समिति की 9730 और जिला परिषद की 928 सीटों के लिए चुनाव हुआ। ग्राम पंचायत चुनाव के नतीजों में ममता बनर्जी की टीएमसी ने बंपर विजय हासिल की है। पश्चिम बंगाल के ग्राम पंचायत चुनाव में टीएमसी ने सभी दलों को बड़ा झटका दिया है। अब तक मिले रुझानों और नतीजों में टीएमसी ने 29709 सीटों पर बढ़त बनाई है। ग्राम पंचायत की 44903 सीटों के रुझान आ चुके हैं। बीजेपी 7913 सीटों के साथ दूसरे नंबर पर बनी हुई है। सीपीएम को 2753 और कांग्रेस को 2072 सीटों पर बढ़त मिली है। वहीं अन्य दलों के कैंडिडेट 2456 सीटों पर आगे चल रहे हैं। इसके अलावा पंचायत समिति के अब तक आए 1956 रुझानों में टीएमसी 1601 सीटों पर आगे है। बीजेपी 167 और सीपीएम को 57 सीटों पर बढ़त मिली है।
12,518 सीटों पर जीती टीएमसी: राज्य निर्वाचन आयोग
राज्य निर्वाचन आयोग से दोपहर साढ़े तीन बजे तक मिले आंकड़ों के मुताबिक सत्तारूढ़ टीएमसी ने 63,229 ग्राम पंचायतों में से 12,518 सीटों पर जीत दर्ज कर ली है। राज्य निर्वाचन आयोग के मुताबिक टीएमसी की निकटतम प्रतिद्वंद्वी बीजेपी ने 2,781 सीट पर जीत दर्ज की है। वाम मोर्चा ने 959 सीटें जीती हैं, जिनमें से अकेले मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) ने 910 सीट पर जीत दर्ज की है। वहीं चौथे नंबर पर चल रही कांग्रेस ने 625 सीटों पर जीत दर्ज की है। निर्वाचन आयोग के मुताबिक नवगठित इंडियन सेकुलर फ्रंट (आईएसएफ) सहित अन्य पार्टियों ने 219 सीटों पर जीत दर्ज की है। तृणमूल कांग्रेस के बागियों सहित निर्दलीय ग्राम पंचायत की 718 सीटों पर जीते हैं।
पंचायत समिति-जिला परिषद में भी टीएमसी को बढ़त
अभी पंचायत समिति और जिला परिषद की कम सीटों के आंकड़े सामने आए हैं लेकिन इससे जो सीन बन रहा है उसमें भी टीएमसी काफी आगे है। पंचायत समिति की 176 सीटों के रुझानों और नतीजों में टीएमसी ने 162 सीटों पर बढ़त बनाई है। वहीं बीजेपी 8 और सीपीएम 6 सीटों पर आगे है। इसके अलावा जिला परिषद की 33 सीटों के मिले रुझानों में टीएमसी ने 29 सीटों पर बढ़त बनाई है। बीजेपी और सीपीएम को जिला परिषद की दो-दो सीटों पर बढ़त हासिल हुई है।
2018 में क्या रहा था नतीजा
2018 के पंचायत चुनाव में भी टीएमसी ने बड़ी जीत दर्ज की थी। ममता बनर्जी की पार्टी को 90 प्रतिशत सीटों पर जीत हासिल हुई थी। ऐसे में इस बार के चुनाव पार्टी के लिए लोकसभा चुनाव से पहले परीक्षा की तरह थे। राज्य में लोकसभा की 42 सीटें हैं। 2018 के पंचायत चुनाव के एक साल बाद हुए लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने 18 सीटें जीती थीं। ऐसे में इस बार के पंचायत चुनाव से बीजेपी उम्मीदें लगाए बैठी थी। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार और सुवेंदु अधिकारी ने पूरी ताकत झोंक रखी थी। ऐसे में बीजेपी के लिए इस चुनाव में हार को एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है।
बंगाल में लोकतंत्र की हत्या: बीजेपी
बीजेपी का आरोप है कि बंगाल में लोकतंत्र की हत्या हुई है। संबित पात्रा ने चुनाव नतीजों के बीच प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा, ‘बंगाल में लोकतंत्र की हत्या हो रही है। पंचायत चुनाव में नामांकन के बाद अब तक 45 लोगों की हत्या हो चुकी है। चुनाव में अभूतपूर्व हिंसा के लिए टीएमसी का धन्यवाद।’
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने कहा, ‘तृणमूल कांग्रेस के गुंडे बीजेपी और अन्य विपक्षी दलों के मतगणना एजेंट को मतगणना केंद्रों में प्रवेश करने से रोककर जनमत की चोरी करने का प्रयास कर रहे हैं। मतगणना एजेंटों को केंद्रों में जाने से रोका जा रहा है और बमबाजी कर उन्हें धमकाया जा रहा है।’
बीजेपी के आरोपों को खारिज करते हुए टीएमसी प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा, ‘हार की आशंका की वजह से वे आधारहीन आरोप लगा रहे हैं। जनता द्वारा खारिज किए जाने के बाद शर्मनाक हार का आभास होने पर बीजेपी अपनी संगठनात्मक अक्षमता छिपाने की आखिरी कोशिश कर रही है।’
