10.9 C
London
Friday, May 15, 2026
Homeअंतरराष्ट्रीयजापान से न्यूजीलैंड तक फट रही धरती, बड़ी तबाही की आशंका, वैज्ञानिकों...

जापान से न्यूजीलैंड तक फट रही धरती, बड़ी तबाही की आशंका, वैज्ञानिकों ने डराया

Published on

टोक्यो

पृथ्वी का कठोर बाहरी आवरण एक दर्ज से अधिक टेक्टोनिक प्लेट से मिलकर बना है। इन्हीं टेक्टोनिक प्लेट की हलचल के कारण पृ्थ्वी पर भूकंप आते हैं। अब टोरंटो विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने बताया है कि जापान से न्यूजीलैंड तक फैली पैसिफिक टेक्टोनिक प्लेट टूट रही है। टीन ने पाया है कि प्रशांत प्लेट समुद्र के अंदर बड़े पैमाने पर क्षतिग्रस्त हो रही है। यह शोध जियोफिजिकल रिसर्च लेटर्स जर्नल में प्रकाशित हुआ है और इसमें उन विशाल ताकतों के बारे में बताया गया है जो प्लेटों को खींच रही हैं। शोध में बताया गया है कि समुद्र के नीचे के ये भ्रंश सैकड़ों किलोमीटर लंबे और हजारों मीटर गहरे हैं।

समुद्र के नीचे दरक रही सतह
विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ आर्ट सांइसेज में डिपार्टमेंट ऑफ अर्थ साइंसेज में पोस्ट-डॉक्टरल शोधकर्ता एरकन गन ने कहा, “हम जानते थे कि भूवैज्ञानिक विकृतियां जैसे कि भ्रंश महाद्वीपीय प्लेट के आंतरिक भाग पर टेक्टोनिक प्लेट की सीमाओं से दूर होती हैं। लेकिन हम नहीं जानते थे कि समुद्री प्लेटों के साथ भी यही हो रहा था।” डिपार्टमेंट ऑफ अर्थ साइंसेज के प्रोफेसर रसेल पिस्कलीवेक ने कहा, “हम जो कर रहे हैं वह प्लेट टेक्टोनिक्स को रिफाइन कर रहा है। यह दर्शाता है कि वे प्लेटें वास्तव में उतनी प्राचीन नहीं हैं जितना हमने पहले सोचा था।”

प्रशांत टेक्टोनिक प्लेट में सबसे ज्यादा हलचल
प्रशांत प्लेट दुनिया की सबसे बड़ी टेक्टोनिक प्लेट है। यह प्रशांत महासागर के अधिकांश तल का निर्माण करती है, जो उत्तरी अमेरिका के पश्चिमी तट के साथ अलास्का तक फैली हुई है। पश्चिमी छोर पर, यह जापान से न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया तक मौजूद है। यह प्लेट पैसिफिक रिंग ऑफ फायर का एक बड़ा हिस्सा बनाती है। नवीनतम शोध ने नए बिंदुओं की पहचान की है जहां प्रशांत प्लेट को नीचे खींचा जा रहा है। गन ने कहा, “यह सोचा गया था कि उप-महासागरीय पठार अधिक मोटे हैं, इसलिए उन्हें मजबूत होना चाहिए। लेकिन हमारे मॉडल और भूकंपीय आंकड़े बताते हैं कि यह वास्तव में विपरीत है। ये प्लेट काफी कमजोर हैं।”

प्रशांत महासागर में हलचल से आ सकती है तबाही
शोध दल ने पश्चिमी प्रशांत महासागर में चार पठारों – ओन्टोंग जावा, शेट्स्की, हेस और मनिहिकी – का अध्ययन किया। यह मोटे तौर पर हवाई, जापान, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया से घिरा हुआ एक विशाल क्षेत्र है। फिर डेटा को एक सुपर कंप्यूटर में डाला गया, जिसने इसकी तुलना 1970 और 80 के दशक में किए गए अध्ययनों में एकत्र की गई जानकारी से की। पाइस्कलीवेक ने कहा, “इस तरह की एक नई खोज सक्रिय पृथ्वी के बारे में हमने जो समझा और सिखाया है, उसे पलट देती है। और यह दर्शाता है कि हमारे विकसित हो रहे ग्रह के बारे में अभी भी कई रहस्य छिपे हुए हैं। ऐसे बड़े बदलाव से भूकंप और ज्वालामुखी फटने की घटनाओं में बढ़ोत्तरी हो सकती है, जिससे धरती पर तबाही आ सकती है।

Latest articles

संस्कार सेना द्वारा ‘एक शाम माँ के नाम’ कार्यक्रम का आयोजन; मातृ शक्ति और मेधावी छात्र होंगे सम्मानित

भोपाल। राष्ट्रीय संस्कार सेना के तत्वावधान में 'माता-पिता सम्मान संकल्प भारत यात्रा' की तीसरी...

दिल्ली में सीएम विष्णु देव साय ने गृहमंत्री अमित शाह को सौंपा बस्तर का विकास रोडमैप

रायपुर/नई दिल्ली। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने गुरुवार को नई दिल्ली में केंद्रीय...

जालोर: ग्रामीणों के बीच पहुंचे सीएम भजनलाल शर्मा, पंसेरी में सुबह की सैर कर जाना जनता का हाल

जालोर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गुरुवार को अपने जालोर दौरे के दौरान अपने सहज...

भारत पर नजर उठाई तो जो अब तक नहीं हुआ, वह होकर रहेगा : राजनाथ सिंह

राजस्थान। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गुरुवार...

More like this

सीजफायर तोड़ अमेरिका ने ईरान पर फिर बमबारी की, होर्मुज में 1500 जहाज फंसे

ट्रम्प बोले- डील नहीं की तो और हमले करेंगे तेहरान/वॉशिंगटन डीसी। अमेरिकी सेना ने ईरान...

अमेरिका-ईरान में फिर बढ़ा तनाव, होर्मुज में बने जंग जैसे हालात-सैन्य गतिविधियां जारी

वॉशिंगटन/तेहरान। पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है, जहां ईरान...

चीन के हुनान में पटाखा फैक्ट्री में भीषण विस्फोट, 21 की मौत, 61 लोग घायल

बीजिंग। मध्य चीन के हुनान प्रांत से एक बेहद दर्दनाक और खौफनाक खबर सामने...