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माननीय सुप्रीम कोर्ट! हम आपसे विनम्रतापूर्वक असहमत है! AAP नेता ने क्यों कही ये बात, जानें पूरा मामला

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नई दिल्ली

दिल्ली आबकारी नीति घोटाले में सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया की जमानत याचिका को खारिज कर चुकी है। शीर्ष अदालत के इस फैसले को लेकर आम आदमी पार्टी की तरफ से सवाल उठाए जा रहे हैं। इस क्रम में पार्टी नेता और तिमारपुर से विधायक दिलीप पांडे ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पूरी तरह से असहमति जताई है। दिलीप पांडे ने शीर्ष अदालत के फैसले को पूरी तरह से हैरान करने वाला बताया। पांडे ने अदालत की तरफ से सिसोदिया की जमानत खारिज करने के पीछे जो तर्क को लेकर भी सवाल उठाए हैं।

338 करोड़ रुपये का जिक्र कहां से आया?
दिलीप पांडे का कहना है कि जमानत याचिका निरस्त करने के पीछे जो कारण दिए गए हैं, वह कतई तर्कसंगत न तो लगता है और न ही है। न्याय होना ही नहीं चाहिए, बल्कि न्याय होते हुए दिखना भी चाहिए। लेकिन फैसले से न्यायिक प्रक्रिया पर प्रश्न उठना वाजिब है। उन्होंने कहा कि मामले में जिस 338 करोड़ रुपए की बात हो रही है, इसका जिक्र सुनवाई के दौरान न तो प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और ना ही केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने किया है। AAP विधायक ने कहा कि ना ही मामले से संबंधित वकीलों ने कोई आरोप लगाया हैं। इस रहस्यमयी राशि का किसी भी कानूनी दस्तावेज में कोई उल्लेख नही है। अचानक हुए इस रहस्योद्घाटन ने कानून के जानकारों को भी चौंका दिया है।

सिसोदिया के खिलाफ सबूत नहीं
AAP विधायक ने कहा कि जमानत याचिका पर सुनवाई के पहले से पंद्रहवें दिन तक सुप्रीम कोर्ट लगातार जांच एजेंसियों को कटघरे में खड़ी करती रही। यहां तक कह दिया कि प्रथम दृष्टया सिसोदिया जी के खिलाफ किसी तह का पुख्ता सबूत नहीं है। पांडे ने कहा कि आखिरा ऐसा क्या हुआ कि फैसले वाले दिन माननीय जस्टिस, सुनवाई के दौरान जो कुछ भी उनका ऑब्जरवेशन था, उससे पलट जाते हैं और कह देते है कि ऐसा प्रतीत होता है कि 338 करोड़ का अतिरिक्त मुनाफा हुआ है। इसी आधार पर जमानत याचिका खारिज खारिज की जाती है। इससे कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े होते हैं-

सर्वोच्च न्यायालय उम्मीद की किरण
दिलीप पांडे ने कहा कि ऐसे वक्त में जब लोकतांत्रिक संस्थाओं से लोगों को भरोसा उठ रहा है, सर्वोच्च न्यायालय अंतिम उम्मीद की किरण है। उससे उम्मीद की जाती है कि वह वाह्य करको से प्रभावित हुए बिना ईमानदार फैसला देगा। लेकिन दुर्भाग्यवश मनीष सिसोदिया के जमानत मामले में जो फैसला आया, उससे मन में असंतोष भर दिया। उन्होंने कहा कि हम एक ऐसी लड़ाई लड़ रहे हैं जिसमें कोई भी भयवश सच के साथ खड़ा नहीं दिखाई दे रहा है।

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