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Wednesday, May 6, 2026
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सोशल मीडिया पर नेहरू के बारे में फैलाए जाने वाले 5 झूठ और उसकी सच्चाई

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नई दिल्ली

14 नवंबर को देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की जयंती है। इस दिन को बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह के अफवाहें फैलाई जाती है। सोशल मीडिया पर नेहरू के दादा को मुस्लिम बताए जाने, गांधी जी की हत्या में शामिल होने से लेकर उन्हें इतिहास में सबसे अय्याश आदमी बताए जाने को लेकर कई तरह के खबरें चलाई जाती हैं। नेहरू की जयंती पर जानते हैं नेहरू से जुड़े 5 झूठ और उनके सच के बारे में।

1. नेहरू के दादा मुसलमान थे
सोशल मीडिया पर अक्सर इस तरह की खबरें मिल जाएंगी कि नेहरू के दादा मुस्लिम थे। उनका नाम गियासुद्दीन गाजी था। गाजी मुगलों के कोतवाल थे। बाद में उन्होंने अपना नाम बदलकर गंगाधर नेहरू रख लिया था। जबकि बीआर नन्दा की किताब ‘द नेहरूज’ में जवाहर लाल नेहरू की वंशावली का जिक्र गया है। इसमें जवाहर लाल के पूर्वजों का मूल उपनाम ‘कौल’ था। मोतीलाल नेहरू के पूर्वज कश्मीर से आकर दिल्ली में बस गए थे। नेहरू के दादा गंगाधर 1857 विद्रोह के समय दिल्ली में पुलिस ऑफिसर थे। कौल उपनाम की जगह नेहरू उपनाम अपनाने को लेकर कई बातें कही जाती हैं। शशि थरूर की किताब ‘नेहरू’ के अनुसार जवाहरलाल के पुरखे एक नहर के बगल में रहते थे इसलिए उनके नाम के आगे नेहरू जुड़ गया।

2. सबसे अय्याश थे नेहरू
सोशल मीडिया पर कई ऐसे वीडियो और फोटो मिल जाएंगे जिसमें नेहरू को सबसे अय्याश आदमी बताने की कोशिश की गई है। सोशल मीडिया नेहरू के कई स्त्रियों से प्रेम संबंध की बात कही जाती है। अमेरिका के राष्ट्रपति कैनेडी की पत्नी और मृणालिनी साराभाई के साथ उनकी तस्वीरों का इस्तेमाल देश के प्रथम प्रधानमंत्री की छवि को धूमिल करने के लिए किया जाता है। हवाईअड्डे पर एक महिला को गले लगाते नेहरू की तस्वीर हो या फिर एक महिला के सिगरेट को जलाने में मदद करते नेहरू की तस्वीर। उस तस्वीर में नेहरू तत्कालीन डेप्युटी ब्रिटिश हाई कमिश्नर की पत्नी का सिगरेट जला रहे हैं। इस तस्वीर का गलत इस्तेमाल कर उन्हें अय्याश साबित करने की कोशिश की जाती है। नेहरू को चूमने वाली महिला की जो तस्वीर सोशल मीडिया पर अक्सर दिखती है। उस फोटो में महिला कोई विदेशी नहीं बल्कि नेहरू की बहन विजय लक्ष्मी पंडित की दूसरी बेटी नयनतारा सहगल है। नेहरू के एडिवना से संबंधों को लेकर भी तरह-तरह की बातें कही जाती हैं। इस संबंध में इतिहास की प्रोफेसर मृदुला मुखर्जी का कहना है कि नेहरू को लेकर जितनी भी गंभीर जीवनी हैं उनमें नेहरू और एडिवना के संबंधों को प्लेटोनिक (निष्काम या अशरीरी) बताया गया है।

3. नेहरू ने गांधी को मारा था
RSS के पूर्व सरसंघचालक केएस सुदर्शन ने दावा किया था कि नेहरू ने गांधी की हत्या की थी। सीनियर बीजेपी लीडर सुब्रमण्यम स्वामी ने भी गांधी की मौत को लेकर सवाल खड़े थे। स्वामी का कहना था कि गांधी की मौत के बाद उनके शव का पोस्टमार्टम क्यों नहीं कराया गया। हालांकि, सामने आया था कि गांधी जी का परिवार नहीं चाहता था कि उनके शव का पोस्टमार्टम हो। यहीं वजह थी कि उनकी मौत के बाद गांधी जी के शव को बिड़ला हाउस में रखवा दिया गया था। वहीं, गांधीजी के सबसे छोटे बेटे देवदास गांधी से मुलाकात में गोड़से ने कहा था कि मेरी वजह से आपने अपने पिता को खो दिया।

4. नेहरू और पटेल में दुश्मनी थी?
सोशल मीडिया पर कई ऐसी खबरें और पोस्ट मिल जाएंगी जिसमें नेहरू और पटेल को एक दूसरे का दुश्मन बताया जाता है। आरएसएस और बीजेपी की तरफ से इस संबंध में बातें कही जाती हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव के लिए प्रचार करते समय, पीएम मोदी ने दावा किया था कि जवाहरलाल नेहरू 1950 में मुंबई में सरदार वल्लभभाई पटेल के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हुए थे। न्यूज सेंट्रल 24×7 ने नेहरू के उस बयान का उल्लेख किया है जो उन्होंने संसद में दिया था। नेहरू ने कहा था कि वे (पटेल को) स्वतंत्रता के संघर्ष में हमारी सेनाओं के एक महान कप्तान के रूप में, मुसीबत के समय और जीत के क्षणों में हमें अच्छी सलाह देने वाले, एक मित्र और सहकर्मी के रूप में, जिस पर कोई हमेशा भरोसा कर सकता है, एक मीनार के रूप में याद किया जाएगा। यहां एक वीडियो है जो सरदार पटेल के अंतिम संस्कार में नेहरू जी की उपस्थिति को दर्शाता है।

5. नेहरू ने जनरल थिमैया का अपमान किया था
नेहरू को लेकर एक और बात सामने आती है कि उन्होंने जनरल थिमैया का अपमान किया था। पीएम मोदी ने भी अपने एक भाषण में इसको लेकर सवाल उठाए थे। पीएम मोदी ने अपने भाषण में कहा था कि कर्नाटक वीरता का पर्याय है, लेकिन कांग्रेस सरकारों ने फील्ड मार्शल करिअप्पा और जनरल थिमैया के साथ कैसा व्यवहार किया? पीएम ने कहा था कि इतिहास में इस बात का सबूत है कि 1948 में पाकिस्तान को हराने के बाद जनरल थिमैया का पीएम नेहरू और रक्षा मंत्री कृष्ण मेनन ने अपमान किया था। जबकि सच्चाई ये है कि जनरल थिमैया 1957 में सेना प्रमुख बने। वहीं, वीके कृष्ण मेनन भी 1957 में रक्षा मंत्री बने थे। शिव कुमार वर्मा की किताब 1962 The War That Wasn’t में जनरल थिमैया के 1959 में इस्‍तीफा देने की घटना का विस्‍तार से जिक्र किया गया है। किताब बताया गया है कि थिमैया ने रक्षा मंत्री मेनन से मुलाकात के बाद इस्तीफा दे दिया था। इस जानकारी के बाद प्रधानमंत्री पंडित नेहरू ने तत्‍काल उनको अपने पास बुलाया था। उन्होंने लंबी बातचीत के बाद देश हित में चीनी खतरे को देखते हुए इस्‍तीफा वापस लेने का आग्रह किया था। इसके बाद जनरल थिमैया ने इस्‍तीफा वापस ले लिया था।

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