भोपाल
न्यूनतम वेतन अधिनियम 1948 की धारा 3 के अनुसार 5 वर्ष के अंदर न्यूनतम वेतन का पुनरीक्षण करना अनिवार्य है। लेकिन मध्य प्रदेश में 9 वर्ष की अवधि समाप्त होने को है फिर भी अभी तक न्यूनतम वेतन का पुनरीक्षण नहीं किया गया जबकि दूसरा पुनरीक्षण किया जाना अपेक्षित हो गया है। क्या प्रदेश सरकार आगामी अवधि में जब भी न्यूनतम वेतन का पुनरीक्षण करेगी तब दो बार पुनरीक्षण के बराबर अनुपात में प्रदेश के श्रमिकों के वेतन में बढ़ोत्तरी करेगी?
अपेक्षा तो यही है किंतु सरकार द्वारा न्यायोचित और व्यावहारिक निर्णय इस संबंध में लिया जाएगा इसकी उम्मीद अभी तक के सरकार के निर्णयों के आधार पर बिल्कुल नहीं है। प्रदेश में वर्ष 2014 में न्यूनतम वेतन का पुनरीक्षण किया गया था और 2019 में 5 वर्ष की अवधि के अंदर पुन: पुनरीक्षण अनिवार्य हो गया था। वर्ष 2019 में न्यूनतम वेतन के पुनरीक्षण हेतु न्यूनतम वेतन सलाहकार समिति की बैठक की जाकर वेतन पुनरीक्षण का निर्णय ले लिया गया था लेकिन अभी तक पुनरीक्षण की कार्यवाही विलंबित रखी गई है। यदि करोना काल का अवरोध आया होगा तब भी करोना के बाद लंबे समय से सामान्य काल चल रहा है।
प्राप्त जानकारी अनुसार अब पुनरीक्षण कार्यवाही को अंतिम रूप देने की पहल पुन: प्रारंभ की गई है लेकिन 4 वर्ष पूर्व सलाहकार समिति द्वारा लिये गये निर्णय पर लंबे समय तक प्रारंभिक और अंतिम अधिसूचना की सरकार द्वारा कार्यवाही नहीं करने से अब यदि श्रमिकों के वेतन का पुनरीक्षण किया जाना है तो नये रूप में पुन: न्यूनतम वेतन सलाहकार समिति की राय लिया जाना अनिवार्य है।
प्रदेश के श्रमिकों का 9 वर्ष उपरांत भी सरकार द्वारा वेतन पुनरीक्षण नहीं किये जाने से श्रमिकों को वास्तविक वेतन से कम वेतन प्राप्त हो रहा है जो श्रमिकों के प्रति अन्याय के साथ साथ सरकार के अनुदार व्यवहार का द्योतक है। सरकार के श्रमिकों के प्रति इस रवैए से प्रदेश के श्रमिकों में भारी असंतोष और आक्रोश है। अतएव सरकार द्वारा शीघ्रातिशीघ्र न्यूनतम वेतन सलाहकार की बैठक बुलाकर न्यायोचित और व्यावहारिक वेतन पुनरीक्षण की कार्यवाही की जावे अन्यथा प्रदेश के श्रमिक सड़कों पर आंदोलन के लिए विवश होंगे।
