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Wednesday, May 6, 2026
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जब राज्य सरकारें हमारे पास आती हैं… जानें राज्यपालों पर सुप्रीम कोर्ट क्यों हुआ इतना नाराज

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नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक बेहद अहम मामले की सुनवाई करते हुए राज्य के राज्यपालों को आत्ममंथन करने की सलाह दे डाली। दरअसल शीर्ष अदालत ने पंजाब सरकार की तरफ से दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान ये टिप्पणी की। चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने सुनवाई के दौरान तल्ख टिप्पणियां कीं। आइए समझते हैं कि आखिर शीर्ष अदालत इस मामले में इतने गुस्से में क्यों दिखा..

दरअसल, पंजाब सरकार ने अपनी याचिका में राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित पर अहम बिलों को लटकाने का लगाया आरोप लगाया है। इसी याचिका पर सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत भड़क उठा। कोर्ट ने कहा कि इस परिपाटी को रोकने की जरूरत है कि जब राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंचती है तभी राज्यपाल कार्रवाई करते हैं।

-सु्प्रीम कोर्ट यहीं नहीं रुका बल्कि राज्यपाल के ऐक्शन पर नाराजगी जताते हुए कहा कि विधानसभा में पास विधेयकों को मंजूरी दिलाने के लिए राज्य सरकार का सुप्रीम कोर्ट आना सही नहीं है। राज्यपाल को इस मामले में आत्मावलोकन करने की जरूरत है।

-चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि आखिर याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट क्यों आए हैं? राज्यपाल तभी कार्रवाई करते हैं जब मामला शीर्ष अदालत पहुंच जाता है। ये सब रुकना चाहिए। जब कोई सुप्रीम कोर्ट आता है तब राज्यपाल काम करना शुरू करते हैं। ये तो नहीं होना चाहिए।
राज्यपालों को अपने अंदर झांकना चाहिए… आखिर क्या हुआ कि सुप्रीम कोर्ट ने कह दी इतनी बड़ी बात!

-चीफ जस्टिस ने कहा कि तेलंगाना के मामले में भी यही हुआ। राज्यपाल ने वहां तब कार्रवाई की जब राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

-चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि राज्यपालों को यह समझना चाहिए कि वे जनता के चुने हुए प्रतिनिधि नहीं हैं। वो किसी बिल को कुछ समय के लिए रोककर इसे वापस कर सकते हैं। चीफ जस्टिस ने कहा कि पंजाब विधानसभा 22 मार्च 2023 को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित की जाती है। इसके बाद बिना किसी नोटिस के विधानसभा की बैठक 3 महीने बाद आहूत कर ली जाती है। उन्होंने पूछा कि क्या ये संवैधानिक है? साथ ही कोर्ट ने कहा कहा कि मुख्यमंत्री और राज्यपाल को आत्मावलोकन करना चाहिए।

-पंजाब के राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित ने राज्य की आप सरकार द्वारा पारित 27 में से केवल 22 बिल को ही अपनी मंजूरी दी है। मौजूदा तनाव राज्यपाल और भगवंत मान सरकार में तीन धन विधेयकों को लेकर बढ़ा। राज्य सरकार ने 20 अक्टूबर को बुलाए जाने वाले विशेष बजट सत्र से पहले इन 3 विधेयक को मंजूरी के लिए राज्यपाल को भेजा था। लेकिन राज्यपाल ने इन विधेयकों को अपनी मंजूरी रोक ली। राज्यपाल ने कहा कि चूंकि बजट सत्र 20 जून को ही खत्म हुआ है ऐसे में इस तरह के एक्सटेंडेंड सत्र गैरकानूनी है। राज्यपाल के फैसले के कारण विधानसभा सत्र को 20 अक्टूबर को शुरू होने से पहले ही स्थगित करना पड़ा था।

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