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Wednesday, April 29, 2026
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‘मोदी सरनेम’ मामले में SC ने गुजरात सरकार और पूर्णेश मोदी से 10 दिन में मांगा जवाब, अब 4 अगस्त को सुनवाई

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नई दिल्ली,

मोदी सरनेम मामले में दोषी करार दिए गए कांग्रेस नेता राहुल गांधी की याचिका पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. राहुल ने गुजरात हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी है. जस्टिस बी आर गवई और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की बेंच ने इस मामले में गुजरात सरकार, पूर्णेश मोदी और अन्य पक्षकारों को नोटिस जारी कर दस दिनों में जवाब देने को कहा है. वहीं पूर्णेश मोदी के वीकल महेश जेठमलानी ने कहा कि मुझे जवाब दाखिल करने के लिए 3 हफ्ते का वक्त चाहिए. इस पर जस्टिस गवई ने कहा- मैं नहीं समझता कि जवाब उत्तर दाखिल करने की जरूरत है. कोर्ट का ऑर्डर 150 पेज का है. अब इस मामले में चार अगस्त को अगली सुनवाई होगी.

राहुल गांधी के वकील अभिषेक मनू सिंघवी ने सुनवाई के दौरान कहा कि राहुल ने मौजूदा संसद सत्र समेत संसद के 122 दिन गंवा दिए हैं. चुनाव आयोग किसी भी समय वायनाड चुनाव को अधिसूचित कर सकता है. कृपया मुझे अंतरिम रोक दें या सुनवाई के लिए यथासंभव कम से कम तारीख दें. इस जस्टिस गवई कहते हैं कि मेरे पिता वह 40 साल तक कांग्रेस से जुड़े रहे, वह सांसद रहे, मेरा भाई अभी भी कांग्रेस में है। अब आप फैसला करें कि मुझे इस मामले की सुनवाई करनी चाहिए या नहीं.

2019 में चुनाव प्रचार के दौरान दिया था बयान
राहुल गांधी ने कर्नाटक के कोलार में 13 अप्रैल 2019 को चुनावी रैली में कहा था, ”नीरव मोदी, ललित मोदी, नरेंद्र मोदी का सरनेम कॉमन क्यों है? सभी चोरों का सरनेम मोदी क्यों होता है?’ राहुल के इस बयान को लेकर बीजेपी विधायक और पूर्व मंत्री पूर्णेश मोदी ने उनके खिलाफ धारा 499, 500 के तहत आपराधिक मानहानि का केस दर्ज कराया था. अपनी शिकायत में बीजेपी विधायक ने आरोप लगाया था कि राहुल ने 2019 में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए पूरे मोदी समुदाय को कथित रूप से यह कहकर बदनाम किया कि सभी चोरों का सरनेम मोदी क्यों होता है?

सूरत की सेशन कोर्ट ने 23 मार्च को राहुल गांधी को आपराधिक मानहानि के मामले में दोषी करार दिया था. इसके साथ ही उन्हें दो साल की सजा सुनाई गई थी. इसके बाद राहुल ने गुजरात HC में याचिका लगाकर निचली अदालत के फैसले पर रोक लगाने की मांग की थी.

याचिका खारिज होने पर राहुल ने गुजरात हाईकोर्ट के दोष पर रोक लगाने से इनकार करने वाले फैसले के खिलाफ केस किया है. सूरत की सेशन कोर्ट ने 23 मार्च को राहुल गांधी को आपराधिक मानहानि मामले में दोषी करार दिया था, साथ ही दो साल की सजा भी सुनाई थी. निचली अदालत ने राहुल को जमानत तो दे दी थी, लेकिन दोषी करार दिए जाने पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था.

दोष सिद्धि पर रोक ना लगने की वजह से राहुल गांधी की संसद सदस्यता रद्द हो गई थी. इस मामले में राहुल गांधी से पहले ही शिकायतकर्ता पूर्णेश मोदी ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल कर दिया था. पूर्णेश मोदी ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि बिना उनका पक्ष को सुने कोर्ट कोई आदेश पारित ना करे.

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