काबुल
तालिबान शुरू से ही पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमा को मान्यता नहीं देता है। इसे डूरंड लाइन के नाम से जाना जाता है। डूरंड लाइन पर पाकिस्तान की तरफ से बाड़बंदी के दौरान तालिबान के साथ कई बार हिंसक झड़पें भी हो चुकी हैं। तालिबान शुरू से कहता है कि वह डूरंड लाइन को नहीं मानता है, वहीं पाकिस्तान इसे आधिकारिक सीमा रेखा बताता है। इस बीच तालिबान के बड़े नेता और अफगानिस्तान की कार्यवाहक सरकार के उप विदेश मंत्री शेर मोहम्मद अब्बास स्टेनकजई ने डूरंड लाइन को काल्पनिक रेखा बताया है। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान डूरंड लाइन के दूसरी ओर तक फैला हुआ है।
स्टेनकजई ने कहा कि उनकी सरकार डूरंड लाइन को नहीं मानती है। अफगानिस्तान की सीमा डूरंड लाइन की दूसरी ओर भी फैली हुई है। उन्होंने दावा किया कि डूरंड लाइन के कारण अफगान नागरिकों के परिवारों का बंटवारा हुआ। लोग अपने सगे-संबंधियों से बिछड़ गए। उन्होंने डूरंड लाइन विभाजन के लिए अंग्रेजों को जिम्मेदार बताया। स्टेनकजई ने पाकिस्तान से भी अनुरोध किया कि वह डूरंड लाइन पर बसे लोगों को परेशान न करे और एक दूसरे की सीमाओं में प्रवेश की प्रक्रिया को आसान करे।
कौन हैं शेर मोहम्मद अब्बास स्टेनकजई
शेर मोहम्मद अब्बास स्टेनकजई अफगान तालिबान के एक वरिष्ठ सदस्य हैं। उन्हें 7 सितंबर 2021 से तालिबान सरकार में विदेश मामलों का उप मंत्री नियुक्त किया गया। वह भारत में एक सेना अकादमी में प्रशिक्षण के बाद अफगान सेना में एक अधिकारी थे। बाद में वह सेना से अलग हो गए और अफगानिस्तान में सोवियत संघ से लड़ने के लिए इस्लामी आंदोलनों में शामिल हो गए। वह पहली तालिबान सरकार में उप कैबिनेट मंत्री थे। वह 2012 में स्थापित होने के बाद से दोहा में तालिबान के राजनीतिक कार्यालय का एक वरिष्ठ सदस्य रहे। स्टेनकजई 2015 से 2020 तक दोहा में स्थित तालिबान के राजनीतिक कार्यलय के प्रमुख भी रहे। वह अंग्रेजी, उर्दू, पश्तो और दारी भाषाएं आसानी से बोलते हैं। उन्होंने तालिबान के राजनीतिक प्रतिनिधि के रूप में दुनियाभर के कई देशों की यात्रा की है।
